भोजपुरी कविता लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
भोजपुरी कविता लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

गुरुवार, 24 मई 2012

आई जेठ की दुपहरी

झुलसते से पेड़ खड़े हो जाते   , आई जेठ की दुपहरी 
 पंछी भी निश्वास  हो जाते , आई जेठ की दुपहरी 
आसमान से मनो बरस रहे हो, आग के गोले 
ताप इतना है, कि लगे सूर्य अनलकोष होले 
नंदिनी गाय पेड़ टेल बैठी, पर वहां भी आराम  कहाँ 
भूरी कुतिया जीभ निकाले ,ढूँढती मानो शाम कहाँ
ताल-नदी सब सूखे, कालू कुआ ढूंढ रहा है पानी 
सांवली भैंस कीचड़ से लथपथ. सबसे ज्यादा उसे परेशानी 
हवा भी बहती नही , मिले कैसे गर्मी से छुटकारा 
अब जाये कहाँ सब, जल रहा है जग सारा 
पुसी बिल्ली आराम फरमाती , छोड़ चूहों कि चिंता 
सब चुपचाप दुबके , पंख न फैलाये कोई परिंदा 
सारा तन पसीना से नहाये,आई जेठ की दुपहरी 
सब जन है अलसाये , आई जेठ की दुपहरी      
 - मुकेश पाण्डेय "चन्दन"

गुरुवार, 18 फ़रवरी 2010

न दिल में हो दूरी

कविता: न दिल में हो कौनो दूरी

लईकी- ऐसन कौन बात बा तहार भजपुरी में
कि काल्ह दुनिया बोली, एकरा के मजबूरी में
लईका -यु० पी० , बिहार के संस्कृति ह ,बड़ा नीक भाषा
दुनिया भर फैलल बा, न ह कौनो तमाशा
राज काज से लेके मनोरंजन तक बा एकरे ही चर्चा
आम आदमी के बानी ह , प्रेम मिलेला बिन खर्चा
गंगा -गंडक ,सोन-घाघरा, सब मिल के डेली आशीष
प्रेम के बोली ह, नईखे एकरा में कौनो खीस
राम, बुद्ध, महावीर के भूमि, देला शांति के सन्देश
हो कतनो बोली, भाषा, भेष , सबके ह ई भारत देश
एगो भज्पुरिया पहले हिन्दुस्तानी ह, फिर यु०पी० बिहारी
मानवता ही धरम हमनी के, करम भी ह हितकारी
बतावा, कैसे न फैले दुनिया में भजपुरी
सबमे हो प्रेम भरल , न हो दिल में कौनो दूरी

orchha gatha

बेतवा की जुबानी : ओरछा की कहानी (भाग-1)

एक रात को मैं मध्य प्रदेश की गंगा कही जाने वाली पावन नदी बेतवा के तट पर ग्रेनाइट की चट्टानों पर बैठा हुआ. बेतवा की लहरों के एक तरफ महान ब...