

जिन्दगी ने मुझसे कहा- तू चाहता क्या है ?
मैंने कहा- तू ही मेरी चाहत , तुझसे दिल लगाना चाहता हूँ
तू औरो को आजमाती है, मैं तुझे आज़माना चाहता हूँ
जिन्दगी- इतनी आसान नही मैं, जितना तुम समझ बैठे
मेरी चाहत में न जाने कितने , मौत को गले लगा बैठे
मैं- गर तू आसन होती , तो मेरी चाहत न होती
मौत तो मिलेगी ही, उससे कहाँ राहत होती ?
मौत तो मंजिल है , मगर सफ़र तो तू है
दिल्लगी न समझना , ये इश्क की खुशबू है
जिन्दगी- मेरे सफ़र में, सब इश्क जाओगे भूल
कोई खुशबु नही यहाँ , न ही कोई है फूल
मैं- होगा ये तुम्हारा नजरिया ,पर तुम बहुत खूबसूरत हो
लाख समझाओ मुझे, पर तुम मेरी जरुरत हो
जिन्दगी- मैं असीम हूँ, जैसे कोई सागर
मिल भी गयी , तो करोगे क्या मुझे पाकर
मैं-तुम्हारे सहारे, बहुत से नज़रिए बदलने है
बहुतो की जिन्दगी में , "चन्दन " के फूल खिलने है !
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ab apki baari hai, kuchh kahne ki ...