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June, 2012 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

गंगा भले ही श्रेष्ठ हो मगर ज्येष्ठ है मैकलसुता !

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नमस्कार मित्रो ,
 आज हम चर्चा करेंगे मध्य प्रदेश की जीवनरेखा कही जाने वाली एक अति महत्पूर्ण नदी "नर्मदा " की , जिसे पुराणों में रेवा के नाम से जाना गया है . भारत में बहने वाली लगभग सभी नदिया विवाहित मानी जाती है , जबकि सौमोदेवी - नर्मदा ही एक मात्र नदी है , जो अविवाहित है !   गंगा की उत्पत्ति की कथा तो आप सभी जानते होंगे , कि विष्णुपदी गंगा स्वर्ग से भागीरथ के प्रयास से पृथ्वी पर अवतरित  हुई . जबकि नर्मदा इसके पूर्व से ही भूलोक में विराजमान थी . अगर हम धार्मिक-पौराणिक संदर्भो से भी हटकर भूगर्भिक/ भौगोलिक प्रमाणों का सहारा ले तो हिमालय से निकलने वाली गंगा से नर्मदा प्राचीन प्रमाणित होती है
. जैसा  कि हमने भूगोल की किताबो में पढ़ा है , कि हिमालय एक नवीन वलित पर्वत है, जो प्लेट- विवर्तनिक प्रक्रिया के फलस्वरूप उत्पन्न हुआ है . अर्थात इसकी उत्पत्ति बहुत बाद में हुई है . इसके पूर्व यहाँ पर टेथिस सागर था , तो जाहिर है कि उससे निकलने वाली गंगा भी हिमालय के बाद ही उत्पन्न हुई होगी . जबकि भूगर्भिक साक्ष्य बताते है , कि अरावली , विंध्यांचल , सतपुड़ा और मैकल जैसी श्रेणिया अ…

गरुड़ : एक दैवीय पक्षी को जानिए

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मित्रो नमस्कार ,
मैंने अपनी पक्षी श्रृंखला के अंतर्गत भारत में पाए जाने वाले कुछ जाने -पहचाने तो कुछ अनजाने से प्यारे- प्यारे पक्षियों के बारे में बताया था . मेरी ये श्रृंखला काफी लोकप्रिय भी हुई थी . जो लोग इसे पहले नही पढ़ पाए है , वे मेरे ब्लॉग पर 'पक्षी' या' पर्यावरण 'लेबल पर क्लिक करके पढ़ सकते है . आज फिर से मैं उसी श्रृंखला के आगे बढ़ाते हुए गरुड़ पक्षी पर कुछ जानकारी बटोर के लाया हूँ .उम्मीद है पसंद आएगी
गरुड़ को हम अक्सर भगवान विष्णु के वाहन के तौर पर  एक पौराणिक चरित्र के रूप में जानते है .एक पूरा पुराण ही गरुड़ को समर्पित है "गरुड़ पुराण " . कहा जाता है , कि गरुड़ पक्षीराज (पक्षियों का राजा ) है , और वो साँपों को खाता है . भगवान राम और लक्ष्मण को जब मेघनाथ ने नागपाश में बांध दिया था , तब हनुमान जी गरुड़ को लेकर आये थे , तब कहीं जाकर भगवान को मुक्ति मिली थी .महाभारत के अनुसार भगवान कृष्ण अपनी पत्नी सत्यभामा के साथ गरुड़ पर बैठ कर नरकासुर को मारने गये  थे .एक अन्य कथानुसार गज और ग्राह की लड़ाई में ग्राह (मगर ) को मारने भगवान विष्णु गरुड़ पर ही बैठ कर गये थे . …

अपने को बौना पाता हूँ

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इन लम्बे -लम्बे दरख्तों के बीच अपने को  बौना पाता हूँ  इन जिंदगियों  की खरीद-फरोख्त के बीच , अपने को खिलौना पाता हूँ कुछ हसीं चेहरों में न जाने क्यों खौफ  नज़र आता  है  फैशन के नाम पर बदन  पर बस चिथड़ा नज़र आता है  दर्दनाक चीखो में अपनी मुस्कान भी छीन गयी  मौत के सौदागरों के बीच जिन्दगी  कहाँ गुम गयी पत्थर की इन दीवारों में, अपने लिए छोटा कोना पाता हूँ   इन जिंदगियों  की खरीद-फरोख्त के बीच , अपने को खिलौना पाता हूँ  हर तरफ छाई भीड़ पर तन्हाई ही दिखती  है पैसे हो गर जेब में , तो यहाँ हर चीज बिकती   है खो गये है हर रिश्ते-नाते , खो गया है अपनापन बस गयी है मतलब की दुनिया , मतलबी है हर मन यहीं रईसों के ठहाके , तो यहीं गरीबो की आँखों में रोना पाता हूँ  इन जिंदगियों  की खरीद-फरोख्त के बीच , अपने को खिलौना पाता हूँ 
कुम्भकार सा कच्चे घड़े को , बाहर से चोट  , भीतर सहारा  ऊपर से डांट-डपटते, पर दिल में था प्यार कितना सारा  तब डांट बुरी लगती थी, पर मतलब आज समझ आया  हर डांट के पीछे एक संदेसा, एक भरोसा था समाया  सचमुच पिता हमेशा बाहर से कठोर, रहे भीतर से कोमल  अगर हो जाते बाहर से  भी कोमल , तो कैसे बनाते हमें निर्मल  बचपन में उनकी डांट -डपट , लगती थी जो बकबक आज समझ में आया , कि उनमे था कितना सबक

एक अकेला पेड़ !

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सोया  पेड़ के नीचे एक थका राही तभी कहीं से एक दर्द भरी आवाज़ कराही नींद खुली राही की , देखा चारो तरफ सुनसान एक अकेला पेड़ था, बाकि इलाका था वीरान क्या देख रहे हो तुम , अचरज होके आसपास मैं अकेला पेड़ बचा, बाकी का इंसानों ने किया नाश थी यहाँ भी हरियाली  , थे अनेक पशु और पक्षी सबका नाश किया मानव ने, बनके पर्यावरण भक्षी असहाय बनके खड़ा रहा , देखता रहा सहोदरों का नाशमेरी बांहों को भी काट दिया, है अंतिम क्षण की आस क्या शत्रुता थी इन मनवो से, सदा  ही उनका कल्याण किया मीठे-मीठे फल  दिए उनको, और ऑक्सीजन  सा प्राण दिया पर वो हमारा मोल समझ न सका अब तक यूँ ही अपने पैरो पर कुल्हाड़ी मारेगा  कब तक

ताज महल नहीं तेजोमहल, मकबरा नहीं शिवमन्दिर ।।

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ताज महल नहीं तेजोमहल, मकबरा नहीं शिवमन्दिर ।।

बी.बी.सी. कहता है...........
ताजमहल...........
एक छुपा हुआ सत्य..........
कभी मत कहो कि.........
यह एक मकबरा है..........

प्रो.पी. एन. ओक. को छोड़ कर किसी ने कभी भी इस कथन को चुनौती नही दी कि........

"ताजमहल शाहजहाँ ने बनवाया था"

प्रो.ओक. अपनी पुस्तक"TAJ MAHAL - THE TRUE STORY" द्वारा इस

बात में विश्वास रखते हैं कि,--

सारा विश्व इस धोखे में है कि खूबसूरत इमारत ताजमहल को मुग़ल बादशाह
शाहजहाँ ने बनवाया था.....

ओक कहते हैं कि......

ताजमहल प्रारम्भ से ही बेगम मुमताज का मकबरा न होकर,एक हिंदू प्राचीन शिव
मन्दिर है जिसे तब तेजो महालय कहा जाता था.

अपने अनुसंधान के दौरान ओक ने खोजा कि इस शिव मन्दिर को शाहजहाँ ने जयपुर
के महाराज जयसिंह से अवैध तरीके से छीन लिया था और इस पर अपना कब्ज़ा कर
लिया था,,

=> शाहजहाँ के दरबारी लेखक "मुल्ला अब्दुल हमीद लाहौरी "ने अपने
"बादशाहनामा" में मुग़ल शासक बादशाह का सम्पूर्ण वृतांत 1000 से ज़्यादा
पृष्ठों मे लिखा है,,जिसके खंड एक के पृष्ठ 402 और 403 पर इस बात का
उल्ल…

प्रशासन की मजबूरियां और विकास की बढती दूरियां !