शनिवार, 12 मई 2012

जिन्दगी की पहली डगर होती है माँ















कहते है कि  भगवान  से भी  बढ़कर होती है माँ 
जिन्दगी   की   पहली    डगर    होती     है   माँ 

सबसे पहले मैंने, तुम्हारी  आँखों से देखा था 
जब  तुम बनी मेरी पहली नज़र माँ 

जब मैं रोते-रोते, इस दुनिया में आया 
तो पहली हंसी में था, तुम्हारा असर  माँ

जब मैं  रात को करता बिस्तर गीला 
 तुमने गुजारी कई रातें जागकर  माँ 

जब मैं घुटनों  के बल चलता था 
तुमने चलना सिखाया, हाथ थामकर माँ

आज मुझे तुम्हारी जरुरत है माँ 
आ जाओ , अपने साथ बचपन बांधकर  माँ 

                मित्रो , माँ के विषय में बात करते समय समय मैं अक्सर भावुक हो , जाता हूँ , क्योंकि  साढ़े चार साल की उम्र से ही मैं अपनी नानी के पास रहने लगा था। हालाँकि नानी ने माँ की कमी को पूरा करने की पूरी  या कहे उससे ज्यादा प्यार दिया . मगर माँ तो माँ होती है . साल भर में जब  माँ आती तो ये कमी ये कमी दूर होती . आज भी जब माँ आती है ,तो मैं अपना बचपना जीना चाहता हूँ , और माँ के सामने एक छोटा सा बच्चा बन जाता हूँ . माँ आज भी कहती है , कि  तुम  सबसे बड़े नही सबसे छोटे बच्चे हो . माँ के सामने तो ताउम्र बच्चा ही रहना चाहता हूँ , . उम्र कितनी भी बढती जाये  ! इस  " मदर्स  डे  " पर माँ के लिए एक छोटी सी श्रद्धांजलि ...........................
दुनिया में किसी भी देश में लोग चाहे जैसे हो मगर माँ एक सी होती है . सभी माँ  को मेरी विनम्र श्रद्धांजलि 

34 टिप्‍पणियां:

  1. आज मुझे तुम्हारी जरुरत है माँ
    आ जाओ , अपने साथ बचपन बांधकर माँ

    खुबशुरत भाव अभिव्यक्ति ,....

    MY RECENT POST ,...काव्यान्जलि ...: आज मुझे गाने दो,...

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  2. माँ की कमी कोई पूरी नहीं कर सकता ... मन के भावों को खूबसूरती से लिखा है

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  3. सुन्दर ।।

    सादर नमन ।

    जय माँ ।।

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  4. माँ' जिसकी कोई परिभाषा नहीं,
    जिसकी कोई सीमा नहीं,
    जो मेरे लिए भगवान से भी बढ़कर है
    जो मेरे दुख से दुखी हो जाती है
    और मेरी खुशी को अपना सबसे बड़ा सुख समझती है
    जिसकी छाया में मैं अपने आप को महफूज़
    समझती हूँ, जो मेरा आदर्श है
    जिसकी ममता और प्यार भरा आँचल मुझे
    दुनिया से सामना करने की ‍शक्ति देता है
    जो साया बनकर हर कदम पर
    मेरा साथ देती है
    चोट मुझे लगती है तो दर्द उसे होता है
    मेरी हर परीक्षा जैसे
    उसकी अपनी परीक्षा होती है
    माँ एक पल के लिए भी दूर होती है तो जैसे
    कहीं कोई अधूरापन सा लगता है
    हर पल एक सदी जैसा महसूस होता है
    वाकई माँ का कोई विस्तार नहीं
    मेरे लिए माँ से बढ़कर कुछ नहीं।

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    1. वाकई माँ का कोई विस्तार नहीं
      मेरे लिए माँ से बढ़कर कुछ नहीं।
      bahut khoob abhishek ji

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  5. मां के लिए दिल से प्रकट आपके उद्गार भावुक कर गए। दुनिया की हर मां को नमन!

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  6. मां है तो हम हैं , सारी सृष्टि है
    माँ को शत- शत नमन ……सुन्दर प्रस्तुति।

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  7. माँ तो बस माँ होती है..माँ शब्द में सारा संसार समाया हुआ है...माँ को नमन..सुन्दर पोस्ट..आभार..

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  8. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

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  9. आपके मनोभावों को पूरी तरह से समझ सकती हूँ...........................
    बस एक माँ ही होती है जिनका कोई विकल्प नहीं.....

    बहुत भावभीनी रचना.

    अनु

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  10. बहुत उम्‍दा विचार हैं। चंदन की खुशबू, मन मोहे जाय

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  11. जब मैं रात को करता बिस्तर गीला
    तुमने गुजारी कई रातें जागकर माँ ..

    बस एक माँ ही है जो ऐसा कर सकती है ... सच्चे उदगार हैं माँ के लिए ...

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  12. सच कहा माँ कहीं भी हो माँ ही होती है.
    भावपूर्ण रचना.

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  13. सुन्दर भावपूर्ण रचना...बहुत बहुत बधाई...

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  14. आमंत्रित सादर करे, मित्रों चर्चा मंच |

    करे निवेदन आपसे, समय दीजिये रंच ||

    --

    शुक्रवारीय चर्चा मंच |

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  15. शुक्रिया मुकेश जी ...
    वयस्तता के कारण किसी के ब्लॉग पर नहीं जा पा रही हूँ ...
    सम्भवता आप पहली बार आये मेरे ब्लॉग पे ..आना फ़र्ज़ था ....
    माँ को आदर देने के लिए आभार .....
    माँ के प्रति ये आदर बना रहे यही दुआ है ....

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  16. माँ सारी सृष्टि है...सुन्दर भावपूर्ण रचना...बहुत बहुत बधाई...

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  17. मां की परिक्रमा ये मन ताउम्र करता रहता है ... फिर भी मां को ढूंढता रहता है...भावमय प्रस्‍तु‍ति ...

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  18. बहुत भावपूर्ण पोस्ट माँ की याद में आँखे नम हो गई धन्य है वो हर माँ जिसके बेटे के विचार तुम जैसे हों ...शुभकामनाएं

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  19. वाकई माँ से बढ़कर कुछ नहीं।

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ab apki baari hai, kuchh kahne ki ...

orchha gatha

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