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जब इंदिरा जी को अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा- कुतिया और डायन.....!!!!

शीर्षक पढ़कर आप चौंक गये न ?!
मैं भी पटना से प्रकाशित हिंदुस्तान समाचार पत्र को २५ जनवरी को " नेहरु को अशिष्ट मानता था चीन " शीर्षक से छपी खबर को पढ़कर चौंका था ।
आपके के लिए हिंदुस्तान की खबर ज्यो के त्यों बिना किसी फेरबदल के प्रस्तुत कर रहा हूँ ।
" नेहरुकोअशिष्टमानताथाचीन "
'निक्सन , इंदिराएंडइंडियापोलिटिक्सएंडबियोंड ' पुस्तकसेहुआखुलासा

भाषा

नई दिल्ली

प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरु ने हालाँकि 'हिंदी चीनी भाई-भाई ' का प्रसिद्ध नारा दिया था , लेकिन चीन ने उन्हें अशिष्ट और भारत को विदेशी मदद के मामले में अँधा कुआं माना था ।

चीन का यह भी नजरिया था कियह काफी दुखद है कि दिवंगत प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी ने भी अपने पिता से उनकी पुस्तक भारत एक खोज में अभिव्यक्ति फलसफे कि विरासत को अपनाया । इस बारे में चीन का मानना था कि भारत एक खोज नेहरु के इस विचार को जाहिर करती है कि महँ भारत का साम्राज्य मलेसिया , सीलोन (श्रीलंका ) तथा अन्य क्षेत्रो तक फैला हुआ था। ये टिपण्णी चीन के पूर्व प्रधानमंत्री चाऊ एन लाई ने पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन के समय कीथी । …

अब गूगल खोजेगा लापता लोगो को .......

जी हाँ , गूगल अब तक जो इंटरनेट पर सामग्री खोजकर हम सब की मदद करता था । वो अब हैती में आये भूकंप के कारन लापता हुए लोगो को खोजने में मदद करेगा। गूगल ने एक सोफ्टवेयर हैती सरकार की सहायता के लिए तैयार किया है । जिसमे हैती में कोई भी व्यक्ति गूगल पर जाकर अपने लापता सम्बन्धी की जानकारी जैसे उसकी उम्र, लिंग, कद, और फोटो के आधार पे खोजने में मदद करेगा। ये सुविधा हैती वासियों को निसुक्ल प्रदान की जाएगी । खैर गूगल का ये कदम न केवल स्वागत योग्य है वल्कि प्रसंसनीय भी है । हमारी तकनीक अगर मुसीबत में इंसानियत के काम आती है तो ही उसकी सार्थकता है। गूगल को शुक्रिया ।

पुछल्ला ;-)
हमारे झल्लू जी के सुपुत्र से जब स्कूल में टीचर ने उसके पिता का नाम पूछा तो झाल्लुपुत्र ने बड़ी मासूमियत से जवाब दिया -जी गूगल !!!
टीचर - क्या मतलब है तुम्हारा ?
झाल्लुपुत्र- जी , क्या है , किमेरे पिताजी जब देखो कुछ न कुछ खोजते रहते है , कभी तौलिया, कभी मोज़े तो कभी मुझे !!
इसलिए मेरी मम्मी ने उनका नाम ही गूगल रख दिया है, मेरे पुरे मोहेल्ले के लोग भी उन्हें ग्गोगल ही पुकारते है ।:-)

झल्लू जी पहुचे हरिद्वार !! फसे नयी परेशानी में .........

नमस्कार दोस्तों, अपने जवाहर सिंह झल्लू जी इस बार मकर संक्रांति के शुभ अवसर पर हरिद्वार में लगे महाकुम्भ पहुच गये। अब जब झल्लू जी जहाँ हो वहां कोई अनोखी बात न हो ऐसा हो ही नही सकता है ! पहली बात अपने झल्लू जी ही अनोखे है ! अब झल्लू जी हरिद्वार में जैसे ही गंगा के किनारे कपडे उतार कर नहाने के लिए घुसे तो पानी ठंडा था। किसी तरह हिम्मत बांध कर झल्लू जी आख़िरकार जल में घुस ही गये । अब जब घुस गये तो डुबकी भी लगा ली। जब झल्लू जी डुबकी लगा के बहार आये तो , गजब हो गया ! भई , कोई महँ पापी जो अपने पाप धोने हरिद्वार कुम्भ में आया होगा , मगर अपनी आदत छोड़ नही पाया और झल्लू जी के कपडे मार ले गया ।
अब झल्लू जी लंगोट पर सर्दी में ठिठुरते खड़े ! समझ में नही आ रहा की क्या करे ? जब ठण्ड ज्यादा लगने लगी तो पोलिस थाने की और जोर से दौड़ लगा दी । मगर झल्लू जी की परेशानी यहीं ख़त्म नही हुई , उनके के पीछे एक आदमी भी दौड़ लगाने लगा ! झल्लू जी अब और परेशां की एक तो नंगे बदन ठण्ड में कुल्फी हो रहे थे , ऊपर से ये मुया पीछे पड़ गया । अब झल्लू जी आगे बड़ी तेजी से अपनी पूरी दम लगा के भागे ................ वह आदमी भी उतनी ह…

झल्लू जी की नई परेशानी !

प्रिय मित्रो , अब तक आप जवाहर सिंह "झल्लू " से तो परिचित हो चुके होंगे । जैसा की आप जानते है की झल्लू जी हर बार अपनी अकल मंदी से कोई परेशानी मोल लेते है और हंसी के पात्र बन जाते है । अब सर्दी कड़ाके की पड़ रही है, मगर जल्लू जी का दिमाग भी सर्दी की तरह कड़ाके का दौड़ रहा है ! अब झल्लू जी कुछ सवालो को लेकर परेशां है , उनके सवालो के जवाब मेरे पास तो नही है शायद आप के पास हो ...........?
सवाल -१ भारत में अभी तक चुटकुले सरे रिश्तो जैसे - माँ-बाप , भाई-बहन , सास-बहु, चाचा-भतीजा, भाई-भाई, जीजा-साली, भाभी-देवर आदि पर बने मगर अभी तक कोई ससुर के ऊपर चुटकुला नही बना ! आखिर क्यों ?
२ आखिर सबसे ज्यादा चुटकुले सरदारों पर ही क्यों बनाये जाते है ?
३ चुटकुला शब्द की उत्पत्ति कैसे हुई ?

आप सभी को संक्रांति, पोंगल, खिचड़ी, लोहड़ी की हार्दिक शुभकामनाये...... जय हो

औरत और आंसू !!

औरत और आंसू , है कितनी समानता
दोनों सुख-दुःख के साथी, लेके महानता
सुख दुःख का पर्याय , नयन-नीर और नारी
छलक पड़ते दोनों, सुख हो या दुःख भरी
आजीवन ही नारी की आँखों में होता पानी
हर मुस्कान और तीस से जुडी दोनों की कहानी
बिन आंसू के आँखे , कहलाती संवेदनहीन
बिन नारी के कहाँ समाज भी कहलाता कुलीन
औरत के लिए कब किसने आंसू बहाए ?
औरत के आंसू पर समाज ने खूब गीत गाये
दूजो के लिए ही तो औरत व् आंसू काम आये
अपने लिए भी बह सके , कभी तो ऐसी शाम आये ...
पुछल्ला ;- )
जवाहर सिंह "झल्लू " जब घर पहुचे तो देखा उनका बेटा रो रहा था , जब झल्लू जी ने उससे रोने का कारन पूछा तो उसने रोते-रोते बताया - पापा आज मुझे फिर से मम्मी ने मारा है। अब बहुत हो गया मेरा बा आपकी बीबी के के साथ गुजारा नही हो सकता है। मैं जा रहा हूँ ।
नव वर्ष की पुनः शुभकामनाओ के साथ आपका ही
मुकेश पाण्डेय "चन्दन"