मित्रो सर्वप्रथम आप सभी को राम नवमी की हार्दिक शुभकामनाये
इसके बाद मैं आपको मुर्ख दिवस की शुभकामनाएं नही दूंगा , क्योंकि आप सभी मुर्ख तो है नही !(जरुरी नही कि मेरी सोच सही ही हो )
तो आज सुबह से राम नवमी से ज्यादा अप्रेल फूल की शुभकामनाएं मेरे मोबाइल के इन्बोक्स में आ रही है । अब मैं ये सोच नही पा रहा हूँ , कि कौन मुर्ख है , मैं (जिसे ऐसे सन्देश आ रहे है ) या वो लोग जो ऐसे सन्देश भेज या फॉरवर्ड कर रहे है । खैर ये सब छोडो कुछ काम की बात की जाये ....अरे यार हंसाने की बात नही है , क्या अफ्रेल फूल के दिन काम नही होता । अगर ऐसा होता तो सरकार अपना वित्तीय वार्षिक वर्ष १ अप्रेल से शुरू नही करती ।( वो अलग बात है ,कि वो हमेशा लोगो को किसी भी दिन मुर्ख बनाने के लिए स्वतंत्र है ) बैंको का वर्ष १ अपेल से शुरू नही होता । आप फिर हंसाने लगे , गलत बात है , मैं कोई लताफा(लतीफे का बड़ा भाई ) थोड़े सुना रहा हूँ ॥
हाँ ,तो मैं अपनी बात शुरू कर रहा हूँ , तो सुबह सुबह मेरे पडोसी गौतम जी फनफनाये से मेरे पास आये , और दांत पीसते हुए आँखे निकलते हुए मुझ को घूरने के अंदाज़ में बोले - हद हो गयी पाण्डेय जी !
मैं थोडा घबरा सा गया , कि भई मैंने आज के दिन मतलब मुर्ख दिवस के दिन कौन सी हद कर दी !
मैंने थोड़े घबराये से अंदाज में पूछा - किस बात की हद हो गयी ?
गौतम जी हाथ नाचते हुए बोले - आपको सोने से फुर्सत मिले तो देश दुनिया की खबर मिले !
मैं फिर रक्षात्मक मुद्रा अख्तियार करते हुए बोला , अब मेरे सोने से कौन सी हद टूट गयी ? मैं कोई गर्द थोड़े हूँ , जो ड्यूटी के वक़्त सो नही सकता है , और मैं तो अपने घर में फुर्सत के समय सो रहा था ।
गौतम जी फिर खिसियाने से अंदाज में बोले - जब आप जैसे लोग घोड़े बेचकर सोयेंगे तो ऐसा तो होगा ही !
अब फिर मेरे आश्चर्यचकित होने की बारी थी , अरे भई , अब मैंने किस के घोड़े बेच दिए , और मैं क्यों घोड़े बेचने लगा ? और सीधे सिद्ध बताओ हुआ क्या है ?
अब गौतम जी कुछ नरम पड़े और बोले - क्या घोर कलयुग आ गया ! भगवान् श्रीराम की जन्म दिन मुर्ख दिवस को मनाया जा रहा है !
मैंने राहत की साँस ली , कि चलो मैंने कोई गलती नही की या मेरा कोई दोष नही है । फिर मैंने चैन की साँस लेते हुए कहा - सही तो है , अब इस देश में लोग राम की पूजा तो खूब करते है , लेकिन उनके आदर्शो को दूर से भी नही अपनाते है । भगवान् को प्रसाद की रिश्वत देकर अपने स्वार्थ पुरे किये जाते है । और मन्नत पूरी होने पर बड़े खुश होते है , कि भगवान को सिर्फ सवा किलो लड्डू या एक सौ एक रूपये में सस्ते में पटा लिया ! तो भगवान् ने भी सोच लिया होगा , बेटा इस बार मैं मुर्ख दिवस के दिन पैदा होऊंगा , और जितने स्वार्थी भक्त रिश्वत देकर मुझे ललचाने कि कोशिश करेंगे उन्हें उनकी ही तरह मैं भी अप्रेल फूल बनाऊंगा !
अब घबराने की बारी गौतमजी की थी , मतलब आज सुबह हो मैं जो भगवान् से अपनी मन्नत कह के आया हूँ , वो पूरी नही होगी ?
नही यार खामख्वाह डर रहे हो , भगवान रिश्वत या प्रसाद के भूखे थोड़े है , और भगवान् अपने सच्चे भक्तो को थोड़े मुर्ख थोड़े बनायेंगे । वो तो झूठे -मक्कार लोगो को मुर्ख बनायेंगे , जिन्होंने अपने स्वार्थो के पीछे पूरे देश को मुर्ख बना रहे है । टेंशन मत लो यार , आओ चाय पीते है । जय श्री राम
विचारों की रेल चल रही .........चन्दन की महक के साथ ,अभिव्यक्ति का सफ़र जारी है . क्या आप मेरे हमसफ़र बनेगे ?
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रविवार, 1 अप्रैल 2012
बुधवार, 29 जून 2011
जून के चर्चित तीन चेहरे: कुछ राज गहरे !!!!
बुधवार, 27 जनवरी 2010
जब इंदिरा जी को अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा- कुतिया और डायन.....!!!!
शीर्षक पढ़कर आप चौंक गये न ?!
मैं भी पटना से प्रकाशित हिंदुस्तान समाचार पत्र को २५ जनवरी को " नेहरु को अशिष्ट मानता था चीन " शीर्षक से छपी खबर को पढ़कर चौंका था ।
आपके के लिए हिंदुस्तान की खबर ज्यो के त्यों बिना किसी फेरबदल के प्रस्तुत कर रहा हूँ ।
" नेहरु को अशिष्ट मानता था चीन "
'निक्सन , इंदिरा एंड इंडिया पोलिटिक्स एंड बियोंड ' पुस्तक से हुआ खुलासा
भाषा
नई दिल्ली
प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरु ने हालाँकि 'हिंदी चीनी भाई-भाई ' का प्रसिद्ध नारा दिया था , लेकिन चीन ने उन्हें अशिष्ट और भारत को विदेशी मदद के मामले में अँधा कुआं माना था ।
चीन का यह भी नजरिया था कियह काफी दुखद है कि दिवंगत प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी ने भी अपने पिता से उनकी पुस्तक भारत एक खोज में अभिव्यक्ति फलसफे कि विरासत को अपनाया । इस बारे में चीन का मानना था कि भारत एक खोज नेहरु के इस विचार को जाहिर करती है कि महँ भारत का साम्राज्य मलेसिया , सीलोन (श्रीलंका ) तथा अन्य क्षेत्रो तक फैला हुआ था। ये टिपण्णी चीन के पूर्व प्रधानमंत्री चाऊ एन लाई ने पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन के समय कीथी । निक्सन ही थे , जिन्होंने इंदिरा को कुतिया और डायन कहा था , जबकि उनके राष्ट्रिय सुरक्षा सलाहकार हेनरी किसिंगर ने भारतीयों को हरामी कहा था।
ये टिप्पणिया अब पुस्तक 'निक्सन , इंदिरा एंड इंडिया : पोलिटिक्स एंड बियोंड ' का हिस्सा है । इसके लेखक वरिष्ठ पत्रकार कल्याणी शंकर है। इस पुस्तक में निक्सन के दौरे के और बाद में गोपनीयता की श्रेणी से हटाये गये दस्तावेजो का संकलन है । इन दस्तावेजो में अमेरिका, चीन और पाकिस्तान का भारतीय राजनितिक प्रणाली तथा जम्मू कश्मीर जैसे विवादस्पद मुद्दे सहित भारत के भविष्य के बारे में अपनाया गया नजरिया शामिल था । निक्सन ने २३ फ़रवरी १९७२ को चीन की अपनी एतिहासिक यात्रा के दौरान भारत पर रूस में हथियार खरीदने के लिए अमेरिकी मदद को परिवर्तित करने का आरोप लगाया था। उन्होंने कहा था कि वह पाकिस्तान को पर्याप्त आर्थिक मदद भेजेंगे , जिसका इस्तेमाल वह अन्य स्रोतों से हथियार खरीदने के लिए कर सकेगा । निक्सन ने कहा था ,' समस्या एक ऐसा रास्ता तलासने की है, जिसके जरिये पश्चिमी पाकिस्तान कुछ सैन्य उपकरण और मदद हासिल कर सके । हमारी ओर से , हम यह करेंगे किहम पश्चिमी पकिस्तान को पर्याप्त मात्र में आर्थिक मदद देंगे ।
इससे पश्चिमी पाकिस्तान, हमरे विचार से उसकी रक्षा के हित में , अन्य स्रोतों से हथियार खरीद सकेगा । ' उन्होंने कहा था कि असल तथ्य यह है कि यह भारत में हमारी नीति कि त्रासदी है। हमने बीते २० साल में भारत को मदद के तौरपर करीब १० अरब डॉलर दिए ।
उपरोक्त खबर से अमेरिका और चीन कि मानसिकता का पता चलती है । साथ ये भी पता चलता है कि इन दोनों देशो के प्रमुख अन्य देशो के प्रमुखों के लिए कैसी अभद्र भाषा का प्रयोग करते थे । इस पुस्तक के लिए जहाँ बधाई के पात्र है वही हमारे वर्तमान नेताओ को भी क्षुद्र मानसिकता का त्याग करके आगे के लिए सही वैदेशिक नीतियां बनानी होंगी। उपरोक्त खबर से हर भारतीय की तरह मेरा मन भी आहत हुआ है । इसके बाद भी अमेरिका हमारे नेताओ का अपमान कर चुकाहै (जार्ज फर्नाडिज , ए० पी० जे० अब्दुल कलाम आदि ) और हम अमेरिका और अमेरिकी नीतियों के पिछलग्गू बने है !! ....,,,जरा सोचिये ?!
अब बारी पुछल्ले की ...
अपने झल्लू जी से एक बार एक अमेरिकी मिला और बोला - हमारा कंट्री में हमको इतना फ्रीडम है , की हम व्हाईट हॉउस के सामने खड़ा होके अपने प्रेसिडेंट को गली दे सकता है ।
झल्लू जी - इसमें कौन सी बड़ी बात है, हम भी तो अपने राष्ट्रपति भवन के सामने खड़े होकर तुम्हारे प्रेसिडेंट को गाली दे सकते है । और तो और सेल तुम्हारे प्रेसिडेंट को तो सारी दुनिया गाली देती है !!!!
:-)
आपकी प्रतिक्रिया के इंतज़ार में आपका
मुकेश पाण्डेय "चन्दन"
मैं भी पटना से प्रकाशित हिंदुस्तान समाचार पत्र को २५ जनवरी को " नेहरु को अशिष्ट मानता था चीन " शीर्षक से छपी खबर को पढ़कर चौंका था ।
आपके के लिए हिंदुस्तान की खबर ज्यो के त्यों बिना किसी फेरबदल के प्रस्तुत कर रहा हूँ ।
" नेहरु को अशिष्ट मानता था चीन "
'निक्सन , इंदिरा एंड इंडिया पोलिटिक्स एंड बियोंड ' पुस्तक से हुआ खुलासा
भाषा
नई दिल्ली
प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरु ने हालाँकि 'हिंदी चीनी भाई-भाई ' का प्रसिद्ध नारा दिया था , लेकिन चीन ने उन्हें अशिष्ट और भारत को विदेशी मदद के मामले में अँधा कुआं माना था ।
चीन का यह भी नजरिया था कियह काफी दुखद है कि दिवंगत प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी ने भी अपने पिता से उनकी पुस्तक भारत एक खोज में अभिव्यक्ति फलसफे कि विरासत को अपनाया । इस बारे में चीन का मानना था कि भारत एक खोज नेहरु के इस विचार को जाहिर करती है कि महँ भारत का साम्राज्य मलेसिया , सीलोन (श्रीलंका ) तथा अन्य क्षेत्रो तक फैला हुआ था। ये टिपण्णी चीन के पूर्व प्रधानमंत्री चाऊ एन लाई ने पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन के समय कीथी । निक्सन ही थे , जिन्होंने इंदिरा को कुतिया और डायन कहा था , जबकि उनके राष्ट्रिय सुरक्षा सलाहकार हेनरी किसिंगर ने भारतीयों को हरामी कहा था।
ये टिप्पणिया अब पुस्तक 'निक्सन , इंदिरा एंड इंडिया : पोलिटिक्स एंड बियोंड ' का हिस्सा है । इसके लेखक वरिष्ठ पत्रकार कल्याणी शंकर है। इस पुस्तक में निक्सन के दौरे के और बाद में गोपनीयता की श्रेणी से हटाये गये दस्तावेजो का संकलन है । इन दस्तावेजो में अमेरिका, चीन और पाकिस्तान का भारतीय राजनितिक प्रणाली तथा जम्मू कश्मीर जैसे विवादस्पद मुद्दे सहित भारत के भविष्य के बारे में अपनाया गया नजरिया शामिल था । निक्सन ने २३ फ़रवरी १९७२ को चीन की अपनी एतिहासिक यात्रा के दौरान भारत पर रूस में हथियार खरीदने के लिए अमेरिकी मदद को परिवर्तित करने का आरोप लगाया था। उन्होंने कहा था कि वह पाकिस्तान को पर्याप्त आर्थिक मदद भेजेंगे , जिसका इस्तेमाल वह अन्य स्रोतों से हथियार खरीदने के लिए कर सकेगा । निक्सन ने कहा था ,' समस्या एक ऐसा रास्ता तलासने की है, जिसके जरिये पश्चिमी पाकिस्तान कुछ सैन्य उपकरण और मदद हासिल कर सके । हमारी ओर से , हम यह करेंगे किहम पश्चिमी पकिस्तान को पर्याप्त मात्र में आर्थिक मदद देंगे ।
इससे पश्चिमी पाकिस्तान, हमरे विचार से उसकी रक्षा के हित में , अन्य स्रोतों से हथियार खरीद सकेगा । ' उन्होंने कहा था कि असल तथ्य यह है कि यह भारत में हमारी नीति कि त्रासदी है। हमने बीते २० साल में भारत को मदद के तौरपर करीब १० अरब डॉलर दिए ।
उपरोक्त खबर से अमेरिका और चीन कि मानसिकता का पता चलती है । साथ ये भी पता चलता है कि इन दोनों देशो के प्रमुख अन्य देशो के प्रमुखों के लिए कैसी अभद्र भाषा का प्रयोग करते थे । इस पुस्तक के लिए जहाँ बधाई के पात्र है वही हमारे वर्तमान नेताओ को भी क्षुद्र मानसिकता का त्याग करके आगे के लिए सही वैदेशिक नीतियां बनानी होंगी। उपरोक्त खबर से हर भारतीय की तरह मेरा मन भी आहत हुआ है । इसके बाद भी अमेरिका हमारे नेताओ का अपमान कर चुकाहै (जार्ज फर्नाडिज , ए० पी० जे० अब्दुल कलाम आदि ) और हम अमेरिका और अमेरिकी नीतियों के पिछलग्गू बने है !! ....,,,जरा सोचिये ?!
अब बारी पुछल्ले की ...
अपने झल्लू जी से एक बार एक अमेरिकी मिला और बोला - हमारा कंट्री में हमको इतना फ्रीडम है , की हम व्हाईट हॉउस के सामने खड़ा होके अपने प्रेसिडेंट को गली दे सकता है ।
झल्लू जी - इसमें कौन सी बड़ी बात है, हम भी तो अपने राष्ट्रपति भवन के सामने खड़े होकर तुम्हारे प्रेसिडेंट को गाली दे सकते है । और तो और सेल तुम्हारे प्रेसिडेंट को तो सारी दुनिया गाली देती है !!!!
:-)
आपकी प्रतिक्रिया के इंतज़ार में आपका
मुकेश पाण्डेय "चन्दन"
बुधवार, 20 जनवरी 2010
अब गूगल खोजेगा लापता लोगो को .......
जी हाँ , गूगल अब तक जो इंटरनेट पर सामग्री खोजकर हम सब की मदद करता था । वो अब हैती में आये भूकंप के कारन लापता हुए लोगो को खोजने में मदद करेगा। गूगल ने एक सोफ्टवेयर हैती सरकार की सहायता के लिए तैयार किया है । जिसमे हैती में कोई भी व्यक्ति गूगल पर जाकर अपने लापता सम्बन्धी की जानकारी जैसे उसकी उम्र, लिंग, कद, और फोटो के आधार पे खोजने में मदद करेगा। ये सुविधा हैती वासियों को निसुक्ल प्रदान की जाएगी । खैर गूगल का ये कदम न केवल स्वागत योग्य है वल्कि प्रसंसनीय भी है । हमारी तकनीक अगर मुसीबत में इंसानियत के काम आती है तो ही उसकी सार्थकता है। गूगल को शुक्रिया ।
पुछल्ला ;-)
हमारे झल्लू जी के सुपुत्र से जब स्कूल में टीचर ने उसके पिता का नाम पूछा तो झाल्लुपुत्र ने बड़ी मासूमियत से जवाब दिया -जी गूगल !!!
टीचर - क्या मतलब है तुम्हारा ?
झाल्लुपुत्र- जी , क्या है , किमेरे पिताजी जब देखो कुछ न कुछ खोजते रहते है , कभी तौलिया, कभी मोज़े तो कभी मुझे !!
इसलिए मेरी मम्मी ने उनका नाम ही गूगल रख दिया है, मेरे पुरे मोहेल्ले के लोग भी उन्हें ग्गोगल ही पुकारते है ।:-)
पुछल्ला ;-)
हमारे झल्लू जी के सुपुत्र से जब स्कूल में टीचर ने उसके पिता का नाम पूछा तो झाल्लुपुत्र ने बड़ी मासूमियत से जवाब दिया -जी गूगल !!!
टीचर - क्या मतलब है तुम्हारा ?
झाल्लुपुत्र- जी , क्या है , किमेरे पिताजी जब देखो कुछ न कुछ खोजते रहते है , कभी तौलिया, कभी मोज़े तो कभी मुझे !!
इसलिए मेरी मम्मी ने उनका नाम ही गूगल रख दिया है, मेरे पुरे मोहेल्ले के लोग भी उन्हें ग्गोगल ही पुकारते है ।:-)
शुक्रवार, 15 जनवरी 2010
झल्लू जी पहुचे हरिद्वार !! फसे नयी परेशानी में .........
नमस्कार दोस्तों, अपने जवाहर सिंह झल्लू जी इस बार मकर संक्रांति के शुभ अवसर पर हरिद्वार में लगे महाकुम्भ पहुच गये। अब जब झल्लू जी जहाँ हो वहां कोई अनोखी बात न हो ऐसा हो ही नही सकता है ! पहली बात अपने झल्लू जी ही अनोखे है ! अब झल्लू जी हरिद्वार में जैसे ही गंगा के किनारे कपडे उतार कर नहाने के लिए घुसे तो पानी ठंडा था। किसी तरह हिम्मत बांध कर झल्लू जी आख़िरकार जल में घुस ही गये । अब जब घुस गये तो डुबकी भी लगा ली। जब झल्लू जी डुबकी लगा के बहार आये तो , गजब हो गया ! भई , कोई महँ पापी जो अपने पाप धोने हरिद्वार कुम्भ में आया होगा , मगर अपनी आदत छोड़ नही पाया और झल्लू जी के कपडे मार ले गया ।
अब झल्लू जी लंगोट पर सर्दी में ठिठुरते खड़े ! समझ में नही आ रहा की क्या करे ? जब ठण्ड ज्यादा लगने लगी तो पोलिस थाने की और जोर से दौड़ लगा दी । मगर झल्लू जी की परेशानी यहीं ख़त्म नही हुई , उनके के पीछे एक आदमी भी दौड़ लगाने लगा ! झल्लू जी अब और परेशां की एक तो नंगे बदन ठण्ड में कुल्फी हो रहे थे , ऊपर से ये मुया पीछे पड़ गया । अब झल्लू जी आगे बड़ी तेजी से अपनी पूरी दम लगा के भागे ................ वह आदमी भी उतनी ही तेजी भगा । झल्लू जी की जान अटकी की अब क्या करे ?!
जब झल्लू जी पुलिस थाने के नजदीक पहुचे तो सोचा अब रुक के देख लिया जाये , आखिर ये इंसान क्यों मेरे पेछ्हे भाग रहा है । झल्लू जी रुके , सांस ली । इतने में वो आदमी भी पहुच गया , बोला - महराज जी आप की भेष भूओषा देख कर लग रहा है, की आप बहुत पहुचे हुए संत है । आप ही मेरा कल्याण कर सकते है । झल्लू जी की जान में जान आई और बोले- पैर छोडो , मैं कोई संत वन्त नही हूँ । मैं तो पुलिस थाने जा रहा हूँ , मेरा कोई वस्त्र हरण कर ले गया । भई मुझे माफ़ करो ।
अब झल्लू जी लंगोट पर सर्दी में ठिठुरते खड़े ! समझ में नही आ रहा की क्या करे ? जब ठण्ड ज्यादा लगने लगी तो पोलिस थाने की और जोर से दौड़ लगा दी । मगर झल्लू जी की परेशानी यहीं ख़त्म नही हुई , उनके के पीछे एक आदमी भी दौड़ लगाने लगा ! झल्लू जी अब और परेशां की एक तो नंगे बदन ठण्ड में कुल्फी हो रहे थे , ऊपर से ये मुया पीछे पड़ गया । अब झल्लू जी आगे बड़ी तेजी से अपनी पूरी दम लगा के भागे ................ वह आदमी भी उतनी ही तेजी भगा । झल्लू जी की जान अटकी की अब क्या करे ?!
जब झल्लू जी पुलिस थाने के नजदीक पहुचे तो सोचा अब रुक के देख लिया जाये , आखिर ये इंसान क्यों मेरे पेछ्हे भाग रहा है । झल्लू जी रुके , सांस ली । इतने में वो आदमी भी पहुच गया , बोला - महराज जी आप की भेष भूओषा देख कर लग रहा है, की आप बहुत पहुचे हुए संत है । आप ही मेरा कल्याण कर सकते है । झल्लू जी की जान में जान आई और बोले- पैर छोडो , मैं कोई संत वन्त नही हूँ । मैं तो पुलिस थाने जा रहा हूँ , मेरा कोई वस्त्र हरण कर ले गया । भई मुझे माफ़ करो ।
बुधवार, 13 जनवरी 2010
झल्लू जी की नई परेशानी !
प्रिय मित्रो , अब तक आप जवाहर सिंह "झल्लू " से तो परिचित हो चुके होंगे । जैसा की आप जानते है की झल्लू जी हर बार अपनी अकल मंदी से कोई परेशानी मोल लेते है और हंसी के पात्र बन जाते है । अब सर्दी कड़ाके की पड़ रही है, मगर जल्लू जी का दिमाग भी सर्दी की तरह कड़ाके का दौड़ रहा है ! अब झल्लू जी कुछ सवालो को लेकर परेशां है , उनके सवालो के जवाब मेरे पास तो नही है शायद आप के पास हो ...........?
सवाल -१ भारत में अभी तक चुटकुले सरे रिश्तो जैसे - माँ-बाप , भाई-बहन , सास-बहु, चाचा-भतीजा, भाई-भाई, जीजा-साली, भाभी-देवर आदि पर बने मगर अभी तक कोई ससुर के ऊपर चुटकुला नही बना ! आखिर क्यों ?
२ आखिर सबसे ज्यादा चुटकुले सरदारों पर ही क्यों बनाये जाते है ?
३ चुटकुला शब्द की उत्पत्ति कैसे हुई ?
आप सभी को संक्रांति, पोंगल, खिचड़ी, लोहड़ी की हार्दिक शुभकामनाये...... जय हो
सवाल -१ भारत में अभी तक चुटकुले सरे रिश्तो जैसे - माँ-बाप , भाई-बहन , सास-बहु, चाचा-भतीजा, भाई-भाई, जीजा-साली, भाभी-देवर आदि पर बने मगर अभी तक कोई ससुर के ऊपर चुटकुला नही बना ! आखिर क्यों ?
२ आखिर सबसे ज्यादा चुटकुले सरदारों पर ही क्यों बनाये जाते है ?
३ चुटकुला शब्द की उत्पत्ति कैसे हुई ?
आप सभी को संक्रांति, पोंगल, खिचड़ी, लोहड़ी की हार्दिक शुभकामनाये...... जय हो
मंगलवार, 5 जनवरी 2010
औरत और आंसू !!
औरत और आंसू , है कितनी समानता
दोनों सुख-दुःख के साथी, लेके महानता
सुख दुःख का पर्याय , नयन-नीर और नारी
छलक पड़ते दोनों, सुख हो या दुःख भरी
आजीवन ही नारी की आँखों में होता पानी
हर मुस्कान और तीस से जुडी दोनों की कहानी
बिन आंसू के आँखे , कहलाती संवेदनहीन
बिन नारी के कहाँ समाज भी कहलाता कुलीन
औरत के लिए कब किसने आंसू बहाए ?
औरत के आंसू पर समाज ने खूब गीत गाये
दूजो के लिए ही तो औरत व् आंसू काम आये
अपने लिए भी बह सके , कभी तो ऐसी शाम आये ...
पुछल्ला ;- )
जवाहर सिंह "झल्लू " जब घर पहुचे तो देखा उनका बेटा रो रहा था , जब झल्लू जी ने उससे रोने का कारन पूछा तो उसने रोते-रोते बताया - पापा आज मुझे फिर से मम्मी ने मारा है। अब बहुत हो गया मेरा बा आपकी बीबी के के साथ गुजारा नही हो सकता है। मैं जा रहा हूँ ।
नव वर्ष की पुनः शुभकामनाओ के साथ आपका ही
मुकेश पाण्डेय "चन्दन"
दोनों सुख-दुःख के साथी, लेके महानता
सुख दुःख का पर्याय , नयन-नीर और नारी
छलक पड़ते दोनों, सुख हो या दुःख भरी
आजीवन ही नारी की आँखों में होता पानी
हर मुस्कान और तीस से जुडी दोनों की कहानी
बिन आंसू के आँखे , कहलाती संवेदनहीन
बिन नारी के कहाँ समाज भी कहलाता कुलीन
औरत के लिए कब किसने आंसू बहाए ?
औरत के आंसू पर समाज ने खूब गीत गाये
दूजो के लिए ही तो औरत व् आंसू काम आये
अपने लिए भी बह सके , कभी तो ऐसी शाम आये ...
पुछल्ला ;- )
जवाहर सिंह "झल्लू " जब घर पहुचे तो देखा उनका बेटा रो रहा था , जब झल्लू जी ने उससे रोने का कारन पूछा तो उसने रोते-रोते बताया - पापा आज मुझे फिर से मम्मी ने मारा है। अब बहुत हो गया मेरा बा आपकी बीबी के के साथ गुजारा नही हो सकता है। मैं जा रहा हूँ ।
नव वर्ष की पुनः शुभकामनाओ के साथ आपका ही
मुकेश पाण्डेय "चन्दन"
रविवार, 20 दिसंबर 2009
कोपेनहेगन ; बड़े-बड़ो के चोंचालें....
नमस्कार, दोस्तों
आजकल डेनमार्क की राजधानी कोपेनहेगन में जलवायु परिवर्तन पर १९२ देशो का विचार मंथन चल रहा है । हमारे प्रधानमंत्री महोदय भी वहां तशरीफ़ ले गये है । जहाँ अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के कारन उन्हें ट्राफिक जाम में फसना पड़ा । जैसा की हम सभी जानते है की , दुनिया में अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया जैसे देश कार्बन डाय ओक्साईड गैस का सबसे ज्यादा उत्सर्जन करते है, जिसके कारन जलवायु परिवर्तन जैसी समस्या सामने आ रही है । मगर ये देश सोचते है की इस समस्या से निपटने का सारा जिम्मा विकासशील देश ही उठाये जो की गलत ही नही बल्कि उनका गैरजिम्मेदारना रवैया दिखलाता है । खैर जैसा की पहले से ही तय लग रहा था की इस सम्मलेन से कोई हल नही निकलने वाला है । वही हो भी रहा है ।
खैर हम सरे देश वासी भी कोई बहुत जागरूक नही है। आज भी हमारे देश में पर्यावरण को लेकर कोई खास जागरूकता नही है। इसकी आगे बहुत ज्यादा जरुरत है। अगर हम जल्द ही चेते नही तो हो सकता है की हमारे देश के नक़्शे से लक्ष्यदीप और अंडमान के कई द्वीप गायब हो जाये ! हमारी जल की बर्बादी का ही नमूना ले लीजिये ॥ बिहार में हर साल बाढ़ आती है तो देश के कई हिस्से पानी को तरसते है। आज ही गाँव में खाना पकाने के कल लिए लकड़ी को जलाया जा रहा है, जबकि देश में जंगल तेजी से ख़त्म हो रहे है । सडको के प्रदुषण का तो हाल आप जानते ही है । खैर खतरे की घंटी बज रही है हम नही जागे तो फिर हो सकता है ,की हमें फिर जागने की नौबत ही न आये (तब तक बहुत देर हो चुकी होगी )
अब बरी है पुछल्ले की ......
अपने जवाहर सिंह झल्लू जो की बहुत प्रतिभाशाली है , उनसे पत्रकारों ने दुनिया में तेजी से बढ़ रही कार्बन डाय ओक्साइड की मात्र कम करने का सुझाव पूछा तो झल्लू जी ने कहा -" सरे पेड़ो को कटवा दो साले सभी पूरी रात कार्बन डे ओक्साइड का उत्सर्जन करते है ।
न रहेगा बांस न बजेगी बांसुरी
आजकल डेनमार्क की राजधानी कोपेनहेगन में जलवायु परिवर्तन पर १९२ देशो का विचार मंथन चल रहा है । हमारे प्रधानमंत्री महोदय भी वहां तशरीफ़ ले गये है । जहाँ अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के कारन उन्हें ट्राफिक जाम में फसना पड़ा । जैसा की हम सभी जानते है की , दुनिया में अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया जैसे देश कार्बन डाय ओक्साईड गैस का सबसे ज्यादा उत्सर्जन करते है, जिसके कारन जलवायु परिवर्तन जैसी समस्या सामने आ रही है । मगर ये देश सोचते है की इस समस्या से निपटने का सारा जिम्मा विकासशील देश ही उठाये जो की गलत ही नही बल्कि उनका गैरजिम्मेदारना रवैया दिखलाता है । खैर जैसा की पहले से ही तय लग रहा था की इस सम्मलेन से कोई हल नही निकलने वाला है । वही हो भी रहा है ।
खैर हम सरे देश वासी भी कोई बहुत जागरूक नही है। आज भी हमारे देश में पर्यावरण को लेकर कोई खास जागरूकता नही है। इसकी आगे बहुत ज्यादा जरुरत है। अगर हम जल्द ही चेते नही तो हो सकता है की हमारे देश के नक़्शे से लक्ष्यदीप और अंडमान के कई द्वीप गायब हो जाये ! हमारी जल की बर्बादी का ही नमूना ले लीजिये ॥ बिहार में हर साल बाढ़ आती है तो देश के कई हिस्से पानी को तरसते है। आज ही गाँव में खाना पकाने के कल लिए लकड़ी को जलाया जा रहा है, जबकि देश में जंगल तेजी से ख़त्म हो रहे है । सडको के प्रदुषण का तो हाल आप जानते ही है । खैर खतरे की घंटी बज रही है हम नही जागे तो फिर हो सकता है ,की हमें फिर जागने की नौबत ही न आये (तब तक बहुत देर हो चुकी होगी )
अब बरी है पुछल्ले की ......
अपने जवाहर सिंह झल्लू जो की बहुत प्रतिभाशाली है , उनसे पत्रकारों ने दुनिया में तेजी से बढ़ रही कार्बन डाय ओक्साइड की मात्र कम करने का सुझाव पूछा तो झल्लू जी ने कहा -" सरे पेड़ो को कटवा दो साले सभी पूरी रात कार्बन डे ओक्साइड का उत्सर्जन करते है ।
न रहेगा बांस न बजेगी बांसुरी
शनिवार, 19 दिसंबर 2009
किन्नरों की एतिहासिक गाथा !!
नमस्कार , मित्रो
जबसे मेरे शहर की महापौर किन्नर कमला बुआ बनी है , मैंने सोचा क्यों न इतिहास का छात्र होने के नाते आप सभी को इतिहास में किन्नरों की कुछ गाथाये सुना दू । सबसे पहले किन्न्नारो के बारे में जानकारी रामायण काल में प्राप्त होती है । जब भगवन श्री राम बनवास के लिए जा रहे थे तो उन्हें छोड़ने आये अयोध्या वासियो से उन्होंने कहा- सभी नर- नारी अब वापिस चले जाये ! तो सभी नर- नारी तो चले गये मगर किन्नर खड़े रह गये ! भगवन राम के कारन पूओछ्ने पर किन्नरों ने कहा , प्रभु आपने नर-नारियो को जाने को खा था , मगर हम तो न नर है न नारी , इसलिए हम गये नहीं। तब भगवन ने उन्हें आशीष दिया - " जाओ तुम लोग कलयुग में राज करोगे " (शायद इसीलिए शुरुआत मध्य प्रदेश से हुई है ?!)
महाभारत काल में पांडव अज्ञात वास में जब विरत नरेश के यहाँ गुप्त रूप में रह रहे थे तो अर्जुन ब्रहंल्ला नमक किन्नर बने थे , जो स्वर्ग की अप्सरा उर्वशी का श्राप था ! आगे महाभारत के युद्ध में भीष्म पितामह की मृत्यु का कारन बना शिखंडी भी किन्नर था ।
मध्यकालीन इतिहास में सल्तनत युग में प्रसिद्द सुलतान अलाउदीन खिलजी के दक्षिण अभियान का सफल नेतृत्व मालिक काफूर नामक हिजड़े ने किया था । उत्तर प्रदेश के शहर को जौनपुर को एक हिजड़े शासक ने इतना सुन्दर बनाया की इसे पूर्व का शीराज खा जाने लगा था । उत्तरवर्ती मुग़ल शासक जहांदार शाह भी एक किन्नर के प्रेम जाल में गिरफ्त था !
आगे भी कुछ इल्चास्प कहानिया है किन्नरों की बहादुरी की मगर फिर कभी ........
अब बारी पुछल्ले की
अपने जवाहर सिंह "झल्लू " एक बार चुपके से स्वर्ग में घुस रहे थे , की तभी स्वर्ग के पहरेदारों ने उन्हें देख लिया। झल्लू जी को पकड़ कर बहुत मारा ।
झल्लू जी झल्ल्ला गये और बोले सालों तुम्हारी इन्ही हरकतों के कारन कोई स्वर्ग नही आना चाहता !!! :-)
जबसे मेरे शहर की महापौर किन्नर कमला बुआ बनी है , मैंने सोचा क्यों न इतिहास का छात्र होने के नाते आप सभी को इतिहास में किन्नरों की कुछ गाथाये सुना दू । सबसे पहले किन्न्नारो के बारे में जानकारी रामायण काल में प्राप्त होती है । जब भगवन श्री राम बनवास के लिए जा रहे थे तो उन्हें छोड़ने आये अयोध्या वासियो से उन्होंने कहा- सभी नर- नारी अब वापिस चले जाये ! तो सभी नर- नारी तो चले गये मगर किन्नर खड़े रह गये ! भगवन राम के कारन पूओछ्ने पर किन्नरों ने कहा , प्रभु आपने नर-नारियो को जाने को खा था , मगर हम तो न नर है न नारी , इसलिए हम गये नहीं। तब भगवन ने उन्हें आशीष दिया - " जाओ तुम लोग कलयुग में राज करोगे " (शायद इसीलिए शुरुआत मध्य प्रदेश से हुई है ?!)
महाभारत काल में पांडव अज्ञात वास में जब विरत नरेश के यहाँ गुप्त रूप में रह रहे थे तो अर्जुन ब्रहंल्ला नमक किन्नर बने थे , जो स्वर्ग की अप्सरा उर्वशी का श्राप था ! आगे महाभारत के युद्ध में भीष्म पितामह की मृत्यु का कारन बना शिखंडी भी किन्नर था ।
मध्यकालीन इतिहास में सल्तनत युग में प्रसिद्द सुलतान अलाउदीन खिलजी के दक्षिण अभियान का सफल नेतृत्व मालिक काफूर नामक हिजड़े ने किया था । उत्तर प्रदेश के शहर को जौनपुर को एक हिजड़े शासक ने इतना सुन्दर बनाया की इसे पूर्व का शीराज खा जाने लगा था । उत्तरवर्ती मुग़ल शासक जहांदार शाह भी एक किन्नर के प्रेम जाल में गिरफ्त था !
आगे भी कुछ इल्चास्प कहानिया है किन्नरों की बहादुरी की मगर फिर कभी ........
अब बारी पुछल्ले की
अपने जवाहर सिंह "झल्लू " एक बार चुपके से स्वर्ग में घुस रहे थे , की तभी स्वर्ग के पहरेदारों ने उन्हें देख लिया। झल्लू जी को पकड़ कर बहुत मारा ।
झल्लू जी झल्ल्ला गये और बोले सालों तुम्हारी इन्ही हरकतों के कारन कोई स्वर्ग नही आना चाहता !!! :-)
मंगलवार, 15 दिसंबर 2009
न जीता कमल, न जीता पंजा! वाह रे मतदाता जीत गया छक्का !!!!
जी हाँ दोस्तों , शीर्षक सही है और मेरी मानसिक स्थिति भी अभी ठीक है। मध्य प्रदेश के सागर शहर के मतदाताओ ने महापौर (meyar) के पद के लिए एक किन्नर "कमला बुआ " को रिकॉर्ड मतों से जीताया है .जी हाँ मध्य प्रदेश में भाजपा की सरकार और केंद्र में कांग्रेस की सर्कार होने के बाद भी लोगो ने एक निर्दलीय किन्नर को भरी मतों से जिताया है । ये हाल है की , भाजपा की कमजोर स्थिति देख कर खुद मुख्यमंत्री शिवराज चौहान को आना पड़ा मगर उनकी अपील भी मतदाताओ को लुभा नही पाई । मुख्यमंत्री ने कहा था की अगर यहाँ से यदि भाजपा प्रत्याशी जीतती है , तो वे सागर को विशेष पैकेज देंगे । मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सुरेश पचौरी सागर को केंद्र सरकार से भारी अनुदान और सहायता राशि दिलाने का वादा भी कांग्रेस को तीसरे नंबर पर जाने से नही रोक पाया । गनीमत है की कांग्रेस की जमानत बच गयी। मतदान के दिन सभी मतदाता खुलकर कह रहे थे की मेरी वोट चाभी (कमला बुआ का चुनावचिंह) को गया है ।
अब प्रश्न ये उठता है की ,
आखिर मतदाता ने क्यों एक किन्नर को चुना ?
क्या कमला बुआ इतनी लोक प्रिय थी ?
क्या भाजपा और कांग्रेस के प्रत्याशी कमजोर थे ?
या फिर जनता कुछ नया चाहती थी ?
क्या लोग भाजपा के नगर निगम में लगाक्तार दस सालो के कार्यकाल से नाखुश थी ?
सबसे पहले मेरे ख्याल से जनता ने कमला बुआ किन्नर को इसलिए चुना की, वो इसके माध्यम से इन दोनों पार्टियों को ये सन्देश देना चाहती है की वो अपनी नपुंसकता को त्यागे ! अपनी जेबे तो भरे मगर विकास का भी ध्यान रखे ! ऐसा नही है की इतिहास में सिर्फ सागर से ही कोई किन्नर जीता हो , इससे पहले मध्य प्रदेश में ही कटनी से महापौर कमला मौसी और सुहागपुर से शबनम मौसी (शबनम मौसी के ऊपर इसी नाम से फिल्म भी बन चुकी है , जिसमे शमनं मौसी की भूमिका सागर के ही आशुतोष राणा ने निभाई थी )विधायक बन चुकी है । मगर इन दोनों की कोई उल्लेखनीय भूमिका नही रही .कमला मौसी कत्निमे कुछ खास नही कर पाई , शबनम मौसी ने कांग्रेस के विधायक को विधान सभा में चप्पल मारी !
मगर सागर में कमला बुआ की स्थिति जरा दूसरी है। कमला बुआ पहले से ही समाजसेविका रही है । इन्होने स्वयं अपने खर्चे से कई गरीब लड़कियों की शादी धूमधाम से कराइ है । विकलांगो की न केवल सहायता की है बल्कि उनके अधिकारों के लिए राष्ट्रिय विकलांग पार्टी का गठन किया। दैनिक भास्कर द्वारा किये गये एक टॉक शो में कमला बुआ ने जनता के गंभीर सवालो ने सटीक जवाब दिए जबकि दोनों पार्टी के उम्मीदवार हिचकिचा गये थे।
खैर आज के दिन सागर में लोग जश्न और ख़ुशी मना रहे है । दोहरी ख़ुशी ! भारत अपना पहला मैच श्री लंका से संघर्ष पूर्ण मुकाबले में जीता , और महपौर के चुनाव में कमला बुआ जीती। दोनों मुकाबले में रिकॉर्ड बने (एक में रनों का , दुसरे में मतों का ) दोनों में छक्को की भूमिका महत्वपूर्ण रही !
खैर इश्वर से दुआ है की किन्नर राजनीति में आये , मगर हमारे नेतायो विकास कर के दिखा दे की इश्वर ने भले उन्हें परपक्वता नही दी है , मगर असल में नपुंसक कौन है !
अब बारी है अपने पुछल्ले की
कमला बुआ के कुछ नारे :-
- कमल नही कमला चाहिय, पंजा नही छक्का चाहिय !
- नकली नही असली चाहिय !
- न भैया से न भाभी से , अब निगम खुलेगा चाभी से !
- जब गूंजेगी कमला की ताल , कंपेगी दिल्ली , हिलेगा भोपाल !
शुक्रिया अपनी टिपण्णी से हमारा उत्साह वर्धन करते रहिये
आपका मुकेश पाण्डेय "चन्दन"
अब प्रश्न ये उठता है की ,
आखिर मतदाता ने क्यों एक किन्नर को चुना ?
क्या कमला बुआ इतनी लोक प्रिय थी ?
क्या भाजपा और कांग्रेस के प्रत्याशी कमजोर थे ?
या फिर जनता कुछ नया चाहती थी ?
क्या लोग भाजपा के नगर निगम में लगाक्तार दस सालो के कार्यकाल से नाखुश थी ?
सबसे पहले मेरे ख्याल से जनता ने कमला बुआ किन्नर को इसलिए चुना की, वो इसके माध्यम से इन दोनों पार्टियों को ये सन्देश देना चाहती है की वो अपनी नपुंसकता को त्यागे ! अपनी जेबे तो भरे मगर विकास का भी ध्यान रखे ! ऐसा नही है की इतिहास में सिर्फ सागर से ही कोई किन्नर जीता हो , इससे पहले मध्य प्रदेश में ही कटनी से महापौर कमला मौसी और सुहागपुर से शबनम मौसी (शबनम मौसी के ऊपर इसी नाम से फिल्म भी बन चुकी है , जिसमे शमनं मौसी की भूमिका सागर के ही आशुतोष राणा ने निभाई थी )विधायक बन चुकी है । मगर इन दोनों की कोई उल्लेखनीय भूमिका नही रही .कमला मौसी कत्निमे कुछ खास नही कर पाई , शबनम मौसी ने कांग्रेस के विधायक को विधान सभा में चप्पल मारी !
मगर सागर में कमला बुआ की स्थिति जरा दूसरी है। कमला बुआ पहले से ही समाजसेविका रही है । इन्होने स्वयं अपने खर्चे से कई गरीब लड़कियों की शादी धूमधाम से कराइ है । विकलांगो की न केवल सहायता की है बल्कि उनके अधिकारों के लिए राष्ट्रिय विकलांग पार्टी का गठन किया। दैनिक भास्कर द्वारा किये गये एक टॉक शो में कमला बुआ ने जनता के गंभीर सवालो ने सटीक जवाब दिए जबकि दोनों पार्टी के उम्मीदवार हिचकिचा गये थे।
खैर आज के दिन सागर में लोग जश्न और ख़ुशी मना रहे है । दोहरी ख़ुशी ! भारत अपना पहला मैच श्री लंका से संघर्ष पूर्ण मुकाबले में जीता , और महपौर के चुनाव में कमला बुआ जीती। दोनों मुकाबले में रिकॉर्ड बने (एक में रनों का , दुसरे में मतों का ) दोनों में छक्को की भूमिका महत्वपूर्ण रही !
खैर इश्वर से दुआ है की किन्नर राजनीति में आये , मगर हमारे नेतायो विकास कर के दिखा दे की इश्वर ने भले उन्हें परपक्वता नही दी है , मगर असल में नपुंसक कौन है !
अब बारी है अपने पुछल्ले की
कमला बुआ के कुछ नारे :-
- कमल नही कमला चाहिय, पंजा नही छक्का चाहिय !
- नकली नही असली चाहिय !
- न भैया से न भाभी से , अब निगम खुलेगा चाभी से !
- जब गूंजेगी कमला की ताल , कंपेगी दिल्ली , हिलेगा भोपाल !
शुक्रिया अपनी टिपण्णी से हमारा उत्साह वर्धन करते रहिये
आपका मुकेश पाण्डेय "चन्दन"
शुक्रवार, 20 नवंबर 2009
उफ़ ! ये नई मुसीबत आ गई .....?
नमस्कार जी,
सबसे पहले सॉरी जी , इतने दिनों जो ब्लॉग जगत से जो गायब रहा । खैर कुछ परेशानिया तो आती ही रहती है। लेकिन आज मैं जो मुसीबत की बात करने वाला हूँ, वो आम नही कुछ खास है। अब अपने सीधे सादे परधन मंत्री जी की मुसीबत बढ़ गयी है, जनाब जिस अमेरिका से परमाणु समझौता करने के लिए उन्होंने अपनी सरकार तक दांव पर लगा दी। उसी अम्रीका के राष्ट्रपति ओबमाओ (ओबामा+माओ)जो शायद दिखने के लिए हनुमान जी की प्रतिमा अपने साथ रखते है, गाँधी जी की फोटू अपने ऑफिस में लगाते है, व्हाईट हाउस में दिवाली मनाते है. और चीन जाकर इंडो-पाक विवाद में चीन का हस्तक्षेप जरुरी मानते है !
खैर, हिंदुस्तान अपने मसले ख़ुद सुलझाने की समझ रखता है , बशर्ते पाक इसके लिए तैयार हो ?!
अब दुनिया दारी छोडो और मेरी एक कविता पढ़िए ......
नवजीवन
अस्त होते-होते सूर्य क्षितिज से बोला - कि तात
तनिक प्रतीक्षा और कर लेती, ये अंधकारमयी रात
आपके पुत्रो को दिवसभर दिया, ऊर्जा और प्रकाश
अभी मन भरा ही न था कि आपने दे दिया अवकाश
क्षितिज मेघ झरोखा हटाते बोला - कि वत्स
है प्रकृति का नियम यही, है हम-तुम विवश
कल तुम आना , नव ऊर्जा और शक्ति से सम्पूर्ण होके
देना इन्हे नवजीवन , कि विस्मित होके जग देखे
सब लगते निज निज कर्मो से आते ही तुम्हारे
दिवस परिश्रम से थक्के , करते आराम जाते ही तुम्हारे
नियम टूटे या न टूटे, पर मत इनको थकने देना
है आराम भी जरुरी, अब आने दो मधुरिम रैना
नवजीवन लेकर आऊंगा, अब मैं नित्य
क्षितिज से कहते-कहते, अस्त हुआ आदित्य
ये तो हुई कविता जाहिर आपको अच्छी लगी हो , और आप अपनी टिप्पणी भी देंगे ! अब बात करते है , अपने जवाहर सिंह "झल्लू" मतलब पुछल्ले की
एक बार जल्लू जी एक अमेरिकी से मिले । तो अमेरिकी ने कहा कि - मेरे यंहा इतनी स्वतंत्रता है कि आप व्हेइत हाउस के सामने खड़े होकर हमारे प्रेसिडेंट को गाली दे सकते है।
तो जल्लू जी बोले इसमे कौन सी बड़ी बात है , आप हमारे राष्ट्रपति भवन के सामने खड़े होकर भी अपने प्रेसिडेंट को गालियाँ दे सकते है !
सबसे पहले सॉरी जी , इतने दिनों जो ब्लॉग जगत से जो गायब रहा । खैर कुछ परेशानिया तो आती ही रहती है। लेकिन आज मैं जो मुसीबत की बात करने वाला हूँ, वो आम नही कुछ खास है। अब अपने सीधे सादे परधन मंत्री जी की मुसीबत बढ़ गयी है, जनाब जिस अमेरिका से परमाणु समझौता करने के लिए उन्होंने अपनी सरकार तक दांव पर लगा दी। उसी अम्रीका के राष्ट्रपति ओबमाओ (ओबामा+माओ)जो शायद दिखने के लिए हनुमान जी की प्रतिमा अपने साथ रखते है, गाँधी जी की फोटू अपने ऑफिस में लगाते है, व्हाईट हाउस में दिवाली मनाते है. और चीन जाकर इंडो-पाक विवाद में चीन का हस्तक्षेप जरुरी मानते है !
खैर, हिंदुस्तान अपने मसले ख़ुद सुलझाने की समझ रखता है , बशर्ते पाक इसके लिए तैयार हो ?!
अब दुनिया दारी छोडो और मेरी एक कविता पढ़िए ......
नवजीवन
अस्त होते-होते सूर्य क्षितिज से बोला - कि तात
तनिक प्रतीक्षा और कर लेती, ये अंधकारमयी रात
आपके पुत्रो को दिवसभर दिया, ऊर्जा और प्रकाश
अभी मन भरा ही न था कि आपने दे दिया अवकाश
क्षितिज मेघ झरोखा हटाते बोला - कि वत्स
है प्रकृति का नियम यही, है हम-तुम विवश
कल तुम आना , नव ऊर्जा और शक्ति से सम्पूर्ण होके
देना इन्हे नवजीवन , कि विस्मित होके जग देखे
सब लगते निज निज कर्मो से आते ही तुम्हारे
दिवस परिश्रम से थक्के , करते आराम जाते ही तुम्हारे
नियम टूटे या न टूटे, पर मत इनको थकने देना
है आराम भी जरुरी, अब आने दो मधुरिम रैना
नवजीवन लेकर आऊंगा, अब मैं नित्य
क्षितिज से कहते-कहते, अस्त हुआ आदित्य
ये तो हुई कविता जाहिर आपको अच्छी लगी हो , और आप अपनी टिप्पणी भी देंगे ! अब बात करते है , अपने जवाहर सिंह "झल्लू" मतलब पुछल्ले की
एक बार जल्लू जी एक अमेरिकी से मिले । तो अमेरिकी ने कहा कि - मेरे यंहा इतनी स्वतंत्रता है कि आप व्हेइत हाउस के सामने खड़े होकर हमारे प्रेसिडेंट को गाली दे सकते है।
तो जल्लू जी बोले इसमे कौन सी बड़ी बात है , आप हमारे राष्ट्रपति भवन के सामने खड़े होकर भी अपने प्रेसिडेंट को गालियाँ दे सकते है !
शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2009
लता जी ; अगले जनम मोहे बिटिया न कीजो ?!
नमस्कार,
पिछले दिनों आपने भी ये ख़बर पढ़ी सुनी होगी की लता मंगेशकर जी ने कहा - अगले जनम मोहे बिटिया न कीजो ! उनकी ये बात हमारे कई जख्म कुदेर गयी , जब लता मंगेशकर जी जिन पर सरे भारत को ही नही वल्कि समूचे विश्व को गर्व है , उनके मुह से ये बात सुन्नी पड़ रही है । मतलब आप समझ सकते है, की देश में बेटियों की क्या हालत है ?
वाह रे मेरे देश तुने अपनी बेटियों को क्यो इस हाल पे छोड़ दिया की उन्हें मजबूरन कहना पड़ रहा है - अगले जनम मोहे बिटिया न कीजो ।
आज भी हमारे देश बेटियों की हालत बद से बदतर है !
आज भी हमारे घरो में बेटियों को दोयम दर्जे का समझा जाता है !
आज भी हमारी माँ और दादी बेटियों को सलीके से रहने को कहती जबकि बेटा भले ही कैसा घूमे !
आज भी अपने हिस्से से बेटियों को ही कम दिया जाता है !
आज भी बेटियों को अपने सपनो का दम घोटना पड़ता है , क्योंकि भइया का सपना पूरा हो सके !
आज भी बेटिया पैदा होते ही पराया धन समझी जाती है !
आज भी कोई लता, कोई किरण , कोई उषा, कोई आशा, कोई कल्पना ,कोई प्रतिभा बेबस होके कहती है -अगले जनम मोहे बिटियाँ न कीजो ? !
आख़िर क्यों ?????????????????????????
गलती किसकी है ? हमारी और आपकी ही है न ?
चलो अपनी ! galti sudhare !
अब पुछल्ले की बारी .....
जैसा की आप जानते ही है की जवाहर सिंह "झल्लू" एक प्रतिभा शाली वैज्ञानिक है ।
इस बार झाल्लुजी ने नोट छपने की मशीन इजाद कर ली , लगे धडाधड नोट छपने लगे !
लेकिन एक बार गलती से १५ रूपये का नोट छप गया !
झल्लू जी ने सोचा चलो इसे किसी गाँव में चलाया जाए क्योंकि शहर में तो शायद ही कोई इसे लेगा ।
jhallu ji ek kirane ki dukaan pe gye , dukaandaar ko not diya aur kaha- ek gutkha dedo bhai .
dukaan dar ne not liya gutkha dekar bola, abhi khulle lata hoon !
jhallu ji khush !
thodi der baad dukaan dar aaya aur 7-7 ke do not dekar bola lo bhaiya aapke 14 rupye.!
jai raam ji
पिछले दिनों आपने भी ये ख़बर पढ़ी सुनी होगी की लता मंगेशकर जी ने कहा - अगले जनम मोहे बिटिया न कीजो ! उनकी ये बात हमारे कई जख्म कुदेर गयी , जब लता मंगेशकर जी जिन पर सरे भारत को ही नही वल्कि समूचे विश्व को गर्व है , उनके मुह से ये बात सुन्नी पड़ रही है । मतलब आप समझ सकते है, की देश में बेटियों की क्या हालत है ?
वाह रे मेरे देश तुने अपनी बेटियों को क्यो इस हाल पे छोड़ दिया की उन्हें मजबूरन कहना पड़ रहा है - अगले जनम मोहे बिटिया न कीजो ।
आज भी हमारे देश बेटियों की हालत बद से बदतर है !
आज भी हमारे घरो में बेटियों को दोयम दर्जे का समझा जाता है !
आज भी हमारी माँ और दादी बेटियों को सलीके से रहने को कहती जबकि बेटा भले ही कैसा घूमे !
आज भी अपने हिस्से से बेटियों को ही कम दिया जाता है !
आज भी बेटियों को अपने सपनो का दम घोटना पड़ता है , क्योंकि भइया का सपना पूरा हो सके !
आज भी बेटिया पैदा होते ही पराया धन समझी जाती है !
आज भी कोई लता, कोई किरण , कोई उषा, कोई आशा, कोई कल्पना ,कोई प्रतिभा बेबस होके कहती है -अगले जनम मोहे बिटियाँ न कीजो ? !
आख़िर क्यों ?????????????????????????
गलती किसकी है ? हमारी और आपकी ही है न ?
चलो अपनी ! galti sudhare !
अब पुछल्ले की बारी .....
जैसा की आप जानते ही है की जवाहर सिंह "झल्लू" एक प्रतिभा शाली वैज्ञानिक है ।
इस बार झाल्लुजी ने नोट छपने की मशीन इजाद कर ली , लगे धडाधड नोट छपने लगे !
लेकिन एक बार गलती से १५ रूपये का नोट छप गया !
झल्लू जी ने सोचा चलो इसे किसी गाँव में चलाया जाए क्योंकि शहर में तो शायद ही कोई इसे लेगा ।
jhallu ji ek kirane ki dukaan pe gye , dukaandaar ko not diya aur kaha- ek gutkha dedo bhai .
dukaan dar ne not liya gutkha dekar bola, abhi khulle lata hoon !
jhallu ji khush !
thodi der baad dukaan dar aaya aur 7-7 ke do not dekar bola lo bhaiya aapke 14 rupye.!
jai raam ji
शनिवार, 10 अक्टूबर 2009
सब गड़बड़ है पर नो प्रोब्लम !!
भइया अब तो हद हो गयी ! नोबल वाले का सठिया गये जो मात्र ०९ माह के कार्यकाल में ओबामा उन्हें शान्ति के मसीहा नजाए आ गये ! हमें तो ठीक ख़ुद ओबामा को भी हैरानी हो गयी , की ससुरा कुछ बहुतै जल्दी नही हो गया !
हमारे राष्ट्रपिता गाँधी जी का पॉँच बार नोबल शान्ति के लिए नामांकन हुआ , पर नोबल समिति वालो को वो इस पुरूस्कार के लायक नही लगे , उनके चेलो तक को नोबल शान्ति मिला (नेल्सन मंडेला, अंग सन सू की , मार्टिन लूथर किंग आदि ) , चलो कोई बात नही पर गाँधी के नये चेले ने ऐसा क्या गुल खिला दिया की नोबल वाले उन पर मोहित हो गये । भइया कुछ गड़बड़ जरुर है !!
सुना था की अपने इहाँ कुछ फिल्मी कलाकार अवार्ड फंक्सन में फिक्सिंग करके अवार्ड ले जाते थे ! मगर दुनिया के सबसे बड़े और निष्पक्ष पाने जाने वाले नोबल में ऐसा होगा ........................
देश के दक्षिणी इलाको में बाढ़ का कहर जारी है, लाखो लोग बेघर हो गये है , हजारो अनाथ , सैकडो काल के गाल में समा गये है। केन्द्र सरकार ने १००० करोड़ रु० की सहायता की घोषणा की है, मेरा आप सभी से करबद्ध निवेदन है की इस संकट की घडी में हमारे बाढ़ पीड़ित भाई बहनों की सहायता जरुर करे , साथ ही साथ अन्य लोगो को भी सहायता करने के लिए प्रेरित करे ।
मेरा मानना है की इस बार दिवाली सादगी से मानकर हम अपने भाई बहनों की सहायता के लिए आराम से पैसे जोड़ सकते है। हाँ इस बार उन लोगो के लिए भी कुछ दिए जरुर जलाये जो इस बार दिवाली नही मन पाएंगे ।
मेरे मन में विश्वास है की आप मेरी बात जरुर मानेंगे । अरे-----रे रे , सॉरी एक बात मैं भूल ही गया की ये मेरी हाफ सेंचुरी यानि पचासवी पोस्ट है ! आज से अपनी पोस्ट में एक न्य आयटम जोड़ रहा हूँ जिसका नाम दिया है मैंने पुछल्ला , इस में अपनी बात के आख़िर में एक गुदगुदाती सी बात कहने की कोशिश करूँगा। अगर पुछल्ला पसंद आए तो सूचित जरुर करे। तो पेश है आज का पुछल्ला
एक नए नवेले वैज्ञानिक (प्रतिभाशाली ) जवाहर सिंह 'झल्लू' ने न्यूटन के गति के तीन नियमो में अपना एक नया चौथा नियम जोड़ा है।
" लूज मोशन कभी भी स्लो मोशन में नही होता है "
हमारे राष्ट्रपिता गाँधी जी का पॉँच बार नोबल शान्ति के लिए नामांकन हुआ , पर नोबल समिति वालो को वो इस पुरूस्कार के लायक नही लगे , उनके चेलो तक को नोबल शान्ति मिला (नेल्सन मंडेला, अंग सन सू की , मार्टिन लूथर किंग आदि ) , चलो कोई बात नही पर गाँधी के नये चेले ने ऐसा क्या गुल खिला दिया की नोबल वाले उन पर मोहित हो गये । भइया कुछ गड़बड़ जरुर है !!
सुना था की अपने इहाँ कुछ फिल्मी कलाकार अवार्ड फंक्सन में फिक्सिंग करके अवार्ड ले जाते थे ! मगर दुनिया के सबसे बड़े और निष्पक्ष पाने जाने वाले नोबल में ऐसा होगा ........................
देश के दक्षिणी इलाको में बाढ़ का कहर जारी है, लाखो लोग बेघर हो गये है , हजारो अनाथ , सैकडो काल के गाल में समा गये है। केन्द्र सरकार ने १००० करोड़ रु० की सहायता की घोषणा की है, मेरा आप सभी से करबद्ध निवेदन है की इस संकट की घडी में हमारे बाढ़ पीड़ित भाई बहनों की सहायता जरुर करे , साथ ही साथ अन्य लोगो को भी सहायता करने के लिए प्रेरित करे ।
मेरा मानना है की इस बार दिवाली सादगी से मानकर हम अपने भाई बहनों की सहायता के लिए आराम से पैसे जोड़ सकते है। हाँ इस बार उन लोगो के लिए भी कुछ दिए जरुर जलाये जो इस बार दिवाली नही मन पाएंगे ।
मेरे मन में विश्वास है की आप मेरी बात जरुर मानेंगे । अरे-----रे रे , सॉरी एक बात मैं भूल ही गया की ये मेरी हाफ सेंचुरी यानि पचासवी पोस्ट है ! आज से अपनी पोस्ट में एक न्य आयटम जोड़ रहा हूँ जिसका नाम दिया है मैंने पुछल्ला , इस में अपनी बात के आख़िर में एक गुदगुदाती सी बात कहने की कोशिश करूँगा। अगर पुछल्ला पसंद आए तो सूचित जरुर करे। तो पेश है आज का पुछल्ला
एक नए नवेले वैज्ञानिक (प्रतिभाशाली ) जवाहर सिंह 'झल्लू' ने न्यूटन के गति के तीन नियमो में अपना एक नया चौथा नियम जोड़ा है।
" लूज मोशन कभी भी स्लो मोशन में नही होता है "
सोमवार, 21 सितंबर 2009
कुछ बचपन की यादें, शायद आपके साथ भी ऐसा हुआ हो !
दोस्तों , बचपन बहुत ही निराला होता है । न कोई चिंता , न कोई फिकर बस अपने में मस्त ! मेरी इस बात से आप सभी सहमत होंगे ? हर किसी के बचपन की तरह मेरा बचपन भी बड़ा ही सुंदर रहा । मेरे बचपन की बड़ी प्यारी सी याद आपसे बांटने का जी कर रहा है । मेरा जन्म जरूर बिहार के बक्सर जिले में हुआ मगर चार साल की उम्र के बाद मैं सागर (म०प्र०) में ही खेला कूदा हूँ ।
मैं जिस कसबे में रहता था वहां हर साल कसबे के लोगो के द्वारा दशहरा के समय रामलीला खेली जाती थी । मेरे उम्र के भी कई बच्चे भी रामलीला में भाग लेते थे । मुझे भी राम लीला देखने में मजा आता और उसमे भाग लेने का मन करता था। कई बार कोशिश की मगर कोई फायदा नही हुआ । मुझे किसी पत्र के लायक नही समझा गया । पर अपनी किस्मत भी जोरदार थी , एक जब दशहरा के दिन रावन बध का मंचन होना था । रामलीला का यह प्रसंग देखने दूर दूर के गांवों से लोग आए थे । राम-हनुमान में जोरदारhओ रही थी । मैं रामलीला के प्रबंधक के यहाँ हर दिन की तरह एक आशा के साथ पंहुचा । मगर आज तो गजब हो गया इस विशेष दिन मुझे वानर सेना के एक वानर के रोल के लिए चुना गया। मैं स्वाभाविक रूप से बड़ा खुश !!
अब रामलीला शुरू राम और हनुमान के बीच युद्ध प्रारम्भ :
मैं मुह में लाल रंग पोते हाफपेंट लाल रंग के पहने और पीछे छोटी सी पुँछ लगाये मंच पर जेश्रीराम चिल्लाते हुए आया । मैं मन में सोच रहा था की शायद मेरा मुकाबला महाबली रावन से होगा । अपनी इस उपलब्धि पर मैं इतना खुश था , की शायद रामायण सीरियल के बानर भी इतने न हुए होंगे !
पर ये क्या हो गया !!
मेरे मंच पर आते ही विशालकाय शरीर वाले बड़ी मूछो वाले दुष्ट रावन ने अट्टहास किया -
हीही हां हा हा और मैं छोटा सा बानर कुछ डर सा गया ! फ़िर रावन मेरी तरफ़ लपका ...... मैं डर के मरे मंच के पीछे भगा ........ मगर बलिष्ट दुष्ट रावन ने मुझे पकड़ लिया । सरे दर्शक हस हस के लोट पोत हो रहे थे , मगर मेरी हाफ पेंट गीली हो रही थी !!
.....मैं मम्मी मम्मी चिल्लाया मगर उस दुष्ट को तरस न आया !......उसने मुझे उठाया ......और .......और....... फ़िर उठाकर हनुमान की तरफ़ फेक दिया ....हनुअमान ने लपका ... दर्शको ने जोरदार ताली बजाई । मुझे नानी याद आई ..... हनुमान जी ने भी गुस्सा दिखाया और ..... हाय ! मेरी फूटी किस्मत ........हनुमान जी ने भी मुझे लपक के रावन की ओरफेंका ....... संकट मोचन मेरे लिए संकट दायक हो गये!! ..... फ़िर रावन ने लपका ....फेका ... हनुमान ...लपका ..... फेका.... रावन ...... हनुमान .......रावन ......हनुमान ......रावन ........फ़िर अचानक रावन ने लपकने में ढील की मैं धडाम से नीचे गिरा... ... जान बची तो लाखो पाए !....... मैंने फ़िर आव देखा न तव ........फ़िर ऐसे भगा की सीधे अपने घर जाकर ही रुका !
हूउह अरे भाई साँस तो ले लेने दो ......जेश्रीराम
अब बस आज थक गया हूँ । अभी जब जब दशहरा आता है, या तेलेविसन पर रामायण चलती है तो मेरे रोंगटे खड़े हो जाते है !!
तब से मैंने कभी रामलीला नही देखि !
आखिर में बचपन में खेली ज्ञऐ कुछ खेलो की लीने शायद आपने भी ये खेले हो ?
आजकल के होनहार तो कम्पूटर और मोबाईल से ही काम चला लेते है । जे जे ....
1.) मछली जल की रानी है,जीवन उसका पानी है।हाथ लगाओ डर जायेगीबाहर निकालो मर जायेगी।
2.) पोशम्पा भाई पोशम्पा,सौ रुपये की घडी चुराई।अब तो जेल मे जाना पडेगा,जेल की रोटी खानी पडेगी,जेल का पानी पीना पडेगा।थै थैयाप्पा थुशमदारी बाबा खुश।
3.) झूठ बोलना पाप है,नदी किनारे सांप है।काली माई आयेगी,तुमको उठा ले जायेगी।
4.) आज सोमवार है,चूहे को बुखार है।चूहा गया डाक्टर के पास,डाक्टर ने लगायी सुई,चूहा बोला उईईईईई।
5.) आलू-कचालू बेटा कहा गये थे,बन्दर की झोपडी मे सो रहे थे।बन्दर ने लात मारी रो रहे थे,मम्मी ने पैसे दिये हंस रहे थे।
6।) तितली उडी, बस मे चढी।सीट ना मिली,तो रोने लगी।।driver बोला आजा मेरे पास,तितली बोली " हट बदमाश "।
7.) चन्दा मामा दूर के,पूए पकाये भूर के।आप खाएं थाली मे,मुन्ने को दे प्याली में
क्यों आपको भी अपना बचपन याद आया की नही ? सही बताना !
मैं जिस कसबे में रहता था वहां हर साल कसबे के लोगो के द्वारा दशहरा के समय रामलीला खेली जाती थी । मेरे उम्र के भी कई बच्चे भी रामलीला में भाग लेते थे । मुझे भी राम लीला देखने में मजा आता और उसमे भाग लेने का मन करता था। कई बार कोशिश की मगर कोई फायदा नही हुआ । मुझे किसी पत्र के लायक नही समझा गया । पर अपनी किस्मत भी जोरदार थी , एक जब दशहरा के दिन रावन बध का मंचन होना था । रामलीला का यह प्रसंग देखने दूर दूर के गांवों से लोग आए थे । राम-हनुमान में जोरदारhओ रही थी । मैं रामलीला के प्रबंधक के यहाँ हर दिन की तरह एक आशा के साथ पंहुचा । मगर आज तो गजब हो गया इस विशेष दिन मुझे वानर सेना के एक वानर के रोल के लिए चुना गया। मैं स्वाभाविक रूप से बड़ा खुश !!
अब रामलीला शुरू राम और हनुमान के बीच युद्ध प्रारम्भ :
मैं मुह में लाल रंग पोते हाफपेंट लाल रंग के पहने और पीछे छोटी सी पुँछ लगाये मंच पर जेश्रीराम चिल्लाते हुए आया । मैं मन में सोच रहा था की शायद मेरा मुकाबला महाबली रावन से होगा । अपनी इस उपलब्धि पर मैं इतना खुश था , की शायद रामायण सीरियल के बानर भी इतने न हुए होंगे !
पर ये क्या हो गया !!
मेरे मंच पर आते ही विशालकाय शरीर वाले बड़ी मूछो वाले दुष्ट रावन ने अट्टहास किया -
हीही हां हा हा और मैं छोटा सा बानर कुछ डर सा गया ! फ़िर रावन मेरी तरफ़ लपका ...... मैं डर के मरे मंच के पीछे भगा ........ मगर बलिष्ट दुष्ट रावन ने मुझे पकड़ लिया । सरे दर्शक हस हस के लोट पोत हो रहे थे , मगर मेरी हाफ पेंट गीली हो रही थी !!
.....मैं मम्मी मम्मी चिल्लाया मगर उस दुष्ट को तरस न आया !......उसने मुझे उठाया ......और .......और....... फ़िर उठाकर हनुमान की तरफ़ फेक दिया ....हनुअमान ने लपका ... दर्शको ने जोरदार ताली बजाई । मुझे नानी याद आई ..... हनुमान जी ने भी गुस्सा दिखाया और ..... हाय ! मेरी फूटी किस्मत ........हनुमान जी ने भी मुझे लपक के रावन की ओरफेंका ....... संकट मोचन मेरे लिए संकट दायक हो गये!! ..... फ़िर रावन ने लपका ....फेका ... हनुमान ...लपका ..... फेका.... रावन ...... हनुमान .......रावन ......हनुमान ......रावन ........फ़िर अचानक रावन ने लपकने में ढील की मैं धडाम से नीचे गिरा... ... जान बची तो लाखो पाए !....... मैंने फ़िर आव देखा न तव ........फ़िर ऐसे भगा की सीधे अपने घर जाकर ही रुका !
हूउह अरे भाई साँस तो ले लेने दो ......जेश्रीराम
अब बस आज थक गया हूँ । अभी जब जब दशहरा आता है, या तेलेविसन पर रामायण चलती है तो मेरे रोंगटे खड़े हो जाते है !!
तब से मैंने कभी रामलीला नही देखि !
आखिर में बचपन में खेली ज्ञऐ कुछ खेलो की लीने शायद आपने भी ये खेले हो ?
आजकल के होनहार तो कम्पूटर और मोबाईल से ही काम चला लेते है । जे जे ....
1.) मछली जल की रानी है,जीवन उसका पानी है।हाथ लगाओ डर जायेगीबाहर निकालो मर जायेगी।
2.) पोशम्पा भाई पोशम्पा,सौ रुपये की घडी चुराई।अब तो जेल मे जाना पडेगा,जेल की रोटी खानी पडेगी,जेल का पानी पीना पडेगा।थै थैयाप्पा थुशमदारी बाबा खुश।
3.) झूठ बोलना पाप है,नदी किनारे सांप है।काली माई आयेगी,तुमको उठा ले जायेगी।
4.) आज सोमवार है,चूहे को बुखार है।चूहा गया डाक्टर के पास,डाक्टर ने लगायी सुई,चूहा बोला उईईईईई।
5.) आलू-कचालू बेटा कहा गये थे,बन्दर की झोपडी मे सो रहे थे।बन्दर ने लात मारी रो रहे थे,मम्मी ने पैसे दिये हंस रहे थे।
6।) तितली उडी, बस मे चढी।सीट ना मिली,तो रोने लगी।।driver बोला आजा मेरे पास,तितली बोली " हट बदमाश "।
7.) चन्दा मामा दूर के,पूए पकाये भूर के।आप खाएं थाली मे,मुन्ने को दे प्याली में
क्यों आपको भी अपना बचपन याद आया की नही ? सही बताना !
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