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आखिर भीमकुण्ड में ऐसा क्या रहस्य है ?

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जटाशंकर से दर्शन करने के बाद मैं और योगेन्द्र फिर अपनी बाइक से वापिस विजावर की ओर  आये।  बिजावर  दूसरी दिशा में भीमकुण्ड के लिए सड़क गयी है। सड़क की हालत देखकर लगता नही कि किसी दर्शनीय स्थल का रास्ता है।  कई जगह सड़क विलुप्त हो गयी।  कई बार  लगा कहीं गलत रास्ता तो नही पकड़ लिया है।  इसलिए कई जगह पूछ पूछ कर आगे बढ़ रहे थे।  रास्ता सुनसान और जंगली था।  खैर जब ओखली में सर डाल ही लिया तो मूसल से क्या डरना ! आखिर भीमकुण्ड में ऐसा क्या रहस्य है ? कि आखिर डिस्कवरी चैनल वाले भी चले आये लेकिन ये रहस्य उनसे भी नही उजागर हो पाया !
भीमकुण्ड की जानकारी पुराणों में भी मिलती है।  ऐसी जनश्रुति है, कि अपने अज्ञातवास के समय जब पाण्डव जेजाकभुक्ति ( वर्तमान बुन्देलखण्ड ) के जंगलों में छिपते-छिपाते घूम रहे थे , तो उसी समय द्रोपदी को बड़ी जोर से प्यास लगी।  लेकिन आसपास कही भी पानी का कोई स्रोत न मिला।  तब महाबली भीम ने एक पहाड़ पर अपनी गदा से जोर से प्रहार किया तो धरती फट गयी और सीधे पाताल से पानी की धार लग गयी।  जो आज भीमकुण्ड के रूप में विद्यमान है।  इस कुण्ड…