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September, 2009 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

हर घर में रावण छिपा है !!

कितने पुतले जलाओगे, हर घर में रावण छिपा है
कितनी बार आग लगाओगे, हर पग पर तम जाल बिछा है
एक्पुतला जल जाने से, सारा पाप नही मर जाता
पुतले में आग लगाने से , हर नर राम नही बन जाता
जब होगा अहम् , तब तक रावण नही मरेगा
अहम् ब्रम्हास्मि मार्के भी रावण यही कहेगा
स्वार्थ, ईर्ष्या, घृणा, पाप चारो और यही मचा है
कितने पुतले जलाओगे हर घर में रावण छिपा है ।
हर दिन सीता का अपहरण हो रहा है
पुलिस प्रशासन कुम्भकरण सो रहा है
गीध जटायु मूक बनके सब छिपा है
कितने पुतले.................................
आज रावण एक नही , उसके रूप कई है
अन्याय , अत्याचार के बाद भी वह सही है
मारते मारते रावण को आज राम थक जायेंगे
इतने रावण है की कई राम भी न मार पाएंगे
कितने पुतले जलाओगे , हर घर में रावण छिपा है
कितनी बार आग लगाओगे , हर पग पर तम जाल बिछा

मित्रो आप को विजय दशमी की हार्दिक शुभकामनाये । जैसा की हम जानते है की विजय दशमी बुराई
पर अच्छाई की जीत के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है । हम भारतीय ढोंग ज्यादा करते है, मतलब हम जो त्यौहार मानते है उनमे सन्देश तो बहुत अच्छे होते है , मगर वो सिर्फ लिखने कहने के लिए ही होते है । उन प…

ये जननी, ये माता !!

बड़ी तन्यमयता के साथ , सृजनहार कर रहे थे सृजन
इतने में नारद ने पूछा - क्या कर रहे हो भगवन ?
नारद, मैं आज बना रहा हूँ , ब्रम्हांड की अनमोल काया
जिसमे होगा प्यार का सागर , और मेरी माया
या कह सकते हो, की मैं बना रहा हूँ अपना प्रतिरूप
जो देगी सबको छाया, करके सहन जीवन की धूप
वो हंसकर झेलेगी कष्ट, पर फ़िर भी करेगी सृजन
सृजनहार भले ही मैं हूँ , पर वो देगी सबको जीवन
उसके बिना अकल्पनीय होगी , सारी सृष्टि
प्रेम का प्रतीक , होगी उसकी वात्सल्य पूर्ण दृष्टि
आज मैं करके उसका सृजन , अपने को धन्य पाता
मुझसे भी बढ़कर होगी, ये जननी, ये माता !!

जैसा की आप सभी जानते है की आजकल पूरे देश में आदि शक्ति जगत जननी दुर्गा का महापर्व नवरात्री मनाया जा रहा है । इस पर्व में लोग दुर्गा के नारी स्वरुप का पूजन करते है , कन्याओ को देवी मान कर उनकी पूजा करते है । मगर क्या हम सचमुच इस पर्व का औचित्य या मतलब समझ पाए है ? क्या हम झूठ मूठ ही नही देवी के दिखावे के लिए दर्शन प्रदर्शन नही कर रहे है ? क्या बड़ी बड़ी झांकिया और पंडाल सजाने से देवी प्रसन्न हो जायेगी ? क्या नो दिन भूखे रहने से देवी की हम पर कृपा हो जायेगी ?
जब तक इ…

कुछ बचपन की यादें, शायद आपके साथ भी ऐसा हुआ हो !

दोस्तों , बचपन बहुत ही निराला होता है । न कोई चिंता , न कोई फिकर बस अपने में मस्त ! मेरी इस बात से आप सभी सहमत होंगे ? हर किसी के बचपन की तरह मेरा बचपन भी बड़ा ही सुंदर रहा । मेरे बचपन की बड़ी प्यारी सी याद आपसे बांटने का जी कर रहा है । मेरा जन्म जरूर बिहार के बक्सर जिले में हुआ मगर चार साल की उम्र के बाद मैं सागर (म०प्र०) में ही खेला कूदा हूँ ।
मैं जिस कसबे में रहता था वहां हर साल कसबे के लोगो के द्वारा दशहरा के समय रामलीला खेली जाती थी । मेरे उम्र के भी कई बच्चे भी रामलीला में भाग लेते थे । मुझे भी राम लीला देखने में मजा आता और उसमे भाग लेने का मन करता था। कई बार कोशिश की मगर कोई फायदा नही हुआ । मुझे किसी पत्र के लायक नही समझा गया । पर अपनी किस्मत भी जोरदार थी , एक जब दशहरा के दिन रावन बध का मंचन होना था । रामलीला का यह प्रसंग देखने दूर दूर के गांवों से लोग आए थे । राम-हनुमान में जोरदारhओ रही थी । मैं रामलीला के प्रबंधक के यहाँ हर दिन की तरह एक आशा के साथ पंहुचा । मगर आज तो गजब हो गया इस विशेष दिन मुझे वानर सेना के एक वानर के रोल के लिए चुना गया। मैं स्वाभाविक रूप से बड़ा खुश !!
अ…

मजहब

मजहब सिखाता है , आपस में सब भाई भाई

तो भइया क्यो होती है , मजहब के नाम पे लडाई

क्या मजहब के बन्दों को मजहब का पाठ समझ न आया

क्यों मजहब के नाम पर, इन बन्दों ने खुनी रंग चढाया

इनको मजहब का पाठ पढ़ा दे कोई ज्ञानी

समझा दे इनको खून खून है , नही है पानी

अमन का संदेसा देकर इनको, बंद करवा दे मौत का तमाशा

होता रहा ये सब तो कुछ न बचेगा, न मजहब न खुनी प्यासा

मन्दिर के घंटे चीखे, चिल्लाएं मस्जिद की अजाने

मजहब की लडाई बंद कर दो, ओ मजहबी दीवाने

अपने मंसूबो की खातिर, क्यों करते हो मजहब बदनाम

एक संदेशे नानक ईसा के , एक ही आल्लाताला राम

मित्रो , आप सभी को नवरात्री और ईद की दिल से ढेर शुभकामनाये ।

कुर्सी खामोश है !!

अजब सा हो गया है, देश का हाल
सबसे सस्ती कारऔर सबसे महंगी दाल
कहीं बाढ़ से लोग त्रस्त,कहीं पर सूखा
आम इन्सान परेशां खड़ा , नंगा और भूखा
जिन्दगी की साडी मिठास ले महँगी हुई चीनी
बची खुची इज्ज़त भी कुदरत ने छिनी
आंकडो में महंगाई और मुद्रास्फीति घट रही है
हकीकत में क़र्ज़ से किसान की छाती फट रही है
कहीं पानीसे तबाही, कहीं पानी की कमी
पर कुर्सी खामोश है, सलामत जो उसकी जमीं
मित्रो , देश के हालत आपसे छुपे नही है , मगर हमरी खाशी ही कुर्सी को खामोश किए है । आज बढती महंगाई के कारन एक आम आदमी को दाल रोटी भी ढंग से नसीब नही हो पा रही है , आम आदमी की सरकार के मंत्री तो फाइव स्टार होटलों में मजे कर रहे मगर आम आदमी .............?
यही हाल आम आदमी की भाषा हिन्दी का भी है , जिस तरह सत्तानशीं लोगो को आम आदमी की याद चुनावो में आती है , उसी तरह हिन्दी की याद भी सितम्बर के महीने आती है । कल हिन्दी की पुण्यतिथि ओफ्फ्हो क्षमा करना हिन्दी दिवस है । हम क्यों साल के कुछ दिन हिन्दी को कुछ दिन याद कर उसे श्रद्धांजलि देते है ? मैं आप सभी हिन्दी ब्लोगेर्स को नमन करता हूँ , जो हमेशा हिन्दी की लाज बचाए रखते है । …

भैंस चालीसा

भैंस चालीसा महामूर्ख दरबार में, लगा अनोखा केस फसा हुआ है मामला, अक्ल बङी या भैंस अक्ल बङी या भैंस, दलीलें बहुत सी आयीं महामूर्ख दरबार की अब,देखो सुनवाई मंगल भवन अमंगल हारी- भैंस सदा ही अकल पे भारी भैंस मेरी जब चर आये चारा- पाँच सेर हम दूध निकारा कोई अकल ना यह कर पावे- चारा खा कर दूध बनावे अक्ल घास जब चरने जाये- हार जाय नर अति दुख पाये भैंस का चारा लालू खायो- निज घरवारि सी।एम. बनवायो तुमहू भैंस का चारा खाओ- बीवी को सी.एम. बनवाओ मोटी अकल मन्दमति होई- मोटी भैंस दूध अति होई अकल इश्क़ कर कर के रोये- भैंस का कोई बाँयफ्रेन्ड ना होये अकल तो ले मोबाइल घूमे- एस.एम.एस. पा पा के झूमे भैंस मेरी डायरेक्ट पुकारे- कबहूँ मिस्ड काल ना मारे भैंस कभी सिगरेट ना पीती- भैंस बिना दारू के जीती भैंस कभी ना पान चबाये - ना ही इसको ड्रग्स सुहाये शक्तिशालिनी शाकाहारी- भैंस हमारी कितनी प्यारी अकलमन्द को कोई ना जाने- भैंस को सारा जग पहचाने जाकी अकल मे गोबर होये- सो इन्सान पटक सर रोये मंगल भवन अमंगल हारी- भैंस का गोबर अकल पे भारी भैंस
मित्रो ये मेरी रचना नही है , इसे किसी मित्र ने ही मुझे ऑरकुट पर स्क्रैप किया था , मु…

भारत भी बन सकता है , शत प्रतिशत साक्षर !!

आज यानि ८ सितम्बर को विश्व साक्षरता दिवस है । आज का दिन हमें सोचने को मजबूर करता है , की हम क्यो १०० % साक्षर नही है ? यदि केरल को छोड़ दिया जाए तो बाकि राज्यों की स्थिति बहुत अच्छी नही कह जा सकती है । सरकार द्वारा साक्षरता को बढ़ने के लिए सर्व शिक्षा अभियान, मिड दे मील योजना , प्रोढ़ शिक्षा योजना , राजीव गाँधी साक्षरता मिशन आदि न जाने कितने अभियान चलाये गये , मगर सफलता आशा के अनुरूप नही मिली । मिड दे मील में जहाँ बच्चो को आकर्षित करने के लिए स्कूलों में भोजन की व्यवस्था की गयी , इससे बच्चे स्कूल तो आते है , मगर पढने नही खाना खाने आते है । शिक्षक लोग पढ़ाई की जगह खाना बनवाने की फिकर में लगे रहते है । हमारे देश में सरकारी तौर पर (वास्तव में ) जो व्यक्ति अपना नाम लिखना जानता है , वह साक्षर है । आंकड़े जुटाने के समय जो घालमेल होता है , वो किसी से छुपा नही है । अगर सही तरीके से साक्षरता के आंकडे जुटाए जाए तो देश में ६४.९ % लोग शायद साक्षर न हो । खैर अगर सरकारी आंकडो पर विश्वास कर भी लिया जाए तो भारत में ७५.३ % पुरूष और ५३.७ % महिलाये ही साक्षर है । मगर सच्चाई इससे अलग है । (ये आंकड़े सा…

गणेशोत्सव और कांटा लगा !!

गणेश चतुर्थी के पहले लोग पंडाल सजा रहे थे
लेकिन धार्मिक की जगह, फिल्मी गीत बजा रहे थे
बंगले के पीछे कांटा लगा, बुद्धि विनायक सुन रहे थे
मनो काँटों से बचने के लिए जाल कोई बुन रहे थे
बेरी के नीचे लगा हुआ था, काँटों का अम्बार
लहूलुहान से बैठे गजानन , होके बेबस और लाचार
सोच रहे थे , कब अनंत चतुर्दर्शी आएगी ?
जाने कब बेरी के काँटों से मुक्ति मिल पायेगी ?
मुश्किल हो गया, इस लोक में शान्ति का ठिकाना
नाक में दम कर दिया , और कहते अगले बरस जल्दी आना !
मैं इसी बरस जल्दी जाने की सोच रहा हूँ
अपने फिल्मी भक्तो के लिए अपने आंसू पोछ रहा हूँ
मुझसे बढ़कर , इनके लिए फिल्मे और फिल्मी संसार
फ़िर गणेशोत्सव क्यों मनाते ? करते क्यों मुझ पर उपकार ?
मित्रो , गणेश विसर्जन के साथ गणेशोत्सव समाप्त हो गया , पर दुःख की बात है की लोकमान्य तिलक ने जिस उद्देश्य के साथ इसे शुरू किया उसकी पवित्रतता तो जाने कब की ख़त्म हो गयी है। अब लोग इस परम्परा को बस निभा रहे है ! उनमे वो श्रद्धा और भक्ति की भावना नही बची है । शेष भगवन मालिक है । गणपति बाप्पा मोरिया रे ......

वाजपेयी का काव्य पाठ और खली पड़ी कुर्सियां !!

नमस्कार मित्रो,
पिछले दिनों १३ औगस्त को डॉ हरिसिंह गौर केंद्रीय विश्वविद्यालय, सागर (म०प्र०) के हिन्दी विभाग द्वारा हिन्दी के जाने माने कवि, राजनयिक और पत्रकार डॉ अशोक वाजपेयी जी का काव्य पाठ aआयोजित किया गया था । पर हाय रे विडम्बना और विश्वविद्यालय प्रशासन की व्यवस्था की इतने नामी कवि का काव्य पाठ और उसकी सूचना तक आम लोगो को नही दी गयी । परिणामस्वरूप कार्यक्रम में जब डॉ वाजपेयी अपने जन्मस्थान में आयोजित इस कार्यक्रम में अपना काव्य पाठ कर रहे थे ,तो विश्वविद्यालय के स्वर्ण जयंती हाल में बमुश्किल पचास लोग भी नही थे । अपने जन्म स्थान पर इतने नामी कवि के काव्य पाठ पर दिल रो आया , की विश्वविद्यालय प्रशासन ने अगर सिर्फ़ स्थानीय समाचार पत्रों में छोटी सी ख़बर भी दे दी होती तो डॉ वाजपेयी के हजारो प्रशंशक टूट पड़ते । डॉ वाजपेयी ने कार्यक्रम में अपनी १९ कविताये और सागर (म० प्र० ) शहर के अपने अनुभव सुनाये । पर उनकी आँखों में कही नामी भी नज़र आई कि जिस शहर कि तारीफ वो अपने हर कार्यक्रम में बड़ी शिद्दत के साथ करते है , उस शहर को हर जगह बड़े गर्व के साथ अपना जन्म स्थान बताते है । उस शहर ने उनके स…