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August, 2013 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

कुछ तसवीरें हमारे पूर्वजों की ....

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अब पहले जैसा सावन नही आता ...!

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भारतीय साहित्य में बसंत के बाद जिस मौसम की चर्चा की गयी है ....वो है श्रावण या सावन मास !  हो भी क्यों न , आखिर प्रकृति भी इस महीने पर बहुत मेहरबान जो होती है . सावन के वर्णन में कवियों ने कोई कसर नही छोड़ी है . याद करे मुकेश का गाया हुआ वो मधुर गीत -  सावन का महीना, पवन करे सोर पवन करे शोर पवन करे सोर पवन करे शोर अरे बाबा शोर नहीं सोर, सोर, सोर पवन करे सोर. हाँ, जियरा रे झूमे ऐसे, जैसे बनमा नाचे मोर हो सावन का महीना … मौजवा करे क्या जाने, हमको इशारा जाना कहाँ है पूछे, नदिया की धारा मरज़ी है ... या फिर .. लगी आज सावन की फिर वो झड़ी है.... या फिर  सावन बरसे...धड़के दिल...क्यों ना घर से निकले दिल...

 सावन का महिना प्यार का महिना कहलाता था .....पर प्यार तो अब बारहमासी हो गया है .  भगवान् शिव का प्रिय महिना भी सावन ही है ....इसी महीने में लोग सावन सोमवार का व्रत रखते है ...इसी महीने में कांवरिये कांवर में जल भर कर भगवन शिव का जलाभिषेक करने मीलो पैदल चल कर जाते है .  सावन के महीने में ही पपीहा स्वाति नक्षत्र का जल पीने पिहू-पिहू  गाता फिरता है ... सावन के महीने में ही किशोरियां कजरी तीज…

पुलिस प्रशिक्षण की प्यारी प्यारी यादें ...

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प्रणाम मित्रो .
सर्वप्रथम आप सभी को स्वतंत्रता  दिवस की पश्चातवर्ती हार्दिक शुभकामनाएं !
पूरे दो महीने आप से दूर रहने के लिए क्षमा प्रार्थी हूँ, दरअसल मैं २ माह के पुलिस प्रशिक्षण के लिए जवाहर लाल पुलिस अकादमी , सागर  ( म० प्र० ) गया था . दो महीने प्रशिक्षण में बड़ा मजा आया ! पूरे मध्य प्रदेश से आये अपने बैच के लोगो के साथ विभाग के  अनुभवी ( पदोन्नत/प्रमोटी ) लोगो का साथ खूब भाया. इन दो महीनो में बहुत कुछ सीखा. और सबसे ख़ुशी की बात तो ये थी , कि प्रशिक्षण मेरे अपने शहर सागर में ही था .
अब आप सभी से भी इसके अनुभव बाँटना जरुरी है न !










इन महीनो में हमने शारीरिक प्रशिक्षण में पी० टी०  परेड तो थ्योरी में भारतीय दंड संहिता , दंड प्रक्रिया संहिता , आबकारी अधिनियम , एन डी पी एस एक्ट ,  आचरण नियम , विभागीय नियम  इत्यादि सीखा .