मंगलवार, 5 जून 2012

आज पर्यावरण दिवस पे फिर से कुछ ढोंग किया जाये !

आज पर्यावरण  दिवस पे फिर से कुछ ढोंग किया जाये
ताकि अपनी भी तस्वीर कल अखबारों में आ जाये
प्लास्टिक के फ्लेक्स पर छपवायें , सुन्दर पोस्टर
 पौधे लगाये उन्ही गमलो में , जिन्हें भूले थे पिछली बार रोपकर
इतनी गर्मी हो रही है , जल्दी से चलाओ  ए सी
भले ही कितना बढ़ जाये , दुनिया में सी ऍफ़ सी
काटने दो सारे जंगल, नए शहर बसायेंगे
जानवरों का क्या है , शहर में रहने आ जायेंगे
वैसे भी अब क्या फर्क जानवर  और इंसान में
वो रहते हा चिड़ियाघर में और हम रहते मकान में 
चलो बहुत हुआ , कुछ तो फोटो खिच जाये
आज पर्यावरण  दिवस पे फिर से कुछ ढोंग किया जाये
- मुकेश पाण्डेय "चन्दन "

23 टिप्‍पणियां:

  1. आपने तो बेनकाब कर दिया..................

    सार्थक लेखन मुकेश जी
    सादर

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  2. कुछ तो फोटो खिच जाये
    आज पर्यावरण दिवस पे फिर से कुछ ढोंग किया जाये
    ....आपकी यह पर्यावरण के प्रति उद्दात भावनाओं को प्रकट करती है। ....बेहतरीन प्रस्तुति।

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  3. पर्यावरण पर .... आपका चिंतन और साहित्य सार्थक है...बहुत ख़ूब सर जी

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    1. संजय जी , सार्थक तभी सार्थक हो सकता है , जब उसका समाज पर कोई असर पड़े या परिणाम मिले . पर हम-आप मिल कर इस विषय पर सार्थक शुरआत कर ही सकते है

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  4. गंभीर समस्या पर सामयिक सटीक सार्थक लेखन...बहुत बहुत बधाई...

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    1. शुक्रिया चतुर्वेदी जी , लेकिन गंभीर समस्या पर गंभीरता की आवश्यकता है

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  5. पर्यावरण पर मन मोहक सुंदर सार्थक अभिव्यक्ति ,,,,,

    MY RESENT POST,,,,,काव्यान्जलि ...: स्वागत गीत,,,,,

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  6. पर्यावरण पर सुंदर सार्थक अभिव्यक्ति ,,,,,बहुत सुन्दर...

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  7. उत्तर
    1. शिवम् जी शुक्रिया , मगर सूरत बदलनी होगी , क्योंकि जीवन ही खतरे में पड़ जायेगा

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  8. कुछ तो किया जाए ... ढोंग ही सही। औद्योगिक विकास के कारण पृथ्वी के जीवन पर दबाव पड़ रहा है। जीवन खतरे में पड़ गया है। सौर प्रणाली में ढ़ेर सारे भौतिक और रासायनिक बदलाव आ रहे हैं। जीवनोपयोगी प्रणालियों में भी परिवर्तन आ रहा है। जीवन की न सिर्फ़ गुणवत्ता नष्ट हो रही है बल्कि जीवन की क्षमता भी प्रभावित हो रही है। जीव-जंतु विलुप्त हो रहे हैं। फसलों की पैदावार घट रही है। जल-संकट गहराता जा रहा है। आज पृथ्वी की पर्यावरण चिन्ता सर्वाधिक महत्वपूर्ण सरोकार और गंभीर चिंता का विषय है क्योंकि आज हम खुद को बचाने के उपाय ढ़ूंढ़ रहे हैं।

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    1. मनोज जी , अगर ढोंग करने से कोई हल निकलता हो , तो कोई समस्या नही है . मगर रिओ , क्योटो , कोपेनहेगन , बाली और न जाने कितने सम्मलेन और आयोग के बाद भी ढाक के तीन पात ! हमारे देश में तो ये समस्या और भी गंभीर है. इसके लिए जनता के साथ साथ सरकार को भी जागना होगा !

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  9. सही कह रहे हैं आप आजकल इंसान और जानवर में वाकई कोई खास फर्क नहीं रह गया है सार्थक एवं सटीक प्रस्तुति ....समय मिले आपको तो आयेगा मेरी पोस्ट पर आपका स्वागत है।

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  10. वाह पाण्डेय जी। सत्य वचन।

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  11. पांडेय जी इसे whatsapp ग्रुप पर पोस्ट कर रहा हूँ।गुस्सा मत होना😊😊😊

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  12. सही बात है,पता नहीं रोज कितने पेड़ काट कर आज पर्यावरण दिवस मना रहे है

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  13. सही बात है,पता नहीं रोज कितने पेड़ काट कर आज पर्यावरण दिवस मना रहे है

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  14. सार्थक एवं सटीक प्रस्तुति ...

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  15. गजब पांडेय जी (दरोगा बाबू)

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ab apki baari hai, kuchh kahne ki ...

orchha gatha

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