शनिवार, 7 अप्रैल 2012

जब से आये तुम सजन

हर दिन सुहाना लगने लगा, जब से आये तुम सजन
अब सब मन को भाने लगा, जब से आये तुम सजन
दरवाजे पे दिन-रात आंखे ताकती
हर आहात पे खिड़की से झांकती
हर पल रहता बस ध्यान तुम्हारा
तुम बिन लगे कुछ भी प्यारा
अब दिल भी गुनगुनाने लगा है, जब से आये तुम सजन
हर दिन सुहाना लगने लगा, जब से आये तुम सजन
चाँद भी विरह की आग बरसता
दीपक भी मानो दिल को जलाता
कोकिल की कूक भी कर्कश लगती
तुम्हारे स्वप्न बसा, आंखे दिन-रात जगती
अब दीपक भी जगमगाने लगा, जब से आये तुम सजन
चाँद भी सुधा बरसाने लगा, जब से आये तुम सजन
फूल भी सारे मुरझाने लगते
लोग भी सरे अलसाये लगते
आँखे भी बरसाती थी शबनम
कुछ भी करने में लगे मन
अब भौंरा भी भिनभिनाने लगा, जब से आये तुम सजन
मन भी प्रेम गीत गाने लगा, जब से आये तुम सजन

4 टिप्‍पणियां:

  1. अब भौंरा भी भिनभिनाने लगा, जब से आये तुम सजन
    मन भी प्रेम गीत गाने लगा, जब से आये तुम सजन

    वाह!!!!!!बहुत सुंदर रचना,अच्छी प्रस्तुति........

    MY RECENT POST...काव्यान्जलि ...: यदि मै तुमसे कहूँ.....

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  2. अब भौंरा भी भिनभिनाने लगा, जब से आये तुम सजन
    मन भी प्रेम गीत गाने लगा, जब से आये तुम सजन
    क्या बात है..बहुत खूब....बड़ी खूबसूरती से दिल के भावों को शब्दों में ढाला है.

    उत्तर देंहटाएं
  3. अच्छी प्रस्तुति
    नै पोस्ट पर आपका स्वागत है

    मैं ब्लॉग जगत में नया हूँ मेरा मार्ग दर्शन करे !
    http://rajkumarchuhan.blogspot.in

    उत्तर देंहटाएं

ab apki baari hai, kuchh kahne ki ...

orchha gatha

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