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सरदार को एक रुपया भीख दे देना..!

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कुछ दोस्त मिलकर डेल्ही घूमने का प्रोग्राम बनाते है और रेलवे
स्टेशन से बहार निकलकर एक टेक्सी किराए पर लेते है , उस
टेक्सी का ड्राइवर बुढ्ढा सरदार था,

यात्रा के दौरान बच्चो को मस्ती सुजती है और
सब दोस्त मिलकर बारी बारी सरदार पर बने
जोक्स को एकदुसरे को सुनाते है

उनका मकसद उस ड्राइवर को चिढाना था . लेकिनवो बुढ्ढा सरदार चिढाना तो दूर पर उनके साथ
हर जोक पर हस रहा था ,
सब साईट सीन को देख बच्चे वापस रेलवे स्टेशन आ जाते है ...और तय
किया किराया उस सरदार को चुकाते है , सरदार
भी वो पैसे ले लेता है , पर हर बच्चे को अपनी और से एक एक
रूपया हाथ में देता है

एक लड़का बोलता है "पाजी हम सुबह से आपकी कोम
पर जोक मार रहे है , आप गुस्स्सा तो दूर पर हर जोक में
हमारे साथ हस रहे थे , और जब ये यात्रा पूरी हो गई आप हर लडके
को प्यार से एक-एक रूपया दे रहे है , ऐसा क्यों ? "

सरदार बोला " बच्चो आप अभी जवान
हो आपका नया खून है आप मस्ती नहीं करोगे तो कौन
करेगा ? लेकिन मेने आपको एक- एक रूपया इस लिए दिया के जब
वापस आप अपने अपने शहर जाओगे तो ये रूपया आप उस सरदार
को दे देना जो रास्ते में भीख मांग रहा हो , इस …

बाकी रह गये कुछ निशाँ....

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जिन्दगी में कुछ छूट जाता है , जाने कहाँ होता है सब कुछ साथ, है पर दिल तनहा अतीत  की होती है , कुछ रंगीली यादें कुछ खाली पन्ने , तो कुछ अधूरे फ़लसफ़ामन करता है, कि फिर लौट चले पीछे  पर बाकी है, अभी देखना आगे का जहाँ हम तनहा ही चले थे , इस सफ़र में फिर तनहा , छूटे जाने कितने कारवां ख़ुशी सी होती नही , पर गम भी नहीनिकले कितने अश्क, लगे कितने कहकहा  लहरें यूँ ही आती रही , साहिल पे खड़े हम आखिर समंदर में , डूब ही गया ये आसमाँटूट गये वो बनाये हुए रेत के महल पर अभी भी बाकी रह गये कुछ निशाँ

ब्राह्मणों की कहानी ........

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नमस्कार ,
मित्रो आज हम इतिहास से कुछ खोज कर बड़ी ही मजेदार चीज लाये है !
अरे भाई ! इतना जल्दी क्या है ?
जब खोज कर लाये है , तो आप को भी बताएँगे ही , यहाँ तो आप ही के लिए आते है न !
आज हम ब्राह्मणों के बारे में कुछ ज्ञान खोज के लाये है ! हां लेकिन ये सब आपकी जानकारी के लिए है , इसमें कोई जातिवाद नही है.
तो भैया तो सबसे पहले ब्राह्मण शब्द का प्रयोग अथर्वेद के उच्चारण कर्ता ऋषियों के लिए किया गया था . फिर प्रत्येक वेद को समझनेके लिए ग्रन्थ लिखे गये उन्हें भी  ब्रह्मण साहित्य कहा गया है . 
अब देखा जाये तो भारत में सबसे ज्यादा विभाजन या वर्गीकरण ब्राह्मणों में ही है . जैसे :- सरयू पारीण, कान्यकुब्ज , जिझौतिया , मैथिल , मराठी , बंगाली ,भार्गव ,कश्मीरी , सनाढ्य , गौड़ , महा-बामन और भी बहुत कुछ . इसी प्रकार ब्राह्मणों में सबसे ज्यादा उपनाम (सरनेम या टाईटल )  भी प्रचलित है , तो इन्ही  में कुछ लोकप्रिय उपनामों और उनकी उत्पत्ति के बारे में जानते है . 
एक वेद को पढने  वाले ब्रह्मण को पाठक कहा गया 
दो वेद पढने वाले को द्विवेदी कहा गया , जो कालांतर में दुबे हो गया 
तीन वेद को पढने वाले को त्रिवेदी/ त्…

हिंदी की रोचक लोकोक्तिया / कहावतें !

हमअक्सरअपनेबड़े- बुजुर्गोसेलोकोक्तिया / कहावतेंसुनतेआयेहै , इनकहावतोमेंजहाँरोचकता, मधुरताहोतीहै , वहीइनकेसाथकोईकहानीऔरसन्देशभीछुपारहताहै .आजकलतोइनकाप्रयोगबहुतकमसुननेमेंमिलताहै . अक्सरलोगकहावतोंऔरलोकोक्तियोंकोएकहीसमझतेहै . मगरइनमेभीकुछअंतरहै . जहाँकहावतेंकिसीकेभीद्वाराकहीगयीहोतीहै , वहीअधिकांशलोकोक्तियाँविद्वानोंकेद्वाराकहीगयीहोतीहै . कहावतोंऔरलोकोक्तियोंमेंथोड़ेशब्दोंमेंबहुतकुछकहदियाजाताहै . औरभाषामेंप्रांजलता , प्रवाहमयता , सजीवताकेसाथहीकलात्मकताकाप्रवेशहोजाताहै .कहावतोंऔरलोकोक्तियोंकाआधारघटनाये, परिस्थितियांऔरदृष्टान्तहोतेहै .
आजमैंभीहिंदीऔरउसकीबोलियोंसेकुछरोचककहावतेंसहेज<

कहाँ गया सावन ?

मित्रो ,
सावन ने दस्तक ने दस्तक दे दी है , मगर मन  है  कि मानने को तैयार ही नही है ! अरे सावन ऐसे आता है ? इस बार के सावन को देख कर लग रहा है, इन्द्र के यहाँ भी यूपीए कि सरकार बन गयी है. लगता है सावन भी घोटाले का शिकार हो गया है . अब प्रणब दा सरकार में रहे नही वरना  आंकड़े पेश करते और बताते आया सावन झूम के ! सचमुच किसानो की आँखों से आंसू टपकने  लगे .......फसलें सूखने की कगार पर आ  गयी है , तो दूसरी और असम में  ब्रम्हपुत्र  की बाढ़ से हजारो लोग त्राहि-त्राहि कर रहे  है 
कभी बाढ़ तो कभी सूखा
भारत  भूखा का भूखा  !
सावन का नाम सुनते ही बचपन की याद आने लगती है , बचपन में सिर्फ सावन के महीने  में ही खिलौने बिकते थे (तब चाईनीज खिलौने नही आते थे ). पूरी साल सावन का इन्तजार रहता था . खिलौनों की वैरायटी भी सीमित होती  थी .