मंगलवार, 24 अक्तूबर 2017

ओरछा का सुन्दर पक्षी संसार

मानव के मन को पक्षी हमेशा से आकर्षित करते रहे है।  इन्ही पक्षियों को देखकर मानव ने उड़ने के स्वप्न देखे जो आज हवाई जहाज , हेलीकाप्टर आदि के रूप में साकार हुए है।  पक्षियों को लेकर साहित्य में न जाने कितने काव्य और कहानियां लिखी गयी।  भारत में कविता का उदय बाल्मीकि क द्वारा क्रोच पक्षी को देखकर ही तो हुआ था।  तोता-मैना की कहानिया सदियों तक लोगो का मन बहलाती रही।  कबूतरों ने सन्देश वाहको का कार्य किया तो बाज़ शिकार में सहायक हुए।  तोते का महत्त्व भारतीय माइथोलॉजी में कितना है , कि एक ऋषि का नाम ही शुक देव मुनि है।  भगवान राम की सहायता भी जटायु नामक गिद्ध ने की।  काकभुशुण्डि के रूप में कौए इ ऋषि का स्थान पाया।  कृष्ण ने तो मयूरपंख को शिरोधार्य किया।  हमारे देवी देवताओं ने  वाहन के रूप में पक्षियों का साथ पसंद किया।  जहाँ सरस्वती माता ने हंस , लक्ष्मी जी ने उल्लू , कार्तिकेय ने मयूर तो शनि देव ने कबूतर को अपना वाहन बनाया।  जब पक्षियों को देवताओं ने इतना चाहा है , तो हम मनुष्य पीछे क्यों रहे ? आज मैं आपको ओरछा अभ्यारण्य में पाए जाने वाले रंग-बिरंगे पक्षियों से मिलवाता हूँ। 
                                                   ओरछा वैसे तो रामराजा मंदिर के साथ ही अपनी ऐतिहासिक विरासत के लिए देश-विदेश में ज्यादा प्रसिद्द है।  लेकिन  ओरछा वन्यजीव अभ्यारण्य में पक्षी प्रेमियों के लिए भी यह कम महत्वपूर्ण स्थल नहीं है।  यहां देशी पक्षियों के अतिरिक्त प्रवासी पक्षी भी देखने मिल जाते है।  तो चलिए आज आपको ओरछा के पक्षी परिवार से मिलवाते है।
गिद्ध की परवाज़ 

ओरछा अभ्यारण्य 
ओरछा अभ्यारण मध्यप्रदेश के टीकमगढ़ जिले में उत्तर प्रदेश की सीमा से लगा हुआ है । यह अभ्यारण बेतवा और जामनी नदी के बीच में स्थित टापू पर बसा हुआ है । दोनों नदियों के बीच में होने के कारण पूरा अभ्यारण्य वेटलैंड है , इस कारण  यहां पक्षियों के लिए आदर्श वातावरण है।  यह लगभग 45  वर्ग किलोमीटर के क्षेत्रफल में स्थापित है । इसकी स्थापना 1994 में की गई थी । ओरछा अभ्यारण्य में सियार ,लकड़बग्घा ,भेड़िया ,नीलगाय ,सांभर ,चीतल ,बंदर ,लंगूर ,जंगली सूअर आदि वन्य जीव है । परंतु ओरछा अभ्यारण मुख्यतः पक्षियों के लिए प्रसिद्ध है । यहां देश विदेश से पक्षी प्रेमी सर्दियों में पक्षियों को देखने और उनकी फोटोग्राफी करने के लिए आते हैं ।

छतरियों पर आराम करते गिद्ध 
अभ्यारण्य में पायें जाने वाले पक्षी
ओरछा में लगभग 200 प्रजाति के पक्षी पाये जाते हैं, जिनमे प्रमुख हैं । कार्मोरेंट, डार्टर , ग्रे हेरॉन, पोंड हेरॉन , एरगेट , ब्रह्मिनी डक , बार-हेडेड गूज , ब्लैक विंग्ड काइट , शिकरा ,ईगल , वाइट ब्रेस्टेड वाटरमेन , जकाना ,कॉमन ग्रे हॉर्नबिल,  कॉपर स्मिथ बारबेट, कॉमन स्वालो रेड रेमपेड, गोल्डन ओरियल, ग्रे वैगटेल, दूधराज, मोर ,बुलबुल ,नीलकंठ, किंगफिशर, जल मुर्गी ,बगुला ,गौरैया, बयां ,रॉबिन ,बबलर ,कठफोड़वा, मैना ,पहाड़ी मैना, हुदहुद, हॉक कुक्कू, कोयल, पपीहा, तोता, सनबर्ड ,उल्लू, चील ,बाज़ आदि पक्षी प्रमुख रूप से पाए जाते हैं ।
कॉमन स्टोन चैट 

ओरछा में गिद्ध
 ओरछा प्रमुख रुप से गिद्धों के लिए प्रसिद्ध है । ओरछा की ऐतिहासिक इमारतों के शिखर गिद्धों क रहने के लिए उपयुक्त जगह है।  इसलिए ओरछा में छतरिया , जहांगीर महल के गुम्बद और चतुर्भुज मंदिर का शिखर गिद्धों के प्रिय आवास स्थल है।   एक तरफ जहां पूरी दुनिया में गिद्ध  खत्म हो रहे हैं ,वही ओरछा में चार प्रजाति के गिद्ध पाए जाते हैं ।
लॉन्ग बिल्ड वल्चर का जोड़ा 

1 लांग बिल्ड वल्चर (gyps indicus )
भारत में सबसे ज्यादा पाए जाने वाले गिद्धों में लौंग बिल्ड वल्चर है।  यह ओरछा में स्थित ऐतिहासिक इमारतों और पहाड़ों की कंदराओं में पाए जाते हैं । यह ज्यादा तर लंबी उड़ान भरते हैं और जमीन पर धीरे-धीरे बतख की तरह चलते हैं और झुक कर बैठते हैं । इनके पैरों की ऊपरी भाग पर सफेद व नर्म पंख होते हैं । नंगी एवं पंख रहित गर्दन के निचले हिस्से पर नरम हल्के भूरे श्वेत पंखों की कॉलर सी होती है। नर और मादा एक समान होते हैं ।
गोबर गिद्ध या कॉल गिद्ध 
2 गोबर गिध्द या कोल गिद्ध ( Neophron percnopterus /Egyptian culture)
यह गिद्ध अपने घोंसले चट्टानों पेड़ों और पुराने भवनों पर बनाता है । यह डील से आकार में मिलता जुलता है इसके पंख सफेद होते हैं जो किनारों पर काले होते हैं । चेहरा छोटा रोंएदार और पीले रंग का होता है सोच बदली पीलिया ग्रे रंग की होती है । बच्चे काले रंग के होते हैं ।
3 चमड़ गिद्ध/भारतीय सफेद गिद्ध (Oriental white backed Vulture)
रात्रि निवास ऊंचे वृक्षों और ऊंची ऐतिहासिक इमारतों में करने वाला इस गिद्ध का सर्वप्रमुख भी हुआ गला पतला होता है पीठ पर एक सफेद चिन्ह रहता है, जो उड़ते समय दिखाई देता है यही इसकी मुख्य पहचान है ।
4 राज गिद्ध/किंग वल्चर (Red headed Vulture )
इसका सिर टांग गर्दन और सीना लाल रंग के होते हैं । लाल और काली पंखों के बीच सफेद पंखों की पट्टी होती है, शेष शरीर काला होता है । यह दूसरे गिद्धों की तुलना में डरपोक होता है यह मृत जानवर भी बाकी गिद्धों के जाने के बाद खाते हैं और मनुष्यों को देखकर उड़ जाते हैं ।
वाइट ब्रेस्टेड किंगफ़िशर 

ओरछा में बर्ड वॉचिंग के लिए व्यवस्था -
ओरछा अभ्यारण्य के प्रभारी रेंजर आशुतोष अग्निहोत्री ने बताया कि अभ्यारण में वर्ड वाचिंग के लिए अलग से जंतुर टावर बनाया गया है, जिसके ऊपर खड़े होकर अभ्यारण में मिलने वाले विभिन्न पक्षियों को ना केवल देखा जा सकता है बल्कि उनकी फोटोग्राफी भी की जा सकती है । यहां पर कई पक्षी प्रेमी दूरबीन की सहायता से घंटो पक्षियों को निहारते हैं । पक्षियों को देखने के लिए ओरछा अभ्यारण कार्यालय से दूरबीन की भी व्यवस्था की जाती है । ओरछा में गिद्धों के संरक्षण के लिए जटायु संरक्षण केंद्र भी स्थापित किया है , जो गिद्ध संरक्षण के लिए समय -समय पर जान जागरूकता फैलाता है।  भविष्य में गिद्धों के लिए ' वल्चर रेस्टोरेंट ' बनाया जाना प्रस्तावित है , जिसमे एक नियत स्थान पर आसपास के गाँवो में मरे पशुओं को लेकर गिद्धों के लिए रखा जायेगा। यदि कोई भी पर्यटक या पक्षी प्रेमी अभ्यारण्य केंद्र से संपर्क करता है , तो अभ्यारण्य की ओर से एक वनरक्षक कम गाइड भी उपलब्ध कराया जा सकता है।  पक्षियों को देखने का सबसे बढ़िया समय सूर्योदय के थोड़े पहले और सूर्यास्त के समय का है।   
स्थानीय पक्षी प्रेमी रामा मुकेश केवट ने बताया की ओरछा अभ्यारण जो कि दोनों ओर से बेतवा और जामिनी नदियों से घिरे होने के कारण पक्षियों को देखने के लिए एक आदर्श स्थान हैं । ओरछा अभ्यारण्य के अलावा ओरछा में पक्षी पुराने स्मारकों और महलों के शिखरों पर भी देखने मिलते है।  रामा मुकेश स्वयं अभी तक ओरछा में लगभग 135 पक्षियों की पहचान कर चुके हैं और उनके संग्रह में उनकी फोटोग्राफ्स भी हैं ।
बयाँ अपने सुन्दर घोंसले के साथ 
ब्लू रॉक पिजन 

कॉमन मैना 

रोज रिंग्ड पैराकीट 
एशियाई पाइड स्टर्लिंग 

लार्ज एर्गेट 
ओरिएण्टल मैगपिगी रोबिन 
ओरछा पहुंचने के लिए नजदीकी बड़ा शहर झांसी है, जो संपूर्ण देश में सड़क और रेल मार्गों से जुड़ा हुआ है ओरछा से झांसी की दूरी मात्र 18 किलोमीटर है । इसके अलावा ओरछा में रामराजा मंदिर कई ऐतिहासिक इमारतें बेतवा नदी में रिवर राफ्टिंग कयाकिंग नौकायन आदि कि सुविधाएं भी देशी विदेशी पर्यटकों को आकर्षित करती हैं ।

- मुकेश पाण्डेय
आबकारी कार्यालय ,GT -2  राजघाट कॉलोनी ,
ओरछा , जिला -टीकमगढ़ (मध्य प्रदेश )
मोबाइल नंबर  9039438781
ईमेल - mp 5951 @gmail.com 

34 टिप्‍पणियां:

  1. वाह...पांडेय जी रोचक जानकारी।ओरछा को पर्यटन के नक्शे पर स्थापित करने का आपका प्रयास भी सराहनीय है।

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  2. आपकी नजरों से ओरछा के कोने-कोने की खुबसूरती देखने को मिल रही है पांडेयजी। पक्षियों की विस्तृत जानकारी अच्छी लगी।

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    1. आभार , कभी आइए तो पता चलेगा कि ओरछा कितना खूबसूरत है ।

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  3. बढ़िया पोस्ट । आपको इनके (पक्षियों के ) नाम कैसे याद रहते हैं

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    1. जो पक्षी अक्सर दिखते रहते है, उनके तो नाम याद रहते है । बाकी के लिए सलीम अली साहब की पुस्तक का सहारा ले लेते है ।

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  4. ओरछा अभ्यारण और वहां के जीव जन्तुओ और पक्षियों के बारे में बढ़िया पोस्ट....

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  5. वाह । आपने पहले इतने पक्षियों का नाम लिख दिए जितना पता नही था और दुसरा गिद्ध पक्षियों का प्रकार । आपने पहले भी स्व श्रीमती इंदिरा गांधी जी को पक्षियों के लगाव से संबंधित पोस्ट था, जो बेहद अच्छा लगा था ।

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    1. इंदिरा गांधी वाली तो कोई पोस्ट नही लिखी !

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  6. ओरछा में बहुत सारे गिद्ध एक साथ देखे थे
    विलुप्ति की ओर अग्रसर....

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  7. किले के रंग से मिलते हुए रंग के पक्षीराज गिद्घों को देखने का मौका मिला था , घुम्मकड़ी दिल से की मिलन समाहरो के दौरान ।
    बाकि सबसे के बारे में जानकारी देने के लिए धन्यवाद ।
    दिल से

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  8. आपकी इस पोस्ट को आज की बुलेटिन 1850वीं ब्लॉग बुलेटिन - आर. के. लक्ष्मण में शामिल किया गया है। कृपया एक बार आकर हमारा मान ज़रूर बढ़ाएं,,, सादर .... आभार।।

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  9. इतना समझ मे नही आता पक्षियों के बारे में...पर आपने बहुत अच्छा लिखा और दिखाया कुछ कुछ समझने की कोशिश भी की...बढ़िया पोस्ट

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  10. वाह.. आपके द्वारा किया गया पक्षियों पर रिसर्च साफ साफ दिख रहा है। यह ऐतिहासिक शहर ओरछा का एक और पहलू है जो पर्यटकों के लिए उतना ही महत्वपूर्ण है जितना इसके महल, हवेली और छतरियाँ.. ओरछा के सभी पहलुओं से हमे परिचित कराने के लिए धन्यवाद।

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  11. यहाँ के पक्षियों आपके माध्यम से दस्तावेजीकरण हो रहा है, यह ओरछा के पक्षियों पर प्रथम आलेख है। शुभकामनाएँ

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    1. ब्लॉग पर तो पहला आलेख है । कुछ लोगो ने भी लेख लिखे हैं । लेकिन मुझे उन लेखों में इंटरनेट से उठाए चित्रों को देखकर अच्छा नही लगा । इससे वास्तविक आंकलन नही हो पाता है ।

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  12. वाह! बहुत-बहुत सुन्दर पंछियों का संसार, धन्यवाद!

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  13. बारिश की बूंदों के जमीन पर गिरने के बाद मिट्टी की सोंधी खुशबू किसे अच्छी नहीं लगती (बयाँ अपने सुन्दर घोंसले)के साथ तस्वीर बहुत सूंदर लगी लगता है ओरछा की खुबसूरती जल्दी ही बुला लेगी हमे आपकी नजरे तो ओरछा के कोने-कोने पर पड़ चुकी है वहां के जीव जन्तुओ और पक्षियों को तस्वीरों के माध्यम से खुबसूरती से पेश किया है साथ ही पक्षियों की विस्तृत जानकारी भी मिली बहुत बढ़िया आलेख पसंद आया....पांडेयजी !

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  14. पक्षियों के बारे मैं अद्भुत जानकारी

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  15. बहुत ही बढ़िया और जानकारी से भरी पोस्ट !! कभी मौका लगा तो देखेंगे जरूर

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ab apki baari hai, kuchh kahne ki ...

orchha gatha

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