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July, 2009 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

आज भी आधी आबादी संघर्षरत है .

आज सुबह ही पटना (बिहार) पंहुचा । सुबह जब अख़बार देखा तो एक मुख्या ख़बर मुह चिढा रही थी। पटना में पिछले दो दिन में व्यस्तम बाजारों में हुई महिलाओ के साथ की तीन घटनाये सचमुच दिल को झकझोर देने वाली थी । कल पटना के अति व्यस्त बाज़ार एक्सिबिसन रोड में एक युवती को कुछ लोगो ने सरे आम न केवल पीटा ,बल्कि बे-आबरू भी किया । लोग वहन बस तमाशबीन बने देखते रहे। घटनास्थल से गाँधी मैदान थाना मात्र ५०० मीटर की दुरी पर है । पुलिस को भनकतक न लगी काफी देर बाद पुलिस आई । दूसरी ख़बर कदमकुआ क्षेत्र में कुछ महिलाओ ने मात्र एक चोरी के आरोप के चलते एक महिला को सरे आम पीटा बल्कि उसके कपड़े भी फाड़ डाले । यहाँ भी लोग तमाशबीन बने थे । तीसरी घटना थोडी सी अलग है , पटना में ही एक महिला ने अपनी बेटी को छेड़ रहे युवक को न केवल पीटा बल्कि उसको कलर पकड़ कर घसीटते हुए
ये तीनो खबरें दिल को आहात करने वाली है । एक और जहाँ देश में महिलाये नित नये प्रतिमान रच रही है वही इस तरह की घटनाये दिल को आहत करती है । ये ख़बर उसी बिहार की है , जहाँ से भारत की पहली महिला लोक सभा स्पीकर हाल ही में मीरा कुमार जी बनी , बिहार ही भारत का पहला रा…

वाह वाह नेताजी !!

नमस्कार मित्रो ,
हमारे देश के नेताओ के बारे में कहने को जी नही करता है, पूछे क्यो अरे भाई कुछ अच्छा करे तो लिखे , अब उनकी करनी पर लानत भेजने से कुछ होने वाला तो है नही । खैर आज नारद मुनि जी ने प्रेरित किया तो लिखने बैठ ही गये । हमारे नेता लोग जितना सरकारी धन का दुरूपयोग करते है , उतना दुनिया में शायद ही कही होता होगा। गलती पूरी उन्ही की नही है , हम ही तो उन्हें चुन के भेजते है । अब जब ग़लत लोगो को चुनेगे तो काम भी तो गलत ही करेंगे वो । अब जरा कुछ हमारे लोकतांत्रिक प्रक्रिया के छेदों पर गौर फरमाए ।
*हमारे यहाँ चुनाव लड़ने की कोई योग्यता निर्धारित नही है , जबकि बिना स्नातक किए कोई पाकिस्तान में चुनाव नही लड़ सकता है ।
* हमारे यहाँ चुनाव प्रत्यासियो का चरित्र का सत्यापन नही किया जाता है, जबकि एक चपरसी की नौकरी लगने पर भी उसका चरित्र सत्यापन जहाँ -जहाँ वो रहा है वहां की पुलिस से करवाया जाता है ।
*आप को किसी प्रत्याशियों को नकारने का कोई प्रावधान नही है।
* हम ख़ुद मतदान के प्रति जबाबदार नही है , मत देना हमर फ़र्ज़ नही है शायद !
और भी कई बातें है मगर आज इतना ही बाकि फ़िर कभी , खैर इन में कुछ सवाल आ…

ब्लोगिंग आख़िर एक फुरसतिया काम है !!.......जवाब दो

ब्लोस्कर दोस्तों,
मेरे एक मित्र है ,जो इंटरनेट के भी अच्छे जान कार है । बहुत दिनों बाद उनसे मुलाकात हुई तो हाल चाल जानने की ओपचारिकता के बाद उन्होंने मुझसे पूछा कि भाई आजकल क्या चल रहा है ? मैंने भी ये जानते हुए कि वो इंटरनेट के जानकार है , इसलिए कहा कि आजकल ब्लोगिंग कर रहे है। लेकिन ये क्या ब्लोगिंग की सुनकर वो उल्टे मुझ पर भड़क उठे ! अरे ब्लोगिंग तो उन लोगो का काम है जिन्हें कोई काम नही होता,और उन्हें छपत की बिमारी होती है । मैंने कहा ऐसी बात नही है, आजकल ब्लोगिंग में बहुत अच्छा साहित्य और पत्रकारिता लिखी जा रही है । फ़िर जनाब जरा ऊँचे स्वर में बोले- अरे छोडो ये ब्लोगिंग वाले क्या जाने साहित्य लिखना और पत्रकारिता करना । जिनकी रचनाये किसी पत्र-पत्रिका में नही छपी तो वो ब्लॉग पर अपनी रचना पोस्ट कर साहित्यकार हो गया, जिन्हें किसी सनचार पत्र या न्यूज़ चेनल वालो ने किसी काम का नही समझा वो ब्लॉग पर पत्रकार बन गया। मैं खूब समझता हूँ इन ब्लोगेर्स को दो चार लेने लिख कर अपने आप को जाने क्या समझते है । एक तो इन्हे पढता ही कौन है ? सरे ब्लोगेर्स एक-दुसरे की रचनाओ पर झूठी टिप्पणिया देते है , वो इ…

चुपके-चुपके भाग -१

चुपके-चुपके-१
गली से गुजरा तुम्हारी, मैं एक शाम चुपके-चुपके
दिल को बैचैन कर गई, तुम्हारी मुस्कान चुपके-चुपके
तुम्हारी मुस्कुराहटों ने घायल कर दिया, इस संगदिल को
बना लो हमे अपना सनम , होगा तुम्हारा एहसान चुपके-चुपके
कब तुम ओगी, है इंतजार इस दिल-ऐ-महफ़िल को
पलके बिछाए खड़े है हम, बन जाओ मेरे मेहमान चुपके-चुपके
आंखे थकने न पाए ,कुछ तो तरस आए मेरी मंजिल को
बता दो कि कब पुरा करोगी , मेरा ये अरमान चुपके-चुपके
राह-ऐ-मोहब्बत के सफर में बन जाओ हमसफ़र तुम
बनके हमदम ,हम दे देंगे तुम्हारी खातिर जान चुपके-चुपके
जिन्दगी में मेरी आकर दे देना एक डगर तुम
बाकि न रहेगा कुछ जिन्दगी में ,होगा एक मुकाम चुपके-चुपके
हालत क्या है हमारे, डाल देना एक नज़र तुम
इंतज़ार तेरी खुशबू का इस "चंदन" को, महकेगा सारा जहाँ चुपके-चुपके
इस रचन में आपने एक लड़के की ख्वाहिश और गुजारिश देखि है , मगर उसकी प्रेमिका का जबाब भी उसे बड़े जोरदार तरीके से मिलता है। प्रेमिका का जबाब मैं आपको अगली पोस्ट में इस शर्त में लिखूंगा की ये रचना आपको पसंद आई इसका प्रमाण आपकी टिप्पणियों से जरुर मिलेगा , इसी आशा के साथ आपका हर बार…

छोटू

बड़ी बेपरवाही से, आवाज़ आई , क्यो बे छोटू
बाल मन गिलास धोये, या जूठे बर्तन समेंटू
हर नुक्कड़,हर चौराहे, हर चाय की दूकान पर
बर्तन मांजते, डांट सुनते बाज़ार या मकान पर
ग्राहकों की झिड़की और मालिक की डांट
खाली गिलासों सी जिन्दगी, जूठन में कहाँ ठाठ
हर ढाबे-दूकान में पिसता छोटू का मासूम बचपन
मासूमियत खोयी, बस बचा कप-प्लेट और जूठन
कब तक मिलेंगे ये छोटू, चाय बेचते, कचरा बीनते
आख़िर क्यों ? हम उनका बचपन छीनते
छोड़ के पाठशाला, कब तक बनेंगे जिन्दगी के शिष्य
सोच लो ! ये छोटू ही कल बनेंगे देश का भविष्य
आपका अपना ही मुकेश पाण्डेय "चंदन"

प्रेम मर रहा है !

आज क्षितिज सा हुआ प्यार
बस भ्रम मिलन का बचा संसार
गगन छू रहा है बसुधा को
पर यथार्थ विरह है सर्वदा को
अब बची कहाँ प्रतीक्षा मिलन की
बस क्षुधा ही क्षुधा है तन की
दूषित हो चुकी है हर भावना
कहाँ है पवित्रता की सम्भावना
नही है यहाँ विरह की वेदना
मर चुकी जहाँ प्रेम की संवेदना
प्रिय की कमी नही है जीवन में
कमी है तो प्रेम की हर मन में
प्रेम मर रहा ही कोई सुने पुकार
बस भ्रम मिलन का बचा संसार
आपका अपना मुकेश पाण्डेय "चंदन "

गरीब की बेटी

न तन पर है पूरे कपड़े, न खाने को है रोटी
क्योंकि मैं हूँ एक गरीब की बेटी
सारी इच्छाए मेरी अधूरी रह गयी
गरीबी, मेरे सपनो की दूरी बन गयी
मेरे पास भी है, इच्छायों अ अनंत आकाश
मेरे भी है कुस्छ सपने, है कुछ करने की आस
काश, मैं भी किसी बड़े घर में पैदा होती
न तन पर है पूरे कपड़े , न खाने को है रोटी
हर जगह निगाहें, तन को है तरेरती
पर मदद के वक्त, आंखे है फेरती
न जाने क्यों किया, ये अन्याय उसने मेरे साथ
दे दिया जीवन , पर कुछ भी नही है मेंरे हाथ
दुनिया बड़ी जालिम है, न जीने न मरने देती
क्योंकि मैं हूँ एक गरीब की बेटी
आपका ही मुकेश पाण्डेय "चंदन"

समलैंगिगता की भयावहता और भविष्य

सभी बुद्धिजीवियो को जय राम जी ,
अरे भाई जब से दिल्ली हाईकोर्ट ने समलैंगिगता पर अपना निर्णय क्या दिया पुरे देश में हल्ला हो गया , सरे न्यूज़ चैनल , अख़बार बस इसी को लेकर बहस जरी किए है । मुस्लिम संगठनो ने इसे इस्लाम विरोधी बताया तो संघ परिवार इसे भारतीय परम्पर के खिलाफ घोषित कर रहा है । बाबा राम देव भी इसके खिलाफ मोर्चा खोले बैठे है । अब तो सुप्रीम कोर्ट में भी इसके खिलाफ याचिका दायर हो गई है। अब जब चारो तरफ़ इसी का बोल बाला है तो मैंने सोचा क्यों न मैं भी अपनी तुच्छ बुद्धि से कुछ विचार प्रगट करू ।
समलैंगिगता कुछ मानसिक रूप से विकृत लोगो का शौक है। कुछ लोग कहते है कि समलैंगिग लोग जन्मजात ही होते है इसलिए इसे मान्यता देनी चाहिए । मेरे ख्याल से ये प्रक्रिया कुदरती तो बिल्कुल नही है , क्योंकि प्रकृति ने ऐसी कोई व्यवस्था नही की। और तो और जानवर भी इस तरह का व्यवहार नही करते यानि समलैंगिक लोग जानवरों से भी गए गुजरे है ! खैर कुछ लोग ऐसा चाहते है , इसलिए उसे कानूनी मान्यता मिलनी चाहिए ये कोई तर्क नही है , क्योंकि कुछ लोग तो अपराध और आतंकवाद भी फैलाना चाहते है , तो क्या उन्हें भी कानूनी मान्यता द…

मोबाईल सस्ते हो गए! अब होंगे ऐसे नज़ारे .......

नमस्कार दोस्तों,
आप ने भी बजट में ये देखा-पढ़ा होगा की मोबाईल सस्ते हो गए है । अब वैसे ही भारत में घर घर मोबाईल नामक बला पहुच गई है .(मोबाईल प्रेमियों से क्षमा ) लेकिन अब नए बजट के अनुसार और मोबाईल सस्ते होने से कुछ नए नज़रो से दो चार होना पड़ सकता है । जैसे -
१.
भिखारी - मेमसाब दो दिन से भूखा हूँ , कुछ खाने को देदो ...
मेमसाब- अभी खाना नही बना है ।
भिखारी- कोई बात नही मेमसाब आप मेरा मोबाईल नंबर ले लीजिये , जब खाना बन जाए तो मिस्ड काल कर देना ।
२.
एक भिखारी मोबाईल पर दुसरे से क्यो भाई हनुमान मन्दिर में ज्यादा भीड़ नही है , यार तू बता मजार पे आज धंदा कैसा चल रहा है।
दूसरा भिखारी यार आज जुम्मा है , मजार पर धंदा मस्त चल रहा है । तू अगर फुर्सत मेंहै तो यहाँ आजा मुझे पैसे गिनने के लिए एक असिस्टेंट की जरुरत है। मंगल को मैं तुम्हारे यहं आ जाऊंगा ।

एक अजब मुग़ल बादशाह की गजब कहानी !!

नमस्कार मित्रो,
अपने रोचक इतिहास श्रृंख्ला के तहत मैं फ़िर हाजिर हूँ, आज मैं आपको एक मुग़ल बादशाह की रोचक दास्तान बताना चाहता हूँ। हाँ बही मुग़ल बादशाह जिसमे सबसे पहले बाबर जो अपने दोनों हाथो पर दो सैनिको को लटका के किले की बुर्ज पर दौड़ लगा सकता था । उसका बेटा हुमायूँ जो दर-दर की ठोकरे खता रहा और आख़िर में पुस्कालय की सीढियो से ठोकर खा के गिर के मर गया। मगर हुमायूँ का बेटा अकबर हिंदुस्तान का ही नही सारी दुनिया का महानतम शासको में से एक था। अरे भाई हाँ वही अकबर जिसके दरवार में बीरबल, तानसेन जैसे नवरत्न थे। बिल्कुल सही पहचाना आपने जोधा-अकबर वाला । उसका बेटा जहागीर जिसकी बेगम नूरजहाँ थी , क्या कहा आपने ? अरे भाई अनारकली का इतिहास में कोई जिक्र नही है , वो तो मुग़ल-ऐ-आज़म वाले के० आसिफ की कल्पना थी । जिसके नाम से लाहौर में कब्र और बाज़ार भी है। सलीम का बेटा शाहजहाँ हुआ । जी हाँ अबकी बार आप सही है मुमताज और ताजमहल वाला ही । फ़िर औरंगजेब ने अपने बाप को कैद कर गद्दी हथिया ली।
ओफ्फो ! ये कहाँ एक अजब मुग़ल की कहानी सुनानी थी , मगर मैं तो पुरे खंडन को …

आंसू बहाता बादल

देख के आज के हालत, आंसू बहाता बादल
सीना छलनी कर धरा का,पानी के कतरे जमाता बादल
खोद-खोद धरती को , सारा पानी बहा दिया
था जो जीवन का आधार, उसे ही ढहा दिया
अब खली रुई के फाहों से बरसने की आशा करते हो
था जब पानी, खूब बहाया, अब प्यासे मरते हो
कभी मैं देख धरा की खुशहाली , खुशी के आंसू बहाता
नही बचा है ,अब उतना पानी, सोच के दिल घबराता
अभी समय है, संभलो, बचा लो जीवन की बूँद
बाद में पछताओगे, मर जाओगे जीवन को ढूंढ
उठो, जागो, कुछ करो, तुम सबको जगाता बादल
देख के आज ke haalaat , आंसू बहाता बादल

गाँधी जी के अन्तिम दिन !

प्रिय ब्लोगरिया दोस्तों,
अपने रोचक इतिहास श्रंखला के अर्न्तगत आपको गाँधी जी के अन्तिम दिनों की कुछ ऐसी बातो को बताना चाहता हूँ जो सामान्यतः लोगो को नही पता है। गाँधी जी की राष्ट्रिय आन्दोलनों में सविनय अवज्ञा आन्दोलन की असफलता के बाद भूमिका कम हो गई थी। भले ही आम आदमी के लिए महात्मा जी बहुत बड़े नेता थे , मगर कोंग्रेस के बड़े नेताओ ने उन्हें तवज्जो देना बंद कर दिया था। हाँ वे सार्वजानिक मंचो पर गाँधी जी को आगे रखते थे , क्योंकि लोगो पर उनकी अभी भी मजबूत पकड़ थी। हम कुछ उदाहरणों से इसे समझ सकते है -
१- कांग्रेस के त्रिपुरी सम्मलेन में सुभाष चन्द्र बोस गाँधी जी के समर्थित प्रत्याशी पुत्ताभी सीतारमैया के खिलाफ कांग्रेस के अध्यक्ष पद हेतु खड़े हुए, जबकि वे इससे पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष थे।
२- तत्कालीन गवर्नर जनरल लार्ड वेवेल ने गाँधी जी को ७५% राजनेता, १०% संत और ५ % चिकित्सक कहा।
३- ब्रिटेन के प्रधान मंत्री बिस्तान चर्चिल ने दूसरे विश्व युद्ध के समय कहा की हम जब सारे विश्व में जीत रहे है तब एक बूढे के सामने हार नही मान सकते है ।
४- शिमला समझौते (1945) के समय गवर्नर …

एक रोचक आन्दोलन

ब्लोग्स्कार,
इतिहास बहुत लोगो को बोर करता है, इसलिए इतिहास का छात्र होने के नाते सोचा की आप लोगो को इतिहास की कुछ रोचक जानकारियो से रु-ब-रु करू । इसी श्रंखला की पहली कड़ी में मैं आपको सविनय अवज्ञा आन्दोलन की कुछ रोचक जानकारियां देना चाहता हूँ। जी हाँ , वही सविनय अवज्ञा आन्दोलन जिसमे गाँधी जी ने दांडी यात्रा करते हुए नमक कानून तोडा था । इस आन्दोलन में गाँधी जी के कहने पर सारे देश में लोगो ने स्वदेशी वस्त्र अपनाना शुरू कर दिया । लेकिन एक रोचक घटना बिहार की छपरा जेल में हुई , वहां कैदियो ने अंग्रेजो द्वारा दिए विदेशी वस्त्रो को पहनने से इनकार कर दिया और निर्णय किया की जब तक उन्हें देशी वस्त्र नही दिए जायेंगे तब तक वे नंगे ही रहेंगे । जी हाँ वे कैदी देशी वस्त्र मिलने तक कई दिनों तक नंगे रहे , जब उन्हें देशी वस्त्र मिले तभी उन्होंने कपड़े पहने । इसे इतिहास में नंगी हड़ताल के नाम से जाना जाता है ।
तत्कालीन गवर्नर जनरल लार्ड इर्विन से हुए समझौते के अनुसार गाँधी जी एस -राजपुताना जहाज से द्वितीय गोलमेज सम्मलेन में भाग लेने लन्दन के लिए रवाना हुए , गाँधी …