रविवार, 27 अक्तूबर 2013

हम भी चोट खाए है

 
एक मुख्त्शर* इश्क में हम भी चोट खाए है
राह-ए-मोहब्बत में हम भी किसी के आजमायें हुए है
चोट खाकर कई जख्मो को सहे है हम
कहते जिसे बेवफाई , उन घावों को हम भी सहलायें हुए है
सीने में दर्द को सहकर इस कदर बे-दर्द हुए है हम
वक़्त को मरहम बनाकर उन ज़ख्मों को हम भी छुपायें हुयें है 
काँटों की कलियों को , सीने से लगायें है हम
लहू के रंग को फूलों के रंग में हम भी समायें हुए है
हमारी वफाओं के बदले ज़फायें *लिए है हम
ज़िन्दगी के दरख्तों पे अब भी यादों के फूल कुम्हलाएँ हुयें है
जिंदगी के अज़ाब* को ज़ेहन में लिए है हम
अनदेखे ख्वाबो के ताबीर* भी अब रंग लाये हुए है
दियार-ए- गम* में तबस्सुम*लिए है हम
तीरगी* के साये में चिराग -ए-दिल जलाये हुए है 

*मुख्तशर - लघु , अजाब - मुसीबत , जफ़ायें - निष्ठुरतायें, ताबीर - स्वप्नफल , दीये-ए-गम - दुःख का नगर 
तबस्सुम - मुस्कराहट , तीरगी - अँधेरा 
 

7 टिप्‍पणियां:

  1. दियार-ए- गम* में तबस्सुम*लिए है हम
    तीरगी* के साये में चिराग -ए-दिल जलाये हुए है ..
    बहुत खूब ... अंधेरे में दिए को जलाए रखने वाले ही सच्चे इन्सान होते हैं ...

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  2. जिंदगी के अज़ाब* को ज़ेहन में लिए है हम
    अनदेखे ख्वाबो के ताबीर* भी अब रंग लाये हुए है,,,

    बहुत खूब , सुंदर प्रस्तुति ,,,

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  3. सुन्दर प्रस्तुति।
    साझा करने के लिए धन्यवाद।

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  4. आपकी इस प्रस्तुति को आज की बुलेटिन शहीद जतिन नाथ दास और ब्लॉग बुलेटिन में शामिल किया गया है। कृपया एक बार आकर हमारा मान ज़रूर बढ़ाएं,,, सादर .... आभार।।

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  5. Aajmaish meri hui her gadam per
    or chot her pal mujhe pahuchai gayi
    jab tumhe aajmane ka samay aaya to tumne thoker mar di
    Bebafai kya hoti hai
    tum bafa ker nahi sakte or mujhe bebafa keh rahe ho
    Dard tum de rahe ho or be dard bhi mujhe keh rahe ho
    Tumhara jakhm waqt bhar dega mera dard mera waqt ban gaya hai
    Lahu ka rang ab badal gaya lagta hai or Tum bus Tum me samaye lagte ho
    kaise kate ab thodi me tumari raah me hoon
    Yaade , bhool jao mujhe ye tum kerte ho or jhooti yaado me jite ho
    musibat tal gayi ab tumhari raah ki ab hum diwaro se sir lagye bethye hai
    is diwali jala dena mera dil bhi bahut roshni hogi kyoki tumne pyaar k dipak jalaye the!

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  6. sukh gaye meri aankho k samander ban gaye banjer marusthal
    beet gayi jindgi ek aas me bharose ki talash me
    kho beithye apna mol sara tere pyar me
    bhi aaj badnaam bhi hami hui

    उत्तर देंहटाएं

ab apki baari hai, kuchh kahne ki ...

orchha gatha

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