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जानिए देहभाषा (बॉडी लेङ्गुएज ) से दूसरो की अनकही बातें ..!

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मित्रो ,
क्षमा सहित  नमस्कार ,
                    आजकल  मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग की परीक्षा की तैयारी में व्यस्त होने के कारण ब्लॉग जगत को समय नही दे पा रहा हूँ . परीक्षा के नए पैटर्न में प्रारंभिक परीक्षा के द्वितीय प्रश्न पत्र में  मैंने संचार कौशल टॉपिक के अंतर्गत देहभाषा (बॉडी लेङ्गुएज ) के बारे में कई रोचक बातें पढ़ी . जो कि हमारे दैनिक जीवन में भी बहुत उपयोगी है . तो मैंने सोचा क्यों न इसे आप सभी से बांटा जाये . हैं न ?
              शाब्दिक भाषा के विकास के पूर्व मानव अपने विचारों एवं भावनाओं का विनिमय संकेतों अथवा देहभाषा के माध्यम से ही करता था .यह भाषा अचेतन मन को समझने हेतु अत्यंत उपयोगी होती है . अगर हम देहभाषा को समझना जान ले , तो लोगों की उन बातों को भी जान सकते है , जो वो हमें बताना नही चाहते  है. या फिर हमसे कोई बात छुपा रहे हो .हालाँकि कुछ चतुर और धूर्त लोग देहभाषा के माध्यम से बेबकूफ बना सकते है . मगर सामान्यतः हम देहभाषा से लोगों के मनोभावों को समझ सकते है .
तो चलिए जानते है , कुछ महत्वपूर्ण तथ्य :-
- अँगुलियों को मोड़ना या चटकाना व्यक्ति के अंतर्द्वंद को बताता है …

हाईटेक नही होना चाहता , मेरा गाँव !!

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हाईटेक नही होना चाहता , मेरा गाँव न धन-दौलत , न  सोना चाहता है मेरा गाँव  भरी बरसात में  , जब खेत होते लबालब किसी घर में प्रसव पीड़ा, सुन कांपते सब चारपाई पे रख के दौड़ते ,जब  चार कंधे कीचड़ -पानी सब भूल , भागे जाते बनके अंधे किस्मत हुई तो , सही वक़्त पे मदद देगा दूजा गाँव वरना उन्ही चार कंधो पर , लौटेगा बिलखता बहाव सुनसान रातों में , किसी बुजुर्ग को चलती खांसी धड़कने तेज , बच पायेगा  या लग जाएगी फांसी  आज़ादी के इतने साल बाद , हो गया इंडिया शाईन पर मेरे गाँव में आज भी बसते, ओझा और डाईनबिन सड़क, बिन अस्पताल, कैसे चले विकास की नाव    
मित्रो , मेरा गाँव बिहार के बक्सर जिले के सिमरी प्रखंड (ब्लाक ) के अंतर्गत 'गोप भरवली'  है . कहने को तो मेरा गाँव ब्लाक से १ कि०मि० की दुरी पर है , मगर लगभग १००० की आबादी आजादी के ६५ सालों बाद भी विकास की सारी सुविधाओ से दूर है . आज भी सड़क ( कच्ची या पक्की ) न होने के कारण मेरा गाँव बाकि देश - दुनिया से कटा  है  . सड़क बनवाने के लिए ग्रामवासियों ने बी०डी 0 ओ० से लेकर माननीय मुख्यमंत्री ' सुशासन बाबु ' तक अर्जी लगाई, मगर नतीजा वही ढाक के तीन पात. …