कैसी रही लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
कैसी रही लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

शुक्रवार, 16 अगस्त 2013

पुलिस प्रशिक्षण की प्यारी प्यारी यादें ...

प्रणाम मित्रो .
सर्वप्रथम आप सभी को स्वतंत्रता  दिवस की पश्चातवर्ती हार्दिक शुभकामनाएं !
पूरे दो महीने आप से दूर रहने के लिए क्षमा प्रार्थी हूँ, दरअसल मैं २ माह के पुलिस प्रशिक्षण के लिए जवाहर लाल पुलिस अकादमी , सागर  ( म० प्र० ) गया था . दो महीने प्रशिक्षण में बड़ा मजा आया ! पूरे मध्य प्रदेश से आये अपने बैच के लोगो के साथ विभाग के  अनुभवी ( पदोन्नत/प्रमोटी ) लोगो का साथ खूब भाया. इन दो महीनो में बहुत कुछ सीखा. और सबसे ख़ुशी की बात तो ये थी , कि प्रशिक्षण मेरे अपने शहर सागर में ही था .
अब आप सभी से भी इसके अनुभव बाँटना जरुरी है न !
तो प्रशिक्षण कि शुरुआत हुई कटोरा कट हेयर कटिंग के साथ .....

प्रशिक्षण के दौरान मौज मस्ती में भी कोई कमी नही रही ...

ये है सागर की प्रसिद्द लाखा बंजारा झील जिसके किनारे जवाहर लाल पुलिस अकादमी बनी हुई है ...इस तरह के ज्ञान देने की मेरी आदत यह भी बनी रही ..साथ में है मनोज प्रजापति ( ज्ञानार्जन करते हुए ..)

ये है हमारे पूरे बैच की चांडाल चौकड़ी ! इसमें बांयें से मनोज प्रजापति ( सीधी में पदस्थ मगर सीधे नही है ), फिर नीलिमा ( देखने में सबसे छोटी मगर मस्ती में सबकी माँ है ), इसके बाद हमारे बैच के सबसे कमउम्र विक्रम (बेताल ) और सबसे बांये संजीव जैन ( जिन्हें अपने मक्कार होने का गर्व था )



परेड ( सलामी शास्त्र )  करते हुए हम लोग ....और सबसे आगे हमारे कमांडर मनोज प्रजापति

ये है जलवा ...रिवाल्वर और पिस्टल दोनों एक साथ ....हैंड्स अप
और कंप्यूटर भी सीखा हमने ....

  
जब ज्यादा पी० टी० और परेड हो जाती तो थ्योरी की क्लास में थोड़ी झपकी भी लेने में नही चुकते थे . 




ये है हमारा बैच और हमारे प्रशिक्षक

पीछे दिख रही बिल्डिंग -हमारा होस्टल है .

इन महीनो में हमने शारीरिक प्रशिक्षण में पी० टी०  परेड तो थ्योरी में भारतीय दंड संहिता , दंड प्रक्रिया संहिता , आबकारी अधिनियम , एन डी पी एस एक्ट ,  आचरण नियम , विभागीय नियम  इत्यादि सीखा .
और आखिर में दीक्षांत समारोह के बाद विदाई .....






सोमवार, 27 मई 2013

धाराओं का सरकारी स्टाक ख़त्म हो गया है !

नमस्कार मित्रो ,
बहुत दिनों बाद आपसे से ब्लॉग पर मिलने के लिए क्षमा प्रार्थी हूँ . हुआ यूँ कि ३० जनवरी को मेरी पदस्थापना  आबकारी उप-निरीक्षक के पद पर मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ जिले में हुई . अब चूँकि नयी जगह - नया बदलाव तो था,  ही  साथ मैं अपना डेस्कटॉप यहाँ नही लाया , इसलिए ब्लॉग लिखने में असमर्थ रहा . खैर जगह अच्छी है , और लोग भी अच्छे है . इतने दिनों में मेरा कार्यालय प्रशिक्षण , पुलिस प्रशिक्षण और वृत्त प्रशिक्षण पूरा हुआ ...मजा आया ...सबसे ज्यादा पुलिस प्रशिक्षण में मजा आया .
मेरा एक माह का पुलिस प्रशिक्षण पुलिस अधीक्षक श्री अमित सिंह के निर्देशन में थाना मोहनगढ़ और थाना कोतवाली , टीकमगढ़ में पूरा हुआ . मोहनगढ़ में एक बड़ा ही मजेदार वाकया सुननें में आया . इतना मजेदार वाकया है , कि आपको भी पढ़ कर मजा आएगा .

कुछ वर्षो पहले की बात है - मोहनगढ़ थाने में एक बहुत ही चतुर (पैसा कमाने के मामले में )होमगार्ड सैनिक था .  तो एक बार पास के किसी गाँव में दो गुटों में लड़ाई हो गयी . ये बात सैनिक को पता चली तो वो उस गाँव के रास्ते में एक चाय की दुकान पर बैठ गया . कुछ देर बाद गाँव के एक गुट का आदमी आता दिखा , तो होमगार्ड तैयार  !
होमगार्ड - क्यों भाई , लम्बरदार (बुंदेलखंड का एक सम्मानित संबोधन ) तुम्हारे गाँव में झगडा हो गया , और तुमने मुझे बताया ही नही ?
ग्रामीण - अरे साब , वही तो बताने आपके पास आ रहा था .
होमगार्ड - तो ये बताओ सामने वाली पार्टी पर कितनी धाराएं लगवानी है ?
ग्रामीण - सरकार कम से कम तीन -चार तो लगवा ही दे .
होमगार्ड- अरे यार , लम्बरदार .....धारायें तो चाहे जितनी लगवा देता , मगर एक लफड़ा हो गया ....
ग्रामीण -( कातर भाव से )... अरे साब ...ऐसा न कहो ,,आप तो अपने आदमी हो ....आप की कितनी सेवा की ...आप ३-४ धारायें नही लगवा सकते !
होमगार्ड- यार ..लफड़ा ये हो गया कि धाराओं का सरकारी स्टाक ख़त्म हो गया है , और ब्लेक में २-३ धारायें बची होंगी , जो इमरजेंसी के लिए बची है . वो चीफ साहब (हवालदार) देंगे  नही .
ग्रामीण - (पैर पकड़ते हुए ) अरे साब ! आप ही कुछ करो चाहे जितना पैसा लग जाये , मगर सामने वाली पार्टी पर ३-४ से कम धारा नही लगनी चाहिए ...(गाली देते हुए ...) .. उन्हें तो पता चले ..हम क्या करवा सकते है .
(...फिर गाली ...) अपने आप को बल्देवगढ़ की तोप समझ रहे थे . ( बुंदेलखंड में बल्देवगढ़ की बड़ी तोप प्रसिद्द है ).
होमगार्ड- लम्बरदार ...थोड़े ज्यादा पैसे लगेंगे , अब तुम अपने वाले हो ..इसलिए किसी तरह जुगाड़ करते है .
थाने पहुच कर ...चीप साहब से ...( चीप साब पहले से सेट थे )
 होमगार्ड-  अरे चीप साब , स्टाक में कितनी धारायें बची है ?
चीप साब - स्टाक में तो धारायें ख़त्म हो गयी है .
होमगार्ड - साब , देखो इमरजेंसी स्टाक में देखो ...अपने खास आदमी है . इनका काम तो करना ही है .
चीप साब - देखो यार , इमरजेंसी स्टाक में से हम कोई धारा नही देंगे , अगर साहब को पता चलेगा तो परेशानी हो सकती है .
होमगार्ड - अरे साब , थोड़े ज्यादा ले लेना , लेकिन अब जब अपने वाले है , तो व्यवस्था कर दीजिये . 
 मैंने जबान भी दे दी है . बताइए किस भाव से धारायें देंगे ?
चीप साब - देखो , २००० तो ब्लेक का रेट चल रहा है , और कुछ मैं भी लूँगा , इतनी रिस्क जो ले रहा हूँ .
होमगार्ड - अरे साब , सरकारी रेट तो ५०० रूपये है ?
चीप साब - वो तो तब है , जब स्टाक में धारायें हो , अभी तो ब्लेक में में दे रहा  हूँ, वो भी इमरजेंसी वाली धारायें देने का रिस्क ले रहा हूँ .
होम गार्ड- साब , देखो अपने वाले है , जो रेट चल रहा है , उसी में दे दो , इस बार अपना हिस्सा छोड़ दो .
चीप साब - देखो , तुम इतना कह रहे हो , इसलिए अपना हिस्सा छोड़ रहा हूँ . बताओ कितनी धारायें लगनी है ?
होम गार्ड- साब , ३ धारायें लगा दो , और एक धारा मेरे तरफ से आपको फ्री देनी होगी .
चीप साब - (मुंह बनाते हुए ) ...देखो एक तो तुम्हारे कहने से मैं इतना रिस्क ले रहा हूँ , ऊपर से तुम्हे फ्री धारा भी चाहिए .
होम गार्ड - खीसें निपोरते हुए ...साब कर लो थोडा अद्जेस्ट
चीप साब - ठीक है ,(ऍफ़ आई आर लिखते हुए ) ये  लो तीन पैसे वाली और एक फ्री वाली टोटल चार धारा लगा दी . ठीक है .
होम गार्ड (मूंछो पे ताव देते हुए )- चलो निकालो छह हजार रूपये ........


मंगलवार, 1 सितंबर 2009

वाजपेयी का काव्य पाठ और खली पड़ी कुर्सियां !!

नमस्कार मित्रो,
पिछले दिनों १३ औगस्त को डॉ हरिसिंह गौर केंद्रीय विश्वविद्यालय, सागर (म०प्र०) के हिन्दी विभाग द्वारा हिन्दी के जाने माने कवि, राजनयिक और पत्रकार डॉ अशोक वाजपेयी जी का काव्य पाठ aआयोजित किया गया था । पर हाय रे विडम्बना और विश्वविद्यालय प्रशासन की व्यवस्था की इतने नामी कवि का काव्य पाठ और उसकी सूचना तक आम लोगो को नही दी गयी । परिणामस्वरूप कार्यक्रम में जब डॉ वाजपेयी अपने जन्मस्थान में आयोजित इस कार्यक्रम में अपना काव्य पाठ कर रहे थे ,तो विश्वविद्यालय के स्वर्ण जयंती हाल में बमुश्किल पचास लोग भी नही थे । अपने जन्म स्थान पर इतने नामी कवि के काव्य पाठ पर दिल रो आया , की विश्वविद्यालय प्रशासन ने अगर सिर्फ़ स्थानीय समाचार पत्रों में छोटी सी ख़बर भी दे दी होती तो डॉ वाजपेयी के हजारो प्रशंशक टूट पड़ते । डॉ वाजपेयी ने कार्यक्रम में अपनी १९ कविताये और सागर (म० प्र० ) शहर के अपने अनुभव सुनाये । पर उनकी आँखों में कही नामी भी नज़र आई कि जिस शहर कि तारीफ वो अपने हर कार्यक्रम में बड़ी शिद्दत के साथ करते है , उस शहर को हर जगह बड़े गर्व के साथ अपना जन्म स्थान बताते है । उस शहर ने उनके साथ इतनी बेरूखी दिखाई । पर मैं अपनी इस पोस्ट के माध्यम से डॉ अशोक वाजपेयी जी को ये बताना चाहता हूँ कि बेरूखी सागर वासियो ने नही बल्कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने की , वरना शहर के लोग अब भी आप को अपने शहर का गौरव मानते है । आज भी सागर वासी बड़े फक्र से बताते है , की डॉ अशोक वाजपेयी जी सागर शहर की देन है ।
बड़े शर्म की बात है की प्रशासन की गलतियाँ लोगो को भुगतनी पड़ती है , आज भी मुझ जैसे सैकडो लोगो को इस बात का रंज है , की हम डॉ वाजपेयी जी का काव्यपाठ नही सुन पाए ।
खैर दर्द सहने के लिए है ,मुल्क का आम इंसान
खुशियाँ तो खास लोगो की होती है , शान !
जब दर्द की बात चली है तो , आज आपसे कुछ दर्द और बाँटना चाहता हूँ। घबराइये मत जनाब मैं अपनी निजी समस्याए लेकर नही बैठ रहा हूँ । अमा मियां दुनिया में वैसे क्या कम पिरोब्लम है , जो मैं आपको अपनी पिरोब्लम में उलझाऊ । खामखा मेरी टाइम पास करने की आदत तो है , नही ! पिछली दो पोस्टो से मेरे कुछ पाठक मित्रो ने आदेश किया की जनाब थोडी बड़ी पोस्ट लिखा करो और कुछ फोटो शोतो भी लगाया करो !
अब मैं आपको बताऊ की पहली बात समय आभाव की है । और दूसरी ये की मैं ठहरा नया नया बिलागर !! मुझे अभी भी खुदा कसम अपनी पोस्ट में फोटू लगाना नही आया , एक बार उड़नतश्तरी वाले समीर जी से पूछा था , मगर उनकी बताई बातें मेरे भेजे के ऊपर से निकल गई , इसमे समीर का कोई दोषः नही , मैं ही अल्पबुद्धि जो ठहरा । समीर जी तो बड़े परोपकारी है , मेरी बुद्धि में जरा तकनिकी बातें देर से आती है , इसलिए चाहकर भी मैं अपनी पोस्ट में फोटू नही दे पा रहा हूँ । अगर आप में कोई सज्जन जरा सरल भाषा में मेरी मदद करे तो उसका मैं आभारी रहूँगा । लो मियाँ मुआफ करना मैं नादाँ अपनी ही लेके बैठ गया ।
अभी आज के अखबार में एक अच्छी ख़बर पढने को मिली की , अपने पड़ोसी देश भूटान में स्थानीय चुनावो में उम्मेद्वारो की न केवल लिखित परीक्षा होगी , और उनका मौखिक साक्षात्कार भी होगा जिसमे में उनसे प्रशासनिक, राजनेतिक और सामाजिक सवाल पूछे जायेंगे !
इश्वर से प्राथना कीजिये की हमारे नेताओ को सद्बुद्धि दे ताकि वे भी कोई इसी तरह का कानून बनाये ! अरे भाई जब पाकिस्तान में भी जब चुनाव लड़ने की योग्यता स्नातक है , तो हम यार इतने गये गुजरे नही है ?! खैर अपनी तो हमें मालूम है , नेताओ की खुदा जाने ? क्यो आप ही कुछ बोले ?

orchha gatha

बेतवा की जुबानी : ओरछा की कहानी (भाग-1)

एक रात को मैं मध्य प्रदेश की गंगा कही जाने वाली पावन नदी बेतवा के तट पर ग्रेनाइट की चट्टानों पर बैठा हुआ. बेतवा की लहरों के एक तरफ महान ब...