शुक्रवार, 29 जून 2012

गंगा भले ही श्रेष्ठ हो मगर ज्येष्ठ है मैकलसुता !


अमरकंटक में नर्मदा  कुंड


नमस्कार मित्रो ,
 आज हम चर्चा करेंगे मध्य प्रदेश की जीवनरेखा कही जाने वाली एक अति महत्पूर्ण नदी "नर्मदा " की , जिसे पुराणों में रेवा के नाम से जाना गया है . भारत में बहने वाली लगभग सभी नदिया विवाहित मानी जाती है , जबकि सौमोदेवी - नर्मदा ही एक मात्र नदी है , जो अविवाहित है !   गंगा की उत्पत्ति की कथा तो आप सभी जानते होंगे , कि विष्णुपदी गंगा स्वर्ग से भागीरथ के प्रयास से पृथ्वी पर अवतरित  हुई . जबकि नर्मदा इसके पूर्व से ही भूलोक में विराजमान थी . अगर हम धार्मिक-पौराणिक संदर्भो से भी हटकर भूगर्भिक/ भौगोलिक प्रमाणों का सहारा ले तो हिमालय से निकलने वाली गंगा से नर्मदा प्राचीन प्रमाणित होती है
नर्मदा कुंड से नर्मदा का उद्गम
. जैसा  कि हमने भूगोल की किताबो में पढ़ा है , कि हिमालय एक नवीन वलित पर्वत है, जो प्लेट- विवर्तनिक प्रक्रिया के फलस्वरूप उत्पन्न हुआ है . अर्थात इसकी उत्पत्ति बहुत बाद में हुई है . इसके पूर्व यहाँ पर टेथिस सागर था , तो जाहिर है कि उससे निकलने वाली गंगा भी हिमालय के बाद ही उत्पन्न हुई होगी . जबकि भूगर्भिक साक्ष्य बताते है , कि अरावली , विंध्यांचल , सतपुड़ा और मैकल जैसी श्रेणिया अवशिष्ट पर्वतो का उदहारण है , जो कि हिमालय से बहुत पहले से मौजूद है .तो मैकल पर्वत की अमरकंटक चोटी (जिला  - अनुपपुर, मध्य प्रदेश) से निकलने वाली नर्मदा भी गंगा से बहुत प्राचीन है.
भेड़ाघाट (जबलपुर ) में संगमरमरी घाटी में नर्मदा   
नर्मदा के विवाह के सम्बन्ध में एक पौराणिक कथा मिलती  है - नर्मदा का विवाह सोनभद्र नाम के युवक से होने जा रहा था , तभी नर्मदा को पता चला कि सोनभद्र एक आदिवासी कन्या जोहिला से प्रेम करता है . तब नर्मदा क्रोधावेश में अमरकंटक से दक्षिण - पश्चिम दिशा की ओर नदी रूप में आगे बढ़ने लगी , नर्मदा को रोकने के लिए पंडित- नाई आदि पहाड़ो के रूप में खड़े हुए  , मगर नर्मदा सारी बाधाओ  को चीरकर आगे बढती  रही. इधर अमरकंटक में ही सोनभद्र नद का रूप लेकर उत्तर- पूर्व दिशा में आगे बढ़ा , जहाँ उसका मिलन जोहिला से हुआ . इस तरह भारत की सारी नदियों में नर्मदा ही अविवाहित है . और इसी कारण से नर्मदा का महत्त्व अन्य नदियों से ज्यादा है . नर्मदा ही भारत की एकमात्र नदी है , जिसकी परिक्रमा की जाती है . हर साल हजारो लोग नर्मदा  की पैदल परिक्रमा पूरी करते है .   
पूरी दुनिया में अमरकंटक ही ऐसा स्थल है , जहा से तीन नदियों (नर्मदा, सोन और जोहिला) का उद्गम हुआ है , और तीन विपरीत दिशाओ में बहती है .  
नर्मदा घाटी परियोजना के अंतर्गत नर्मदा  और उसकी सहायक नदियों पर 29 बड़े , १३५ मध्यम और 3000 छोटे बांध बनाये  जा रहे  है, जिसका विरोध नर्मदा बचाओ आन्दोलन (मेधा पाटकर ) जैसे संगठन कर रहे है.    
नर्मदा अपने उद्गम से 8 - 10 किमी ० बाद कपिलधारा एवं दुग्धधारा जलप्रपात बनाती  है, जबलपुर के पास भेड़ाघाट में नर्मदा मध्य प्रदेश का सबसे बड़ा जलप्रपात धूंआधार बनाती है . बडवाह के पास मान्धाता और दरदी नाम के दो जलप्रपात का निर्माण होता है . महेश्वर के निकट नर्मदा सहस्त्रधारा   जलप्रपात का निर्माण करती है .
ओम्कारेश्वर  में ॐ के आकार में नर्मदा का विहंगम दृश्य
नर्मदा मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिले के अमरकंटक से निकल कर गुजरात में खम्भात की खाड़ी में मिलने तक 1312  किमी ० का सफ़र तय करती है , जिसमे सबसे ज्यादा मध्य प्रदेश में 1077  किमी ० प्रवाहित होती है . नर्मदा मध्य प्रदेश , महाराष्ट्र और गुजरात तीन राज्यों से बहती है . नर्मदा के बेसिन  का क्षेत्रफल 86,000  वर्ग किमी ० है . नर्मदा अनुपपुर , मंडला, डिंडोरी ,जबलपुर, नरसिंहपुर, होशंगाबाद , रायसेन , हरदा, खंडवा , खरगौन . धार, सीहोर  , देवास, बडवानी और अलीराजपुर जिलो से बहती है . 

गुजरात में सरदार सरोवर  बांध का सुन्दर दृश्य
 नर्मदा की सहायक नदियों के नाम भी बड़े दिलचस्प है . नर्मदा के दांये तट से मिलने वाली नदिया है - हिरन , तेंदोनी, बारना  , चन्द्र केशर , मान , हथिनी  आदि तो बांये तट से बंजर, दूधी  , शक्कर, तवा , गंजाल , छोटी तवा , कुण्डी देव, गोई आदि  


नमामि देवी नर्मदे


नर्मदा मैकल श्रेणी से निकल कर सतपुड़ा और विंध्यांचल पर्वत को विभाजित करती है . नर्मदा मध्य प्रदेश को भी दो भागो में बाँटती है नर्मदा के किनारे  बारह ज्योतिर्लिंगों  में से एक ओम्कारेश्वर स्थित है , जहाँ नर्मदा ॐ के आकार में बहती है  .नर्मदा के किनारे मांडू या मांडव नामक बहुत ही खूबसूरत पर्यटन स्थल है .गंगा जहाँ मनुष्यों के पापो को धोती है , तो नर्मदा जड़ वस्तुओ को भी देवत्व प्रदान करती है . तभी तो कवि शिव मंगल सिंह "सुमन " को लिखना पड़ा-
नर्मदा में   गिरा  जो कंकर 
 
                                                              हर- हर करता बना वो शंकर   !
तो कैसी लगी आप को नर्मदा की ये यात्रा .....जरुर बताना 
आपका अपना ही मुकेश पाण्डेय " चन्दन " 

























17 टिप्‍पणियां:

  1. अमर-कंटक से खम्भात |
    विस्तार है अपार |
    धुआंधार सम प्रपात
    महाराष्ट्र गुजरात |
    मध्य प्रदेश की विशेष -
    नमामि देवि नर्मदे -

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  2. रविकर जी स्वागत है बार- बार
    यु ही बनाये रखना स्नेह की बौछार

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  3. बहुत रुचिकर और जानकारी से भरा -संलग्न चित्रों ने दृष्यमान बना दिया -आभार !

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  4. रुचिकर जानकारी देते हुए बेहतरीन प्रस्तुति के लिए,मुकेश जी,,,, बधाई,,,,
    अमरकंटक मेरे ही जिले में मेरे यहाँ से ४६ कि० मी० दूर है,

    MY RECENT POST काव्यान्जलि ...: बहुत बहुत आभार ,,

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    1. धीरेन्द्र जी तब तो मेहमानवाजी के लिए तैयार हो जाइये

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  5. चित्रों के साथ बेहतरीन जानकारी .....मुकेश जी
    जाने की इच्छा जाग्रत हो गई है जी

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  6. बिलकुल संजय जी , पधारो म्हारे देश

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  7. सुंदर जानकारी नर्मदा और उसके उदगम के बारे में.

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  8. रोचक और अद्भुत जानकारी.........धन्यवाद

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ab apki baari hai, kuchh kahne ki ...

orchha gatha

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