रविवार, 13 सितंबर 2009

कुर्सी खामोश है !!

अजब सा हो गया है, देश का हाल
सबसे सस्ती कारऔर सबसे महंगी दाल
कहीं बाढ़ से लोग त्रस्त,कहीं पर सूखा
आम इन्सान परेशां खड़ा , नंगा और भूखा
जिन्दगी की साडी मिठास ले महँगी हुई चीनी
बची खुची इज्ज़त भी कुदरत ने छिनी
आंकडो में महंगाई और मुद्रास्फीति घट रही है
हकीकत में क़र्ज़ से किसान की छाती फट रही है
कहीं पानीसे तबाही, कहीं पानी की कमी
पर कुर्सी खामोश है, सलामत जो उसकी जमीं
मित्रो , देश के हालत आपसे छुपे नही है , मगर हमरी खाशी ही कुर्सी को खामोश किए है । आज बढती महंगाई के कारन एक आम आदमी को दाल रोटी भी ढंग से नसीब नही हो पा रही है , आम आदमी की सरकार के मंत्री तो फाइव स्टार होटलों में मजे कर रहे मगर आम आदमी .............?
यही हाल आम आदमी की भाषा हिन्दी का भी है , जिस तरह सत्तानशीं लोगो को आम आदमी की याद चुनावो में आती है , उसी तरह हिन्दी की याद भी सितम्बर के महीने आती है । कल हिन्दी की पुण्यतिथि ओफ्फ्हो क्षमा करना हिन्दी दिवस है । हम क्यों साल के कुछ दिन हिन्दी को कुछ दिन याद कर उसे श्रद्धांजलि देते है ? मैं आप सभी हिन्दी ब्लोगेर्स को नमन करता हूँ , जो हमेशा हिन्दी की लाज बचाए रखते है । उड़नतश्तरी वाले समीर जी तो विशेष रूप से नमन योग्य है जो परदेश में भी हिन्दी की अलख जगाये हुए है । खैर मुझ अज्ञानी से जो भी भूल हुई हो उसे क्षमा करना ! आप सभी को भारत की रास्त्रभाषा दिवस की कोटि कोटि शुभकामनाये ॥
जे हो हिन्दी , हिंदुस्तान की शान

3 टिप्‍पणियां:

  1. आपको हिन्दी में लिखता देख गर्वित हूँ.

    भाषा की सेवा एवं उसके प्रसार के लिये आपके योगदान हेतु आपका हार्दिक अभिनन्दन करता हूँ.

    उत्तर देंहटाएं
  2. BEHAD KHUBSOORAT POST ............BHASHA KI SEWA OUR UASAKE PRASAR KELIYE JO YOGDAN AAPANE DIYE HAI USAKO NAMAN

    उत्तर देंहटाएं
  3. अच्छी प्रस्तुति....बहुत बहुत बधाई...
    मैनें अपने सभी ब्लागों जैसे ‘मेरी ग़ज़ल’,‘मेरे गीत’ और ‘रोमांटिक रचनाएं’ को एक ही ब्लाग "मेरी ग़ज़लें,मेरे गीत/प्रसन्नवदन चतुर्वेदी "में पिरो दिया है।
    आप का स्वागत है...

    उत्तर देंहटाएं

ab apki baari hai, kuchh kahne ki ...

orchha gatha

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