मंगलवार, 18 जून 2013

हर कसौटी पर कम निकले ....

हार गये सारी बाजी, हर कसौटी पर कम निकले 
अब आरज़ू है , कि किसी तरह बस दम निकले 
हर तरह की आजमाईश , हमने की हर तरकीब 
क्या पता था ? हमरी कोशिशें उन पर सितम निकलें 
जीने की आरज़ू नही अब , ख़त्म हो गया जहाँ 
खुश रहे वो , जब कभी हमारा कफ़न निकलें 
हो गये तबाह , पर अब गम क्या करें ,
 मिले खुशियाँ  उन्हें , जब-जब हमारा सनम निकलें
महक बाकि रहेगी ताउम्र, मेरी मोहब्बत की 
चिता की राख को संभल के रखना , क्या पता वो 'चन्दन 'निकले

5 टिप्‍पणियां:

  1. हो गये तबाह , पर अब गम क्या करें ,
    मिले खुशियाँ उन्हें , जब-जब हमारा सनम निकलें ...
    प्रेम हो तो दिल में ऐसी ही तमना रहती है ... बहुत खूब ...

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  2. बहुत उम्दा अभिव्यक्ति,सुंदर रचना,,,

    RECENT POST : तड़प,

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  3. बहुत सुन्दर और भावपूर्ण रचना....

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  4. बहुत सुन्दर रचना है।

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ab apki baari hai, kuchh kahne ki ...

orchha gatha

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