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June, 2013 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

हर कसौटी पर कम निकले ....

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हार गये सारी बाजी, हर कसौटी पर कम निकले 
अब आरज़ू है , कि किसी तरह बस दम निकले 
हर तरह की आजमाईश , हमने की हर तरकीब 
क्या पता था ? हमरी कोशिशें उन पर सितम निकलें 
जीने की आरज़ू नही अब , ख़त्म हो गया जहाँ 
खुश रहे वो , जब कभी हमारा कफ़न निकलें 
हो गये तबाह , पर अब गम क्या करें ,
 मिले खुशियाँ  उन्हें , जब-जब हमारा सनम निकलें
महक बाकि रहेगी ताउम्र, मेरी मोहब्बत की 
चिता की राख को संभल के रखना , क्या पता वो 'चन्दन 'निकले

मालवा का स्वर्ग है , मांडू ( मांडवगढ़ )

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 चलिए आज आपको मालवा के स्वर्ग यानि मांडू अथवा मांडवगढ़ की सैर पर ले चलते है . क्या कहा ? ये मालवा कहाँ है ?  तो बताते है ...भाई सब बताते है ..काहे इतनी जल्दी किये हो .....अब बताने के लिए ही तो ये पोस्ट लिखे है . तो मध्य प्रदेश भारत के कुछ प्राकृतिक सुन्दरता वाले राज्यों में से एक है . पश्चिमी मध्य प्रदेश जिसमे इंदौर , उज्जैन , रतलाम , झाबुआ , धार और देवास  आदि  वाला हिस्सा मालवा के नाम से प्रसिद्द है .  ,


हाँ, वही उज्जयनी जहाँ विश्व के सर्वश्रेष्ठ कवियों में शुमार कालिदास ने अपने महान अतुलनीय महाकाव्य और नाटक रचे . यही सिंहासन बत्तीसी की गाथा पैदा हुई . चन्द्रगुप्त के नवरत्न भी इसी भूमि में हुए . बाद में कविकुल शिरोमणि अत्यंत प्रतिभाशाली राजा भोज भी तो इसी माटी में पैदा हुए . ये तो इतिहास की बातें है , वर्तमान में मालवा मध्य प्रदेश का सर्वाधिक संपन्न क्षेत्र है . .....लो कल्लो बात ...अपन को चलना था , मांडू और अपन अटक के रह गए मालवा में ...मालवा की कहानी फिर कभी ..अभी तो बस मांडू की ही बात करते है 
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हाँ तो मांडू मध्य प्रदेश के धार जिले का एक खुबसूरत सा क्षेत्र है , जिसे मां…

अमीर खुसरो : एक अद्भुत महान हिंदुस्तानी

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जब कभी किसी ग़ज़ल की गहराई में डूबता हूँ , या फिर किसी कब्बाली को सुनते हुए दिल झूम उठता है , या किसी भी भारतीय संगीत को सुनते हुए ढोलक - तबले की थाप या सितार की झंकार से दिल नाचने लगता है , तो मन उस महान आत्मा के सम्मान में अपने आप नतमस्तक हो जाता है , जिसकी पहेलियाँ बचपन में खूब बुझी थी . जी हाँ , आज मैं बात  कर रहा हूँ , भारतीय इतिहास के उस महान व्यक्ति की जो अपने आप को " तूती -ए- हिन्द " यानि  हिंदुस्तान का तोता कहता था . क्योंकि रोम -रोम  में हिन्द बसा था . कभी -कभी जब सोचता हूँ , अमीर खुसरो के बारे में तो लगता है , कि क्या सचमुच कोई व्यक्ति इतना प्रतिभाशाली हो सकता है ? या फिर ये इतिहास की कोरी गप्प है ? 
मगर  जब मैंने  इतिहास की कई किताबो को खंगाला तो मालूम चला , कि सचमुच खुसरो इतने प्रतिभाशाली थे  .  खुसरो का जन्म एटा जिले के पटियाली   ( उत्तर  प्रदेश   ) में 1253 ईस्वी में हुआ  था .खुसरो का पूरा नाम अबुल हसन यमीनुद्दीन ख़ुसरौ था . दुनिया खुसरो को सितार , ढोलक ,तबले जैसे वाद्य यंत्रो  और ग़ज़ल , कव्वाली   तथा  कौल , तलबाना, तराना , और ख्याल  के अविष्कारक के नाम से जान…