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हो सकती है .. देश में फिर से एक क्रांति ?!!!

दोस्तों ,
बापू की पुण्यतिथि पर देश में बहुत समय के बाद भ्रष्टाचार के खिलाफ देश लाम बंद हुआ है । दिल्ली में किरण बेदी , अरविन्द केजरीवाल , स्वामी अग्निवेश और भ्रटाचार से पीड़ित असंख्य लोग... ...... जयपुर में अरुणा राय ...बिलासपुर में बाबा रामदेव .........और देश में कई जगह न जाने कितने लोग .................... एक आशा और आक्रोश के साथ .......
टेलीविजन पर जब इन आक्रोशित लोगो को देखा तो यह आन्दोलन कुछ अलग सा था ........?
इसमें स्वार्थी नेता नहीं थे !
इसमें राजनीति नहीं थी !!
इसमें कई अच्छे लोग शामिल थे !
इसमें आम आदमी अपने आम मुद्दे पर एकजुट हुए थे !
अब इन सब को देख कर जेहन में इतिहास में पढ़ी हुई कई क्रांतियाँ याद आ गयी ......... १७७६ में अमेरिका में लोगो ने अंग्रेजो के खिलाफ इसी तरह आवाज उठाई .... और दुनिया के पहले लिखित संविधान के साथ एक लोकतंत्र का जन्म हुआ ............. १७८९ में फ़्रांस में पेरिस में इसी तरह लोगो की भीड़ ने एक क्रांति को जन्म दिया ...... दुनिया को स्वतंत्रता , बंधुता, और समानता का नारा मिला । ....... भारत में लोग इसी तरह ..........गाँधी जी क…

स्वामी विवेकानंद कुछ जाने कुछ अनजानेसे .... युवादिवस की शुभ कामनाएं . फिर हाजिर हूँ ..... एक नए जोश धमाके के साथ !!

नमस्कार मित्रो,
सभी ब्लोगर्स भाई-बहनों , माताओ, चाचाओ, चाचियों , मामियों , मामाओं आदि सभी पढने वालो को देर से ही सही नव वर्ष की शुभकामनाये । इतने दिन तक गायब रहने के लिए क्षमा चाहता हूँ। वजह सिर्फ इतनी सी है की पिछले दिनों मैं मध्य प्रदेश राज्य लोक सेवा आयोग की मुख्य परीक्षा में व्यस्त रहा ।
मित्रो आज स्वामी विवेकानंद जी की जन्म तिथि को सारे देश में युवा दिवस के रूप में मनाया जा रहा हूँ तो सोचा क्यूँ न उनके जीवन के कुछ जाने अनजाने पहलूओ की चर्चा की जाये ........
स्वामी जी को आज हम विवेकानंद के नाम से जानते है , लेकिन सन्यासी होने के बाद स्वामी जी ने अपने बचपन के नाम नरेन्द्र नाथ दत्त को त्यागकर अपना नाम स्वामी विविदिशानंद रखा था । लेकिन जब विश्व धर्म संसद में भाग लेने के पहले जब खेतड़ी महराज ने स्वाजी से कहा की - स्वामीजी आपका यह नाम थोडा कठिन है , अतः आप कोई सरल सा नाम रखे तो लोगो को आसानी होगी । स्वामीजी ने खेतड़ी महराज की बात मानकर अपना नाम विवेक आनंद अर्थात विवेकानंद कर लिया । और ११ सितम्बर १८९३ को शिकागो में साडी दुनिया ने भारत के इस सन्यासी को सनातन धर्म की श्रेष्ठता पर दहाड़ते…