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March, 2012 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

जुगाड़ सिस्टम (हास्य कविता)

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एक अमेरिकी निकला, भारत के सफ़र पर
पर भीड़ भाड़ के कारण , न मिला होटल में अवसर
न जाने कितने होटलों के लगा चुका था, चक्कर
पर हर जगह उसे निराश मिली, हाउसफुल पढ़कर
एक आदमी मिला, बोला मिल जायेगा रूम, तुम्हे जुगाड़ पर
बस इसके लिए तुम्हे खर्च करने होंगे , कुछ और डालर
व्हाट इज जुगाड़ ? इससे कैसे मिलेगा रूम
दिस इज इंडियन सिस्टम, बस तू ख़ुशी से झूम
इस तरह आदमी ने अमेरिकी को दिलाई राहत
पर वो हैरान देख के जुगाड़ की जगमगाहट
उस आदमी ने अमेरिकी को जुगाड़ से दिलाया वापिसी टिकट
पर इस जुगाड़ सिस्टम से था , एक प्रश्न विकट
पहुचते ही अमेरिका, उसने प्रेसिडेंट से संपर्क साधा
इंडिया से जल्द मांगो जुगाड़ सिस्टम, जो दूर करे हर बाधा
अमेरिकी प्रेसिडेंट ने फोम लगाया, तुरत इंडियन प्राइम मिनिस्टर को
बोले क्या है ये जुगाड़ सिस्टम, जो दीवाना बनाये इस मिस्टर को
जल्द से जल्द आप हमें ये जुगाड़ सिस्टम एक्सपोर्ट कीजिये
सॉरी हम मजबूर है, इस बार हमें बक्श दीजिये
पहली बार हमें आपको मनाही करनी पड़ रही है
बस इसी सिस्टम से ही तो, हमारी सरकार चल रही है

आप सभी को राम नवमी की हार्दिक शुभकामनाएं

अबकी सजा कुछ और है ..

इश्कमेंमिलतीजोसजा, वोसजाकुछऔरहै
बिछड़नेकेबादहोतामिलन, तबकामजाकुछऔरहै
चांदनीरातमेंबैठकर, देखेथेकुछख्वाब
मेरेख्यालकुछऔरथे, औरउनकीरजाकुछऔरहै
तबहोतेथेउनकेहालातकुछबदलेसे
मिलनेकेबादअबकीफिजाकुछऔरहै
बैटनमेंकशिशहोती , औरमुलाकातोंमेंखुशबू
परअबमिलनेकेबाद , उनकालहजाकुछऔरहै
इशारोंहीइशारोंमेंहोतीथीतबबातें
मिलतीथीतबसजाएं , परअबकीसजाकुछऔरहै

एक था गुल , और एक थी बुलबुल........

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मित्रो,
नमस्कार ,
आपने एक पुरानी हिंदी फिल्म (जबजबफूलखिले ) का यह गीत जरुर सुना होगा "एकथागुलऔरएकथीबुलबुल , दोनोंचमनमेंरहतेथे" फिल्म में अभिनेता शशि कपूर बड़ी मस्ती में ये गीत गाते है । इसी तरह राजेश खन्ना एक फिल्म में गाते हुए नज़र आते - नाचमेरीबुलबुलतुझेपैसामिलेगा ' इस तरह न जाने कितनी फिल्मो में और कितने गीतों में बुलबुल चिड़िया का बखान हुआ है. क्या आप जानते है ? बुलबुल नामक यह प्यारी सुरीली चिड़िया भारतीय साहित्य और संस्कृति में बहुत लोकप्रिय है । बुलबुल चिड़िया न केवल अपनी सुरीली आवाज़ के लिए लोकप्रिय है , बल्कि यह लड़ाकू स्वाभाव के लिए भी जानी जाती है । पुराने समय में लोग इसे लड़ाई के लिए पालते थे । केवल नर बुलबुल ही गता है , जबकि मादा नही गा पाती है ।
भूरे मटमैले रंग का ये पक्षी अपनी लम्भी पूंछ और उठी हुई चोटी के कारन आसानी से पहचान में आ जाता है । पूरी दुनिया में इसकी ९७०० प्रजातीय पाई जाती है , जिनमे बहुत सी भारत में पाई जाती है । भारत में गुलदुमबुलबुल, सिपाहीबुलबुल , मछरियाबुलबुल , पीलीबुलबुलऔरकांगड़ाबुलबुल आदि प्रजातियाँ पाई जाती है ।
क्रांति करी अमर शहीद रामप्रसाद &…

कुदरत का अद्भुत इंजीनियर : बया

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मित्रो नमस्कार ,
पक्षी श्रृंखला की लोकप्रियता को देखते हुए गौरैया , कौवा ,दूधराज, गिद्ध , नीलकंठ , पपीहा के बाद आज मैं एक बहुत ही कुशल इंजीनियर पक्षी से आपको रु-ब-रु करने वाला हूँ । आपने कई बार पेड़ो से लटके हुए गोल-मटोल घोंसले देखे होंगे ? इन घोंसलों को देख कर कभी कोई जिज्ञासा हुई होगी , कि किसने बनाये ये सुन्दर घोंसले ? किस की है कमाल की कारीगरी ?ये घोंसले अक्सर कंटीले वृक्षों पर या खजूर प्रजाति के वृक्षों पर ऐसी जगह पर होते है , जहाँ आसानी से अन्य जीव नही पहुँच पाते है । वैसे ये कमाल की कारीगरी भारत की दूसरी सबसे छोटी चिड़िया बया (विविंग बर्ड )की है। इन घोंसलों का निर्माण ये नन्ही (मात्र १५ से० मी० ) सी चिड़िया तिनको और घास से करती है । इन घोंसलों की सबसे बड़ी विशेषता ये है , कि कितनी भी बारिश हो इन घोंसलों में एक बूँद पानी भी नही जाता । इनकी इंजीनियरिंग का लोहा वैज्ञानिक भी मानते है , क्योंकि जीव वैज्ञानिको और इंजीनियरों द्वारा बहुत प्रयास करने के बाद भी इस तरह के घोंसले तैयार नही हो पाए । वैज्ञानिको के पास तो तमाम तरह के उपकरण होते है , मगर यह नन्ही सी चिड़िया सिर्फ अपनी छोटी सी च…

पपीहा; पिया को तलाशता हुआ एक पक्षी

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बोले रे पपिहरा ............
पिया बोले पीहू बोले ...........
हिंदी फिल्मो के ये गीत कभी आपने सुने होंगे , मगर इस पपिहरा या पीहू को देखा सुना कभी ?
अगर हाँ तो अच्छी बात है , अगर नही तो कोई बात नही आज मैं आपकी मुलाकात इस मधुर आवाज वाले पक्षी से करवाता हूँ । हिंदी फिल्मो में ही नही हिंदी साहित्य में भी ये पक्षी बहुत लोकप्रिय है । इस कर्णप्रिय आवाज वाले पक्षी को अंग्रेजी में 'ब्रेन फीवर बर्ड ' कहा जाता है । इसकी आवाज के आधार पर अलग अलग भाषा के लोगो द्वारा इसे अलग परिभाषित किया गया है । हिंदी भाषा के लोग मानते है , कि पपीहा अपने प्रियतम को ढूढने के लिए " पिया कहाँ " पुकारता है । जबकि बंगाली लोगो का मानना है, कि ये "चोख गेलो' ( मेरी आँख चली गयी ) कहता है। वहीँ मराठी लोगो का मानना है , कि ये "पयोस आला' ( वरिश आने वाली है ) चिल्लाता है । लेकिन अगर ध्यान से सुना जाये तो हिंदी का "पिया कहाँ " या "पी कहाँ " या "पपीहा " ही इसकी बोली "पी-पियह " के ज्यादा नजदीक है । पिया को पुकारने के कारण ही हिंदी साहित्य के कवियों ने प्रि…

सोन चिड़िया : जो न बन पाई राष्ट्रिय पक्षी

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मित्रो नमस्कार,
आज मैं फिर से उपस्थित हूँ , अपनी पक्षी श्रृंखला में गौरैया, गिद्ध, कौआ, दूधराज, नीलकंठ के बाद आपको एक भारतीय मनमोहक चिड़िया सोन चिड़िया से रु-ब-रु करने के लिए । सोन चिड़िया को जिन्होंने नही देखा वे उसके नाम के कारन ये सोचते है , कि ये कोई छोटी सी चिड़िया होगी । मगर आपको बता दूं कि सोन चिड़िया भारत ही नही दुनिया कि सबसे बड़ी उड़ने वाली चिड़िया है । यह आकर में काफी बड़ी होती है , ये आप चित्र देख कर समझ गये होंगे । सोन चिड़िया आज विलुप्त होने के कगार पर खड़ी है। यह पहले भारत में बहुतायत से पाई जाती थी । मुग़ल बादशाह बाबर ने अपनी आत्म्काथ 'तुजुक-ऐ-बाबरी' में सोंचिदिया कि ख़ूबसूरती के बारे में लिखा है । यह प्राचीन काल में सैनिको के जोर आजमाइश के लिए प्रयुक्त कि जाती थी । यह बहुत तेजी से भागती है , इसे भागते हुए देख कर आपको शुतुरमुर्ग का भ्रम हो सकता है । मगर शुतुरमुर्ग के विपरीत यह उड़ भी सकती है । इस कि ख़ूबसूरती के कारण ही इसका बड़ी तेजी से शिकार हुआ और यह आज लुप्त होने के कगार पर है ।इसकी संख्या मात्र २५० ही बची है । इसका शिकार इसके स्वादिष्ट मांस और खेलो के लिए किया गया।…

नीलकंठ : एक और सुन्दर भारतीय पक्षी

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नमस्कार मित्रो ,
मैंने अपनी पक्षी श्रृंखला के अंतर्गत अभी तक आप लोगो को गौरैया, कौआ, गिद्ध और दूधराज आदि भारतीय पक्षियों के बारे में जानकारी दी । (जो लोग देर से आये वो मेरी पुरानी पोस्टो पर नज़र डाल सकते है) इस पोस्ट में मैं एक और सुन्दर भारतीय पक्षी नीलकंठ के बारे में बताने जा रहा हूँ । हालाँकि यह पक्षी हमारी संस्कृति में इतना रचा-बसा है , कि चार राज्यों ने इसे अपना राज्य पक्षी घोषित किया है ।( बिहार, कर्नाटक , आन्ध्रप्रदेशऔरओड़िसा)। इसी से आप इस सुन्दर पक्षी के महत्त्व को जान सकते है ।
भारतीय संस्कृति में इस पक्षी का बहुत महत्व है । विजयदशमी यानि दशहरा के दिन नीलकंठ के दर्शन करना बड़ा शुभ माना जाता है । कहा जाता है कि अगर दशहरा के दिन नीलकंठ दिखे तो उससे यह कहना चाहिए -
नीलकंठतुमनीलेरहियो , दूधभातकेभोजनकरियो
हमारबातरामसेकहियो, जगतहियेतोजोरसेकहियो
सोअतहियेतोधीरेसेकहियो, नीलकंठतुमनीलेरहियो
नीलकंठ का नाम उसके शारीरिक रंग के नीले होने के कारण पड़ा । इसका नाम हिन्दू देवता शिव के नाम नीलकंठ का पर्याय है । भगवान् शिव को अपने कंठ में विष धारण करने से नीले हुए कंठ के कारण…

स्वर्ग का पक्षी : दूधराज (मध्य प्रदेश का राज्य पक्षी )

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मित्रो,
नमस्कार आज पक्षी श्रृंखला में गौरैया, गिद्ध और कौए के बाद आपको एक बहुत ही खूबसूरत पक्षी के बारे में बताने जा रहा हूँ . इस पक्षी को मध्य प्रदेश में राज्य पक्षी का दर्जा प्राप्त है । इस पक्षी के अनेक नाम है , जैसे - दूधराज, दुग्धराज, पेरदाइज फ्लाई कैचर आदि । यह पक्षी देखने में बहुत ही खूबसूरत लगता है । भारत में यह सामान्यतः दो रंगों में देखने में मिलता है । पहला दूधिया सफ़ेद रंग का , इसके दूधिया रंग के कारण ही शायद इसे दूधराज या दुग्धराज कहा जाता है। और दूसरा हल्का नारंगी रंग का । सामान्यतः इसे स्थानीय लोग 'करेंजुआ' के नाम से जानते है । इसकी सबसे बड़ी पहचान इसकी लम्बी पूंछ है, (नर की लम्बी पूंछ होती है , जबकि मादा की पूंछ छोटी होती है ) जो दूर से ही स्पष्ट दिखाई देती है । यह दो भागो में अलग अलग होती है . इसके सर पर काले रंग की प्यारी सी कलगी होती है । और इसकी आँखों सहित सर का रंग काला होता है । जैसा कि इसके अंग्रेजी नाम से स्पष्ट होता है , कि इसका मुख्य भोजन कीट-पतंगे है । यह हवा में ही इनको पकड़ता है . यह मूलतः एशिया महाद्वीप का निवासी है ।यह भारत के अलावा पाकिस्तान,…

कौए : अब दुर्लभ होने लगे है !

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बचपन में जब घर की छत या मुंडेर पर किसी कौए को काँव-काँव करते देखता देखता तो बड़ा खुश होता । पडौसी भी कहने लगते कि कोई मेहमान आने वाला है । मगर अब बड़ी मुश्किल से शहरो में कौए ढूँढने से भी नही मिलते है । भले ही ये कर्कश ध्वनि वाला पक्षी लोगो को पसंद न आता हो मगर भारतीय संस्कृति में इसका बड़ा ही महत्त्व है । पितर पक्ष में लोग कौओ को धोंध कर भोजन करते है । मन जाता है , कि हमरे पूर्वज इन दिनों कौए का रूप लेकर हमारे पास आते है । धार्मिक साहित्य जैसे रामायण और महाभारत आदि में भी कौओं का वर्णन है । कागभुशुंड जी नामक एक कौआ भगवन राम का प्रिय भक्त होता है । भगवान राम ने इन्द्र के पुत्र को सीता पर कुद्रष्टि डालने पर काना बना दिया था । भगवान कृष्ण ने भी कौए के रूप में आये कागासुर का वध किया था।
बचपन में हम सब ने चालक कौए कि कहानी पढ़ी है , जिसमे एक प्यासा कौआ घड़े में कम पानी होने पर उसमे कंकड़ दाल कर जल स्तर ऊपर लता है । फिर अपनी प्यास बुझाता है । कौए कि एक कहानी चालक लोमड़ी के साथ है , जिसमे लोमड़ी कौए से गाना सुनाने कि कह कर उसकी रोटी छीन लेती है । इस तरह और भी क…

न जाने कहाँ चले गये ये प्रकृति के सफाई कर्मी

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मित्रो ,
बचपन में जब भी कोई जानवर मरता था , तो उसके चारो तरफ न जाने कहाँ से बहुत सारे गिद्ध मंडराने लगते थे । कई बार तो जंगल में या सुनसान क्षेत्र में किसी जानवर के मरने का पता गिद्धों के मंडराने से ही चलता था । देखने में बड़े डरावने से लगने वाले ये नुकीली चोंच वाले दैत्याकार पक्षी बचपन कौतुहल का विषय होते थे। ये मरे हुए जानवर के शरीर से मांस नोच नोच कर खाते थे । अक्सर मांस खाते समय देशी कुत्तों से इनकी झडपे हो जाती थी । इनका मांस नोचना बड़ा ही घ्रणित लगता था। मगर जब बड़ा हुआ तो पता चला कि ये मरे हुए जानवरों का मांस खाकर प्रकृति कि सेवा करते है । मतलब जैसे ही कोई जानवर मरता है , तो ये झुण्ड के झुण्ड में पहुच कर उसे तुरंत खाकर उसे साफ़ कर देते है । इस तरह तुरंत ही उस मरे हुए जानवर का मांस सड़ने से बच जाता है , और प्रकृति की सफाई हो जाती है। सोचिये अगर ये न होते तो जंगल तो रोज कहीं न कहीं कोई जानवर मरता था , और पूरा जंगल सड़ांध से भर जाता । ( मैं आज की नही तब की बात कर रहा हूँ जब जंगल बहुत थे ) । तो डरावने से लगने वाले ये भीमकाय पक्षी प्रकृति के सफाई कर्मी है।

मगर आज कल ये जीव संकट में है …

पहले मेरे घर खूब आती , गौरैया

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पहले मेरे घर खूब आती , गौरैया
पर अब जाने क्यों शर्माती, गौरैया
जब नानी आँगन में बिखेरती चावल के दाने
तब फुदककर आ जाती गौरैया उसे खाने
घर की मुंडेर के पास थी जगह खाली
उसमे गौरैया ने अपने नीड़ की जगह बनाली
फ़िर दिन भर अंडे रखाते चिरवा-चिरैया
पर अब जाने क्यो शर्माती गौरैया
छत की मुंडेर हुई पक्की , नही रही नानी
किसे फुर्सत ? जो दे गौरैया को दाना पानी
बैशाख में अब कहाँ टंगता , पानी का कटोरा
आख़िर पेड़ भी तो कट गए , जहाँ हो बसेरा
अपने घौंसलो की खातिर, छिनी हमने छैंया
पहले मेरे घर ,खूब आती गौ....रैया !!





दोस्तों , पहले हमारे हर घर घर में आसानी से फुदकती छोटो सी चिड़िया गौरैया अब मुश्किल से दिखती है । गौरैया का गायब होना एक साथ बहुत से प्रश्न खड़े करता है । जैसे - क्यो गौरैया ख़त्म हो रही है ? आज हम मनुष्यो पर निर्भर इस चिडिया के आवास क्यो ख़त्म हो गए है ? गौरैया अगर ख़त्म हो गई तो समझो हम बहुत बड़े धर्म संकट में पड़ जायेंगे ! क्योंकि हमारे धर्म ग्रंथो के अनुसार पीपल और बरगद जैसे पेड़ देवता तुल्य है। हमारे पर्यावरण में भी इनकी महत्वपूर्ण भूमिका है । पीपल और बरगद ऐसे वृक्ष है जो कभी सीधे अप…

बहने दो झरने प्यार के ..

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बहनेदोझरनेप्यारके
उड़ादोपंछीइंतज़ारके
घटाएंछानेदोख़ुशीकी
चलनेदोबयारहंसीकी
खिलनेदोकलियाँमुस्कुराहटोकी
उड़नेदोतितलियाँजगमगाहटोकी
झीलबनादोसम्पन्नताकी
नदियाँबहादोप्रसन्नताकी
गमोकीधुपमेंबनाओ, अपनेपनकीछाया
बनाओसंसारऐसा, जिसमेहर्षहीहर्षसमाया
भूलजाओगीतअत्याचारके
बहनेदोझरनेप्यारके

रेल का मजेदार सफ़र

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आजकल रेल की बड़ी चर्चा है । लेकिन मैं यहाँ उस कारन से चर्चा नही करना चाहूँगा । मैं आम आदमी की उस रेल की चर्चा करना चाहूँगा , जिससे हमरा वास्ता पड़ता है। भारतीय रेल दुनिया में सबसे अधिक यात्री ढोती है । हर दिन इतने यात्री धोती है , जितने कि दुनिया के कई देशो कि आबादी भी नही है । भारत में लगभग सभी का वास्ता जीवन में कभी न कभी रेलयात्रा से जरुर पड़ा है । रेल यात्रा ........ये शब्द वैसे तो आम आदमी को थोडा सा डरावना लगता है (अगर रिजर्वेशन नही मिला है )। मगर बहुत सी रेलयात्राएँ बड़ी यादगार बन जाती है । कई बार रेल में मिले लोगो से बड़े आत्मीय सम्बन्ध बन जाते है ।
अगर मैं अपना और रेल का सम्बन्ध जोडू तो बहुत पुराना नाता है। मेरे पिताजी श्री सुरेश पाण्डेय जी इसी रेल महकमे में मुलाजिम (सिग्नल विभाग, सोनपुर, बिहार ) है । मेरे नाना जी मध्य प्रदेश में पुलिस विभाग में थे । इस कारन बहुत छुटपन से ही रेलयात्रा का सुख (सुख इसलिए क्योंकि पिताजी जो रेलवे में है )मिला । अक्सर रेलवे पास पर मुफ्त की रेलयात्रा की । बहुत बार कई यादगार वाकये हुए जो आज भी यदा कदा याद आ जाते है ।
रेलवे से जुडी मेरी एक मजेदार कवि…
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जिन्दगीमेंकिसीकाहोजाना , तुमसेसीखा
किसीकीआँखोंमेंयूँखोजाना , तुमसेसीखा
मोहब्बत, बसनामसुनाथाइससेपहले
मोहब्बतमेंफ़नाहोजाना , तुमसेसीखा
पहलेखोयारहताथा, मैंकिताबोमें
परकिसीकेख्वाबोमेंआना , तुमसेसीखा
सुनाथा, मोहब्बतमेंकोईबंदिशनहीहोतीहै
हरबंदिशसेजुदाहोजाना , तुमसेसीखा
महकताथाअभीतकबनकेमैं 'चन्दन'
खुशबूकेसंगधुआं होजाना

एक शब्द (कविता )

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एकशब्द , जोकहनेमेंबहुतछोटाहै
परदायराइतनाबड़ा, किउसकेलिएहरशख्सरोताहै
बचपनमेंपहलीबार , मुहसेयहीशब्दतोनिकला
जीवनमेंयहीपहलीदुनिया, यहीथाआकारपहला
हरदुःखमें, हरदर्दमें, बसमाँहीतोयादआई
जन्मतेहीस्पर्शमाँकापाने , आईपहलीरुलाई
सचमुचमाँहीतो , बनीजीवनकिपहलीपाठशाला
माँनेहीसिखायाजीना, खिलायाज्ञानकापहलानिवाला
जीवनकेहरप्रथमकिशुरुआतबनीमाँ
हरमोड़पेआनेवालेदिनका, सुप्रभातबनीमाँ
बसएकशब्द , सारेजीवनसे

होली के रंग ( कविता )

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सारीदुश्मनीभूलकर, आओलगायेहोलीकेरंग
कलतकथीजोदूरियां , उन्हेंमिटाहोजायेसंग
गरग़लतफ़हमीहोजाये , हमदोनोंकेबीच
तोक्याजरासीबातपे , हमलड़ेंगेकोईजंग
मुश्किलोंसेभरासफ़र , कहाँतकचलोगेतनहा
आओमिलरंगेवेकागज , जोअबतकथेबेरंग
राज़जोथे दिलकेअबतक , उन्हेंकरेंबेपर्दा
सारेगिलेशिकवेभूलकर, सीखेअबजीनेकाढंग
बुलंदियोंकोछूलेंगे , गरसाथदोतुम
अबडोरतुम्हारेहाथमें , कहींकटनजायेपतंग
आईहोलीहै, लेकेकितनाअबीरऔररंग
कहोकौनसा