सोमवार, 10 अक्टूबर 2011

चिर ऋणी रहूँगा गुरुवर का ....











परम पूज्य स्वामी श्री सुकान्तानंद जी के श्री चरणों में सादर समर्पित !


जब चारो तरफ था अँधेरा, माँ थी मुझसे दूर

जिन्दगी उलझनों से घिरी, मैं था मजबूर

राह कोई सूझी नही, प्यास मेरी बुझी नही

जीवन में थी एक कमी, और आँखों में थी नमी

किस डगर पर चालू , कैसे जीवन में संभालू

मन में थे कई विचार , पर मैं न था तैयार

तब किसी ने हाथ थमा , जिन्दगी को दिया अमलीजामा

अब तक था मैं गुमराह , फिर मिली मुझे सही राह

दूर हटी परेशानियों की छाया , जीवन में उजाला आया

भटकते- भटकते पहुंचा जहाँ , अहसान है उस दर का

आगे अब शब्द नही, चिर ऋणी रहूँगा गुरुवर का


आपका चरण सेवक

मुकेश पाण्डेय "चन्दन "

मंगलवार, 4 अक्टूबर 2011

बूँद











कौन कहता है ,कि बूँद छोटी होती है

वो अपने अन्दर सागर समेटे होती है


जीवन की शुरुआत बूँद से ही होती है


बूँद के बिना कहाँ आँख रोती है ?


बूँद से बादल, बादल से वर्षा होती है


वर्षा की बूँद, बीजों में जीवन बोती है


करते श्रम तो पसीने की बून्द निकलती है


बूँद जीवन का सत्य लेकर मचलती है


छोटी होकर बड़ा होना , बूँद सिखलाती है



संगठन ही जीवन है, ये बूँद दिखलाती है





- मुकेश पाण्डेय 'चन्दन'

गुरुवार, 22 सितंबर 2011

‎32 रुपये प्रतिदिन खर्च करने वाला गरीब नहीं:

‎32 रुपये प्रतिदिन खर्च करने वाला गरीब नहीं:

योजना आयोग आजतक ब्यूरो नई दिल्ली, 21 सितम्बर 2011 क्या दिल्ली में सिर्फ 32 रुपये रोजाना की कमाई पर कोई गुजर-बसर कर सकता है?

सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को दाखिल हलफनामे में योजना आयोग ने गरीबी रेखा की जो नई परिभाषा तय की है, उसमें कहा गया है कि दिल्ली, मुंबई, बैंगलोर या चेन्नई में अगर चार लोगों का परिवार महीने में 3860 रुपये से ज्यादा खर्च करता है तो उसे गरीब नहीं माना जाएगा.
...
चार लोगों पर 3860 रुपये का मतलब है एक आदमी पर 32 रुपये प्रतिदिन. इसी तरह योजना आयोग के मुताबिक अगर ग्रामीण क्षेत्रों में कोई शख्स हर रोज 26 रुपये से ज्यादा खर्च करता है तो वो गरीब नहीं कहलाएगा. उसे गरीबी रेखा के नीचे रहने वाले लोगों के लिए चलने वाली सरकारी योजना का लाभ नहीं मिलेगा.

सब्जी की कीमतों में आग लगी है. दूध के दाम लगातार बढ़ रहे हैं. खाने पीने की चीजों के भाव आसमान छू रहे हैं. महंगाई ने आम आदमी की कमर तोड़ कर रख दी है. लेकिन योजना आयोग की दलील है कि जो हर रोज 32 रुपए खर्च कर सकता है वो गरीब नहीं कहा जाएगा.

चलिए जानते हैं कि योजना आय़ोग ने सुप्रीम कोर्ट में जो हलफनामा दायर किया है उसमें गरीबी की परिभाषा क्या दी गई हैः

1. शहरों में जो 965 रुपए प्रति माह खर्च करते हैं. यानी शहरों में जो 32 रुपए प्रति दिन खर्च करते हैं वो गरीब नहीं है.

2. गांवों में जो 781 रुपए प्रति माह खर्च करते हैं. यानी गांवों में जो 26 रु प्रति दिन खर्च करते हैं वो गरीब नहीं हैं.

3. मेट्रो में रहने वाला 4 लोगों का परिवार अगर प्रति माह 3860 खर्च करता है. वो गरीब नहीं हैं.

योजना आयोग ने गरीब और गरीबी की परिभाषा बदल दी.

अब इस बदली हुई परिभाषा के अनुसार शहरों में 32 और गांवों में 26 रुपए खर्च करने वाले लोग कल्याणकारी योजनाओं का लाभ नहीं उठा सकते. तेंदुलकर कमेटी का हवाला देते हुए योजना आयोग ने कहा कि आप गरीब नहीं है

अगर चावल या गेहूं पर हर रोज 5 रु खर्च करते हैं.

अब देखिए 5 रुपये में आपको मिलेगा क्या. दिल्ली में चावल औसतन 22 रुपए किलो है और गेहूं औसतन 12 रु किलो. तो 5 रुपए में मिलेगा 136 ग्राम चावल (3 रु का) और 166 ग्राम गेहूं (2 रुपए). योजना आयोग कहता है आप गरीब नहीं हैं.

अगर हर रोज 1.80 रु सब्जियों पर खर्च करते हैं. अब देखिए 1.80 रुपए में मिलेगा क्या 180 ग्राम आलू या 90 ग्राम प्याज या 90 ग्राम टमाटर या 180 ग्रा लौकी. योजना आयोग कहता है कि आप गरीब नहीं हैं.

अगर हर रोज दाल पर 1 रुपये खर्च कर सकते हैं. अब जरा देखिए 1 रुपये में कितनी दाल मिलेगी. दिल्ली में दाल की औसत दर 50 रु प्रति किलो है. यानी 1 रुपये में सिर्फ 20 ग्राम दाल मिलेगी. योजना आयोग कहता हैं. आप गरीब नहीं हैं

अगर दूध पर हर रोज 2.30 रुपये खर्च करते हैं. अब देखिए 2.30 रु में कितना दूध मिलेगा. दूध की कीमत है 34 रुपये प्रति लीटर. लिहाजा 2.30 रुपये में सिर्फ 67 मिली दूध मिल सकता है. योजना आयोग कहता है. आप गरीब नहीं है

अगर एलपीजी पर हर महीने 112 रुपए खर्च करते हैं. अब ब्लैक मार्केट में एलपीजी दरों के मुताबिक 112 रुपए में करीब दो किलो एलपीजी ही मिल सकती है.

योजना आयोग ने सुप्रीम कोर्ट को आंकड़े तो बता दिया. लेकिन जरा सोचिए क्या इस बढ़ती महंगाई में 32 रुपये प्रतिदिन में कोई अपना गुजारा कर सकता है.

जरा सोचिए क्या महज 3860 रुपये में चार लोगों का परिवार अपनी जिंदगी काट सकता है. आप ये सवाल योजना आयोग को छोड़कर किसी से भी पूछिए जवाब मिलेगा आंकड़ों से जिंदगी नहीं चलती.See More

बुधवार, 14 सितंबर 2011

न चुनर बची न चिंदी : यही तो है आज की हिंदी



आप सभी को हिंदी दिवस की हार्दिक शुभकामनाये !



आज ब्लोगिंग जगत में बहुत से लोग हिंदी के बारे में लिखेंगे , बहुत से कार्यक्रम होंगे , हिंदी की बेइज्जती और सम्मान भी होगा । और कल फिर हिंदी भुला दी जाएगी । आज हिंदी इस दशा पर आंसू भी नही निकलते !!!!



ब्लोगिंग जगत में मैं समीर लाल 'समीर" (उड़नतश्तरी ) जी का ह्रदय से आजीवन आभारी रहूँगा , क्योंकि अगर वो न होते तो शायद इस ब्लॉग को आप न पढ़ पाते । कनाडा जैसे आंग्लभाषी राष्ट्र में रहकर हिंदी की इतनी सेवा करना समीर जी जैसा कोई बिरला (सीमेंट नही ) ही कर सकता है । सर्वप्रथम समीर जी सारे हिंदी ब्लोगेर्स की और से मैं आपको कोटि कोटि नमन करता हूँ । तत्पश्चात बाकि हिंदी सेवी लोगो को भी मेरा नमन !!!



मेरे मन में आज की हिंदी को लेकर कुछ ख्याल आ रहे है .............






न चुनर बची न चिंदी !



वाह रे ! मेरे देश की राजभाषा हिंदी



अपने ही देश में तू परायी है



हिंदी बोलने में क्यों हमें शर्म आई है



तकनीक में भी अंग्रेजी नही है मज़बूरी



तो भैया , क्यों है हिंदी से दुरी



जिसने हमें पाला पोसा
उसी का हमने तोडा भरोसा



थोड़े पढ़ लिख कर बन गये अंग्रेज



हिंदी टूटी खटिया और विदेशी को सुन्दर सेज



राम भरोसे अपनी भाषा



हिन्दलिश में होती , नयी परिभाषा



अरे कपूतो ! अब तो आँखे खोलो



घर में ही सही , अपनी भाषा तो बोलो



शनिवार, 10 सितंबर 2011

बस सफलता से एक कदम दूर ............


नमस्कार मित्रो ,
एक खुशखबरी है !
हाल ही में मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित राज्य सेवा परीक्षा २००९ की मुख्य परीक्षा का परिणाम घोषित हुआ है । और ख़ुशी की बात ये है , कि इस परीक्षा में आपका ये परिचित इस परीक्षा में सफल हो गया है । और ५ दिसंबर से साक्षात्कार शुरू हो रहे है ..........मतलब मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग में अंतिम चयन में बस एक कदम दूर हूँ । आपकी दुआओं के साथ इस सफलता की उम्मीद में आपका ही ...........

गुरुवार, 1 सितंबर 2011

रविवार, 14 अगस्त 2011

एक अनोखा रक्षाबंधन: इतिहास के झरोखे से



सर्वप्रथम आप सभी को प्यार के बंधन के पावन पर्व रक्षाबंधन की हार्दिक शुभकामनाये !!



मित्रो , हमारे देश के महान नेताओ ने देश की आज़ादी के समय जीवन के हर पक्ष को आज़ादी के एक मौके की तरह से इस्तेमाल किया , चाहे वो त्यौहार ही क्यों न हो !



इसी तरह जब १९०५ में लार्ड कर्जन ने बंगाल का विभाजन प्रस्तावित किया तो , गुरुदेव रवींद्र नाथ टेगौर (तब उन्हें गाँधी जी ने गुरुदेव की उपाधि नही दी थी ) ने रक्षाबंधन पर्व का एक सार्थक प्रयोग किया था। चूँकि अंग्रेजो का बंग भंग करने का मकसद फूट डालो राज करो की नीति के अंतर्गत हिन्दू मुसलमानों में फूट डालना था । लेकिन हमारे महान नेताओ ने उनके मंसूबो पर पानी फेर दिया । जहाँ कृष्ण कुमार मित्र ने स्वदेशी आन्दोलन चलाकर जहाँ अंग्रेजो की नाक में दम कर दिया था , वहीँ रवींद्र नाथ टेगौर ने रक्षा बंधन को अनोखे तरीके से मनाया । पुरे बंगाल में हिन्दुओ ने अपने मुस्लिम भाईयो को राखी बांध कर अंग्रेजो के मुंह पर जोरदार तमाचा मारा । इसी रक्षा बंधन के दौरान ही रवींद्र नाथ टेगौर ने अपना विख्यात गीत आमार सोनार बांगला लिखा था , जो आगे चलकर बंगलादेश का राष्ट्रगान बना । (रवींद्र नाथ टेगौर विश्व के एकमात्र व्यक्ति है जिन्होंने दो राष्ट्रों के राष्ट्रगान की रचना की है ।)



इस तरह एक रक्षाबंधन वो भी था , जब हिन्दू मुसलमान एक हो गये थे । आज के दौर में इसकी प्रासंगिकता और बढ़ गयी है .....



ये बंधन तो ...........प्यार का बंधन ..

सोमवार, 1 अगस्त 2011

भारत रत्न : न जाने कितने जतन

अटल बिहारी वाजपेयी


वर्गीज कुरियन




डॉ एम० एस० स्वामीनाथन





नमस्कार ,








आज देश में सचिन तेंदुलकर को भारत रत्न देने की मांग बड़े जोर शोर से उठ रही है। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह ने सचिन से पहले हाकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद को देने की बात कही है। जबकि मेरा मानना है , कि खिलाडियों को जब उनके खेल में योगदान के लिए पहले से ही राजीव गाँधी खेल रत्न दिया जाता है , तो उन्हें भारत रत्न दिए जाने कि तुक कहाँ तक सही है ? मेरे ख्याल से भारत रत्न सिर्फ उन्ही लोगो को दिया जाना चाहिए जिन्होंने देश के लिए बहुत कुछ किया हो , न कि किसी क्षेत्र विशेष में दिए गये योगदान के आधार पर।




आज भी देश में बहुत से ऐसे लोग है , जिन्होंने देश के लिए सचिन तेंदुलकर से ज्यादा योगदान दिया है। जैसे हरित क्रांति के सूत्रधार डॉ एम्० एस० स्वामीनाथन, श्वेत क्रांति के सूत्रधार डॉ वर्गीज कुरियन तथा ९८ परमाणु परिक्षण के पुरोधा प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी जी और ऐसे नमो कि सूचि बहुत लम्बी है जिन्होंने देश के लिए सचिन कि तुलना में कहीं ज्यादा योगदान दिया है । मैं सचिन को भारत रत्न दिए जाने का विरोधी नही हू मगर उससे पहले इन लोगो को भी भारत रत्न बनने का हक पहले है।








भारत रत्न जहाँ देश का सर्वोच्च सम्मान है , वही कुछ कमी सी लगती है , जैसे यह सम्मान प्रत्येक वर्ष नही प्रदान किया जाता है । क्या भारत भूमि में रत्नों कि इतनी कमी है , कि हम हर साल एक भारत रत्न नही दे सकते है ?








दूसरी कमी ये महसूस होती है कि इस सम्मान में अभी तक राजनेताओ का ही बोलबाला रहा है , तो क्या देश की सेवा केवल राजनेता ही करते है । नोबल पुरुस्कार कि तर्ज़ पर भारत रत्न को भी मरणोपरांत दिया जाना बंद कर देना चाहिए । क्योंकि लौह पुरुष सरदार पटेल को उनके मरने के पचास साल बाद भारत रत्न दिया जाना किस तरह से उनका सही सम्मान लगता है ।








भारत रत्न के बारे में मेरा एक और सुझाव है कि इसके लिए एक उच्च स्तरीय समिति बनायीं जनि चाहिए जिसमे अलग अलग क्षेत्रो के विशेषज्ञ हो और उनके द्वारा तैयार कि गयी सूचि पर जनता से राय जाननी चाहिए ।

सोमवार, 25 जुलाई 2011

सावन की भूलभुलैया.........



जय हो ,







बहुत सालों बाद आज सावन जमकर बरसा



जाने कब से इसके लिए था मन तरसा



रिम झिम सी फुहारों में



भीगी भीगी सी बहारो में



फिर भीगा सा कोई याद आया



मन में फिर वो सावन समाया



फिर दिल भीग गया उसकी यादो में



खुशबु सावन की बसी उसके वादों में



आज फिर घटाओं ने उसकी याद दिलाई



आज फिर से वही खुमारी छाई



जम के बरसो सावन



आज फिर याद आया साजन !

बुधवार, 29 जून 2011

जून के चर्चित तीन चेहरे: कुछ राज गहरे !!!!







१ मकबूल फ़िदा हुसैन








जून में भारतीय परिद्रश्य में तीन चेहरे चर्चित रहे । तीनो में कई समानताये और अंतर भी है।

१ मकबूल फ़िदा हुसैन


२
.मन मोहन सिंह
३ बाबा राम देव





तीनो में समानताये :-
तीनो की दाढ़ी है !!
तीनो अपने क्षेत्र में विश्वविख्यात है !!
तीनो दुसरे क्षेत्र में आते ही फिसल गये !!!
तीनो इमानदार है !!!!




शनिवार, 30 अप्रैल 2011

दार्जलिंग के चोर........












































दार्जलिंग
की खूबसूरत वादियों में
प्रकृति की गोद, बादलों की आबादियों में
शुभ्र धवल कंचनजंघा की चोटी
हिमालय के भाल का मोती
देवदार के लम्बे ऊँचे पहरेदार
पुकारते, आओ बारम्बार
खेलो बादलों के खिलोनो से
प्रकृति के अद्भुत नमूनों से
है मौन निमंत्रण , न कोई शोर
दिल चुरा ले गया, दार्जलिंग का




हिमालय की खूबसूरत चोटियों में से एक कंचनजंघा जो दार्जलिंग से बड़ी ही ख़ूबसूरती से दिखाई देती है। सचमुच अद्भुत अनुभव .....बादलो के बीच गुजरना ..............ऊँचे पहाड़ो की सुन्दर सर्पीली राहों से चाय के बागानों को निहारना .........
जरा सोचिये आप अपने होटल के कमरे में खिड़की खोले बैठे हो और ....
तभी कोई बादल चोरो की तरह आपके कमरे में आये और तब....
आपकी ख़ुशी की सीमा न रहेगी .... ये बादल आपका सचमुच दिल चुरा ले जायेगा ......
सुबह सुबह जब आप टाईगर हिल से जब सूर्योदय होते देखेंगे तो सब भूल जायेंगे .............बादलो के ऊपर टाईगर हिल से आप जब सूर्योदय के समय जब दूर हिमाच्छादित कंचनजंघा पर नजर डालेंगे तो ....मनो स्वर्ग का अनुभव होगा ..... तब ऐसा लगेगा की इस नज़ारे को हमेशा के लिए आँखों में कैद कर लें .

सोमवार, 21 फ़रवरी 2011

क्रिकेट किरकिट और एम् एम् एस

नमस्कार दोस्तों ,
इस बार पुरे देश में किरकिट और क्रिकेट की बयार चल रही है । क्रिकेट तो आप सभी को समझ में आया होगा लेकिन आप जरुर ये सोच रहे होंगे की ये किरकिट क्या है ?! अब भाई , बात ये है कि पिछला साल पूरी तरह घोटालो को समर्पित रहा और उसका असर इस साल पर भी पड़ रहा है। और पिछले साल के घोटालेबाज लोगो कि किरकिट ( बे-इज्ज़ती ) इस साल हो रही है ।
अब खिसियानी बिल्ली खम्बा नोचे वाली कहावत हो रही है। कैसे ।! अब योग वाले बाबा रामदेव ने काला धन का मुद्दा सरे देश के सामने जोर शोर से उठाया , उसमे लिप्त लोगो कि आफत हो गयी । हमारे एम्० एम० एस० साहब यानि मन मोहन सिंह जी भी परेशानी में आ गये है । हमारे ईमान दार प्रधानमंत्री जी कहते है कि , उनके मंत्रियो के घोटालो में उनका कोई योगदान नही है !!!!!!! मतलब जहाज का कप्तान कहे कि जहाज पर कोई कर्मचारी गलती करे तो कप्तान कि कोई जवाबदारी नहीं !!!!
भाई , देश में हो रही इस किरकिट का मजा लेने का नही बल्कि सजा देने का समय आ गया है ......
आपका की कहना है जनाब ?जागो भारत जागो

सोमवार, 31 जनवरी 2011

हो सकती है .. देश में फिर से एक क्रांति ?!!!

दोस्तों ,
बापू की पुण्यतिथि पर देश में बहुत समय के बाद भ्रष्टाचार के खिलाफ देश लाम बंद हुआ है । दिल्ली में किरण बेदी , अरविन्द केजरीवाल , स्वामी अग्निवेश और भ्रटाचार से पीड़ित असंख्य लोग... ...... जयपुर में अरुणा राय ...बिलासपुर में बाबा रामदेव .........और देश में कई जगह न जाने कितने लोग .................... एक आशा और आक्रोश के साथ .......
टेलीविजन पर जब इन आक्रोशित लोगो को देखा तो यह आन्दोलन कुछ अलग सा था ........?
इसमें स्वार्थी नेता नहीं थे !
इसमें राजनीति नहीं थी !!
इसमें कई अच्छे लोग शामिल थे !
इसमें आम आदमी अपने आम मुद्दे पर एकजुट हुए थे !
अब इन सब को देख कर जेहन में इतिहास में पढ़ी हुई कई क्रांतियाँ याद आ गयी ......... १७७६ में अमेरिका में लोगो ने अंग्रेजो के खिलाफ इसी तरह आवाज उठाई .... और दुनिया के पहले लिखित संविधान के साथ एक लोकतंत्र का जन्म हुआ ............. १७८९ में फ़्रांस में पेरिस में इसी तरह लोगो की भीड़ ने एक क्रांति को जन्म दिया ...... दुनिया को स्वतंत्रता , बंधुता, और समानता का नारा मिला । ....... भारत में लोग इसी तरह ..........गाँधी जी के पीछे अहिंसा के दम पर दुनिया की तब सबसे बड़ी ताकत से लड़ने चल पड़े ........ ........ .......
आज फिर से लोग परेशां है ........... महंगाई .......भ्रष्टाचार .........घोटाले ......आतंकवाद.........नक्सलवाद.... और न जाने क्या क्या ............
लोग क्रांतियाँ तब नही करते जब उन पर अत्याचार हो , जब उन्हें उनके अधिकार न मिले .... जब उनकी कही सुनवाई न हो ...!!!!
लोग क्रांतियाँ तब करते है जब इन सब का ज्ञान हो , अपने अधिकारों की जानकारी हो ..............
अब वक़्त आ गया है ........
बहुत हो गया ......
हम भारत के लोग ......
हमारा संविधान हमारे लिए है ....उनके लिए नही जो हमारा पैसा स्विस बेंको में जमा करते है।
हमारी जनता अब जाग रही है .....

बुधवार, 12 जनवरी 2011

स्वामी विवेकानंद कुछ जाने कुछ अनजानेसे .... युवादिवस की शुभ कामनाएं . फिर हाजिर हूँ ..... एक नए जोश धमाके के साथ !!

नमस्कार मित्रो,
सभी ब्लोगर्स भाई-बहनों , माताओ, चाचाओ, चाचियों , मामियों , मामाओं आदि सभी पढने वालो को देर से ही सही नव वर्ष की शुभकामनाये । इतने दिन तक गायब रहने के लिए क्षमा चाहता हूँ। वजह सिर्फ इतनी सी है की पिछले दिनों मैं मध्य प्रदेश राज्य लोक सेवा आयोग की मुख्य परीक्षा में व्यस्त रहा ।
मित्रो आज स्वामी विवेकानंद जी की जन्म तिथि को सारे देश में युवा दिवस के रूप में मनाया जा रहा हूँ तो सोचा क्यूँ न उनके जीवन के कुछ जाने अनजाने पहलूओ की चर्चा की जाये ........
स्वामी जी को आज हम विवेकानंद के नाम से जानते है , लेकिन सन्यासी होने के बाद स्वामी जी ने अपने बचपन के नाम नरेन्द्र नाथ दत्त को त्यागकर अपना नाम स्वामी विविदिशानंद रखा था । लेकिन जब विश्व धर्म संसद में भाग लेने के पहले जब खेतड़ी महराज ने स्वाजी से कहा की - स्वामीजी आपका यह नाम थोडा कठिन है , अतः आप कोई सरल सा नाम रखे तो लोगो को आसानी होगी । स्वामीजी ने खेतड़ी महराज की बात मानकर अपना नाम विवेक आनंद अर्थात विवेकानंद कर लिया । और ११ सितम्बर १८९३ को शिकागो में साडी दुनिया ने भारत के इस सन्यासी को सनातन धर्म की श्रेष्ठता पर दहाड़ते सुना ।
स्वामी जी चाहते थे कि युवा पहले स्वयं का विकास करे , तभी तो वो देश का विकास कर सकेंगे । स्वामीजी भारत को अनंत संभावनाओं वाला एक सर्वश्रेष्ठ देश मानते थे । उनका मानना था कि भारतीय युवा ही देश को स्वतंत्र कर सकते है । परन्तु स्वामीजी आत्मविकास पर भी बल देते थे।
एक बार स्वामी जी बनारस में बाबा विश्वनाथ के दर्शन से लौट रहे थे , उनके हाथो में प्रसाद कि थैली थी जिसे देख कुछ बन्दर उनकी और लपके .... स्वाजी ने दौड़ लगा दी ..बन्दर भी उनके पीछे भागे ...तभी एक दुकान वाले ने आवाज़ लगी "भागो मत सामना करो " स्वाजी जी रुके ..रुक कर पीछे देखा तो बन्दर उलटे पांव भाग गये । स्वाजी जी ने इस बात को गाँठ बाँध लिया । और अपने जीवन में कभी परेशानियों से भागे नहीं बल्कि उनका रुक कर सामना किया और विजय हासिल की ।
स्वामी जी के जीवन के बहुत सारे किस्से है जिन्हें हम अपने जीवन में उतार सकते है ........
एक बार स्वामी जी कलकत्ता में ठहरे हुए थे , वे रोज सुवह नित्य कि भांति प्रातः भ्रमण पर जाते थे , उसी रस्ते से गवर्नर जनरल भी मोर्निंग वाक को जाता था । गवर्नर जनरल ने स्वामी जी के बारे सुना था , इसलिए वो स्वामी जी कि परीक्षा लेना चाहता था। एक दिन उसने रस्ते कि एक दीवार पर लिखा ' वेयर इज गोड' स्वामी जी ने वेयर कि स्पेलिंग में से डव्लू हटा दिया । अब दीवार पर लिखा था ' हीयर इज गोड "

गुरुवार, 18 फ़रवरी 2010

न दिल में हो दूरी

कविता: न दिल में हो कौनो दूरी

लईकी- ऐसन कौन बात बा तहार भजपुरी में
कि काल्ह दुनिया बोली, एकरा के मजबूरी में
लईका -यु० पी० , बिहार के संस्कृति ह ,बड़ा नीक भाषा
दुनिया भर फैलल बा, न ह कौनो तमाशा
राज काज से लेके मनोरंजन तक बा एकरे ही चर्चा
आम आदमी के बानी ह , प्रेम मिलेला बिन खर्चा
गंगा -गंडक ,सोन-घाघरा, सब मिल के डेली आशीष
प्रेम के बोली ह, नईखे एकरा में कौनो खीस
राम, बुद्ध, महावीर के भूमि, देला शांति के सन्देश
हो कतनो बोली, भाषा, भेष , सबके ह ई भारत देश
एगो भज्पुरिया पहले हिन्दुस्तानी ह, फिर यु०पी० बिहारी
मानवता ही धरम हमनी के, करम भी ह हितकारी
त बतावा, कैसे न फैले दुनिया में भजपुरी
सबमे हो प्रेम भरल , न हो दिल में कौनो दूरी

बुधवार, 27 जनवरी 2010

जब इंदिरा जी को अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा- कुतिया और डायन.....!!!!

शीर्षक पढ़कर आप चौंक गये न ?!
मैं भी पटना से प्रकाशित हिंदुस्तान समाचार पत्र को २५ जनवरी को " नेहरु को अशिष्ट मानता था चीन " शीर्षक से छपी खबर को पढ़कर चौंका था ।
आपके के लिए हिंदुस्तान की खबर ज्यो के त्यों बिना किसी फेरबदल के प्रस्तुत कर रहा हूँ ।
" नेहरु को अशिष्ट मानता था चीन "
'निक्सन , इंदिरा एंड इंडिया पोलिटिक्स एंड बियोंड ' पुस्तक से हुआ खुलासा

भाषा

नई दिल्ली

प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरु ने हालाँकि 'हिंदी चीनी भाई-भाई ' का प्रसिद्ध नारा दिया था , लेकिन चीन ने उन्हें अशिष्ट और भारत को विदेशी मदद के मामले में अँधा कुआं माना था ।

चीन का यह भी नजरिया था कियह काफी दुखद है कि दिवंगत प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी ने भी अपने पिता से उनकी पुस्तक भारत एक खोज में अभिव्यक्ति फलसफे कि विरासत को अपनाया । इस बारे में चीन का मानना था कि भारत एक खोज नेहरु के इस विचार को जाहिर करती है कि महँ भारत का साम्राज्य मलेसिया , सीलोन (श्रीलंका )
तथा अन्य क्षेत्रो तक फैला हुआ था। ये टिपण्णी चीन के पूर्व प्रधानमंत्री चाऊ एन लाई ने पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन के समय कीथी । निक्सन ही थे , जिन्होंने इंदिरा को कुतिया और डायन कहा था , जबकि उनके राष्ट्रिय सुरक्षा सलाहकार हेनरी किसिंगर ने भारतीयों को हरामी कहा था।
ये टिप्पणिया अब पुस्तक 'निक्सन , इंदिरा एंड इंडिया : पोलिटिक्स एंड बियोंड ' का हिस्सा है । इसके लेखक वरिष्ठ पत्रकार कल्याणी शंकर है। इस पुस्तक में निक्सन के दौरे के और बाद में गोपनीयता की श्रेणी से हटाये गये दस्तावेजो का संकलन है । इन दस्तावेजो में अमेरिका, चीन और पाकिस्तान का भारतीय राजनितिक प्रणाली तथा जम्मू कश्मीर जैसे विवादस्पद मुद्दे सहित भारत के भविष्य के बारे में अपनाया गया नजरिया शामिल था । निक्सन ने २३ फ़रवरी १९७२ को चीन की अपनी एतिहासिक यात्रा के दौरान भारत पर रूस में हथियार खरीदने के लिए अमेरिकी मदद को परिवर्तित करने का आरोप लगाया था। उन्होंने कहा था कि वह पाकिस्तान को पर्याप्त आर्थिक मदद भेजेंगे , जिसका इस्तेमाल वह अन्य स्रोतों से हथियार खरीदने के लिए कर सकेगा । निक्सन ने कहा था ,' समस्या एक ऐसा रास्ता तलासने की है, जिसके जरिये पश्चिमी पाकिस्तान कुछ सैन्य उपकरण और मदद हासिल कर सके । हमारी ओर से , हम यह करेंगे किहम पश्चिमी पकिस्तान को पर्याप्त मात्र में आर्थिक मदद देंगे ।
इससे पश्चिमी पाकिस्तान, हमरे विचार से उसकी रक्षा के हित में , अन्य स्रोतों से हथियार खरीद सकेगा । ' उन्होंने कहा था कि असल तथ्य यह है कि यह भारत में हमारी नीति कि त्रासदी है। हमने बीते २० साल में भारत को मदद के तौरपर करीब १० अरब डॉलर दिए ।


उपरोक्त खबर से अमेरिका और चीन कि मानसिकता का पता चलती है । साथ ये भी पता चलता है कि इन दोनों देशो के प्रमुख अन्य देशो के प्रमुखों के लिए कैसी अभद्र भाषा का प्रयोग करते थे । इस पुस्तक के लिए जहाँ बधाई के पात्र है वही हमारे वर्तमान नेताओ को भी क्षुद्र मानसिकता का त्याग करके आगे के लिए सही वैदेशिक नीतियां बनानी होंगी। उपरोक्त खबर से हर भारतीय की तरह मेरा मन भी आहत हुआ है । इसके बाद भी अमेरिका हमारे नेताओ का अपमान कर चुकाहै (जार्ज फर्नाडिज , ए० पी० जे० अब्दुल कलाम आदि ) और हम अमेरिका और अमेरिकी नीतियों के पिछलग्गू बने है !! ....,,,जरा सोचिये ?!


अब बारी पुछल्ले की ...
अपने झल्लू जी से एक बार एक अमेरिकी मिला और बोला - हमारा कंट्री में हमको इतना फ्रीडम है , की हम व्हाईट हॉउस के सामने खड़ा होके अपने प्रेसिडेंट को गली दे सकता है ।
झल्लू जी - इसमें कौन सी बड़ी बात है, हम भी तो अपने राष्ट्रपति भवन के सामने खड़े होकर तुम्हारे प्रेसिडेंट को गाली दे सकते है । और तो और सेल तुम्हारे प्रेसिडेंट को तो सारी दुनिया गाली देती है !!!!
:-)

आपकी प्रतिक्रिया के इंतज़ार में आपका
मुकेश पाण्डेय "चन्दन"

बुधवार, 20 जनवरी 2010

अब गूगल खोजेगा लापता लोगो को .......

जी हाँ , गूगल अब तक जो इंटरनेट पर सामग्री खोजकर हम सब की मदद करता था । वो अब हैती में आये भूकंप के कारन लापता हुए लोगो को खोजने में मदद करेगा। गूगल ने एक सोफ्टवेयर हैती सरकार की सहायता के लिए तैयार किया है । जिसमे हैती में कोई भी व्यक्ति गूगल पर जाकर अपने लापता सम्बन्धी की जानकारी जैसे उसकी उम्र, लिंग, कद, और फोटो के आधार पे खोजने में मदद करेगा। ये सुविधा हैती वासियों को निसुक्ल प्रदान की जाएगी । खैर गूगल का ये कदम न केवल स्वागत योग्य है वल्कि प्रसंसनीय भी है । हमारी तकनीक अगर मुसीबत में इंसानियत के काम आती है तो ही उसकी सार्थकता है। गूगल को शुक्रिया ।

पुछल्ला ;-)
हमारे झल्लू जी के सुपुत्र से जब स्कूल में टीचर ने उसके पिता का नाम पूछा तो झाल्लुपुत्र ने बड़ी मासूमियत से जवाब दिया -जी गूगल !!!
टीचर - क्या मतलब है तुम्हारा ?
झाल्लुपुत्र- जी , क्या है , किमेरे पिताजी जब देखो कुछ न कुछ खोजते रहते है , कभी तौलिया, कभी मोज़े तो कभी मुझे !!
इसलिए मेरी मम्मी ने उनका नाम ही गूगल रख दिया है, मेरे पुरे मोहेल्ले के लोग भी उन्हें ग्गोगल ही पुकारते है ।:-)

शुक्रवार, 15 जनवरी 2010

झल्लू जी पहुचे हरिद्वार !! फसे नयी परेशानी में .........

नमस्कार दोस्तों, अपने जवाहर सिंह झल्लू जी इस बार मकर संक्रांति के शुभ अवसर पर हरिद्वार में लगे महाकुम्भ पहुच गये। अब जब झल्लू जी जहाँ हो वहां कोई अनोखी बात न हो ऐसा हो ही नही सकता है ! पहली बात अपने झल्लू जी ही अनोखे है ! अब झल्लू जी हरिद्वार में जैसे ही गंगा के किनारे कपडे उतार कर नहाने के लिए घुसे तो पानी ठंडा था। किसी तरह हिम्मत बांध कर झल्लू जी आख़िरकार जल में घुस ही गये । अब जब घुस गये तो डुबकी भी लगा ली। जब झल्लू जी डुबकी लगा के बहार आये तो , गजब हो गया ! भई , कोई महँ पापी जो अपने पाप धोने हरिद्वार कुम्भ में आया होगा , मगर अपनी आदत छोड़ नही पाया और झल्लू जी के कपडे मार ले गया ।
अब झल्लू जी लंगोट पर सर्दी में ठिठुरते खड़े ! समझ में नही आ रहा की क्या करे ? जब ठण्ड ज्यादा लगने लगी तो पोलिस थाने की और जोर से दौड़ लगा दी । मगर झल्लू जी की परेशानी यहीं ख़त्म नही हुई , उनके के पीछे एक आदमी भी दौड़ लगाने लगा ! झल्लू जी अब और परेशां की एक तो नंगे बदन ठण्ड में कुल्फी हो रहे थे , ऊपर से ये मुया पीछे पड़ गया । अब झल्लू जी आगे बड़ी तेजी से अपनी पूरी दम लगा के भागे ................ वह आदमी भी उतनी ही तेजी भगा । झल्लू जी की जान अटकी की अब क्या करे ?!
जब झल्लू जी पुलिस थाने के नजदीक पहुचे तो सोचा अब रुक के देख लिया जाये , आखिर ये इंसान क्यों मेरे पेछ्हे भाग रहा है । झल्लू जी रुके , सांस ली । इतने में वो आदमी भी पहुच गया , बोला - महराज जी आप की भेष भूओषा देख कर लग रहा है, की आप बहुत पहुचे हुए संत है । आप ही मेरा कल्याण कर सकते है । झल्लू जी की जान में जान आई और बोले- पैर छोडो , मैं कोई संत वन्त नही हूँ । मैं तो पुलिस थाने जा रहा हूँ , मेरा कोई वस्त्र हरण कर ले गया । भई मुझे माफ़ करो ।

बुधवार, 13 जनवरी 2010

झल्लू जी की नई परेशानी !

प्रिय मित्रो , अब तक आप जवाहर सिंह "झल्लू " से तो परिचित हो चुके होंगे । जैसा की आप जानते है की झल्लू जी हर बार अपनी अकल मंदी से कोई परेशानी मोल लेते है और हंसी के पात्र बन जाते है । अब सर्दी कड़ाके की पड़ रही है, मगर जल्लू जी का दिमाग भी सर्दी की तरह कड़ाके का दौड़ रहा है ! अब झल्लू जी कुछ सवालो को लेकर परेशां है , उनके सवालो के जवाब मेरे पास तो नही है शायद आप के पास हो ...........?
सवाल -१ भारत में अभी तक चुटकुले सरे रिश्तो जैसे - माँ-बाप , भाई-बहन , सास-बहु, चाचा-भतीजा, भाई-भाई, जीजा-साली, भाभी-देवर आदि पर बने मगर अभी तक कोई ससुर के ऊपर चुटकुला नही बना ! आखिर क्यों ?
२ आखिर सबसे ज्यादा चुटकुले सरदारों पर ही क्यों बनाये जाते है ?
३ चुटकुला शब्द की उत्पत्ति कैसे हुई ?

आप सभी को संक्रांति, पोंगल, खिचड़ी, लोहड़ी की हार्दिक शुभकामनाये...... जय हो

मंगलवार, 5 जनवरी 2010

औरत और आंसू !!

औरत और आंसू , है कितनी समानता
दोनों सुख-दुःख के साथी, लेके महानता
सुख दुःख का पर्याय , नयन-नीर और नारी
छलक पड़ते दोनों, सुख हो या दुःख भरी
आजीवन ही नारी की आँखों में होता पानी
हर मुस्कान और तीस से जुडी दोनों की कहानी
बिन आंसू के आँखे , कहलाती संवेदनहीन
बिन नारी के कहाँ समाज भी कहलाता कुलीन
औरत के लिए कब किसने आंसू बहाए ?
औरत के आंसू पर समाज ने खूब गीत गाये
दूजो के लिए ही तो औरत व् आंसू काम आये
अपने लिए भी बह सके , कभी तो ऐसी शाम आये ...
पुछल्ला ;- )
जवाहर सिंह "झल्लू " जब घर पहुचे तो देखा उनका बेटा रो रहा था , जब झल्लू जी ने उससे रोने का कारन पूछा तो उसने रोते-रोते बताया - पापा आज मुझे फिर से मम्मी ने मारा है। अब बहुत हो गया मेरा बा आपकी बीबी के के साथ गुजारा नही हो सकता है। मैं जा रहा हूँ ।
नव वर्ष की पुनः शुभकामनाओ के साथ आपका ही
मुकेश पाण्डेय "चन्दन"


orchha gatha

बेतवा की जुबानी : ओरछा की कहानी (भाग-1)

एक रात को मैं मध्य प्रदेश की गंगा कही जाने वाली पावन नदी बेतवा के तट पर ग्रेनाइट की चट्टानों पर बैठा हुआ. बेतवा की लहरों के एक तरफ महान ब...